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प्रदूषण से खून में बढ़ रही CO2, बना रही भुलक्कड़, बेहोशी की हालत में अस्पतालों में आ रहे मरीज

Fri, 11 Dec 2020 02:23 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 11 Dec 2020 02:23 PM IST
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Pollution increases CO2 in blood, making people forgetful, patients coming to hospitals in unconscious state
कानपुर में प्रदूषण - फोटो : amar ujala
प्रदूषण बढ़ने से शहरियों के खून में कॉर्बन डाइऑक्साइड (CO2) अधिक घुल रही है। इसका खुलासा ऑर्टीरियल ब्लड गैस (एबीजी) जांच से हो रहा है। इससे भुलक्कड़पन, चिड़चिड़ापन और फिर बेहोशी के रूप में लक्षण सामने आ रहे हैं। कोरोना काल होने से खतरा अधिक बढ़ गया है।
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संक्रमण से मुक्त हुए तथा दमा, अस्थमा, सांस की एलर्जी और सिगरेट-बीड़ी पीने वालों को अचानक बेहोशी आ रही है। वे कोमा तक में चले जा रहेे हैं। कुछ मरीजों को सीधे वेंटिलेटर पर रखना पड़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक पल्स ऑक्सीमीटर से इसका पता नहीं चल पाता है।
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एबीजी जांच में ही यह दिक्कत पकड़ में आती है। सामान्य तौर पर खून में 45 प्रतिशत से कम कॉर्बन डाइऑक्साइड होनी चाहिए। लेकिन जांचों में यह 70 फीसदी तक मिल रही है। सीनियर चेस्ट फिजीशियन डॉ. राजीव कक्कड़ का कहना है कि इस तरह के मामले पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सामने आ रहेे हैं।
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दीपावली के बाद से मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं, डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार का कहना है कि प्रदूषण बढ़ने से सांस के मरीजों में ऑक्सीजन लेवल घटने की दिक्कत पैदा हुई है।

खून में कॉर्बन डाइऑक्साइड बढ़ने केे लक्षण
-कमजोरी और थकान महसूस होना
-याददाश्त में कमी आना
-जरा सी बात पर गुस्सा आना, उलझन होना
-बेहोशी की हालत होना, कोमा में चले जाना
बचाव के लिए ये करें 
-सिगरेट, बीड़ी पीना बिल्कुल बंद कर दें
-सुबह और रात को जब एक्यूआई अधिक हो बेवजह बाहर न निकलें
-घर में आग जलाकर न सोएं
-घर के बाहर टायर, ट्यूब, कचरा न जलाएं, वेंटिलेशन की व्यवस्था करें
-गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चों का विशेष ख्याल रखें

प्रदूषण बढ़ने से सांस के मरीज बहुत खराब स्थिति में आ रहे हैं। कोरोना से ठीक होने वालों को भी दिक्कत हो रही है। इसके लिए प्रदूषण से बचें और योग करेें। पुराने मरीज अपनी दवा की डोज सही करा लें। डॉ. एसके कटियार, सीनियर चेस्ट फिजिशियन, पूर्व प्राचार्य जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

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