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Kanpur News: प्लॉट बेटे के नाम, केडीए पिता को भेज रहा अवैध निर्माण का नोटिस
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कानपुर। केडीए की ओर से गलत व्यक्ति के नाम पर अवैध निर्माण के नोटिस जारी करने का मामला सामने आया है। आरटीआई में मांगे गए जवाब में केडीए ने आसपास के लोगों से पूछताछ के आधार पर नोटिस भेजने का जवाब दिया है। प्लॉट मालिक ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत की है।
मामला हर्ष नगर स्थित भूखंड संख्या 111-313 का है। हर्षनगर निवासी कारोबारी संजय मित्तल ने बताया कि प्लाॅट का मालिकाना हक बेटे अंशुल और अजय कुमार अग्रवाल के नाम पर है। बीते दिनों गलत शिकायत के आधार पर केडीए की टीम ने प्लाॅट पर हो रहे निर्माण को सील कर दिया। निर्माण सील किए जाने का नोटिस मिलने पर इसकी जानकारी हुई। केडीए से पूछा तो अधिकारी गोलमोल जवाब देने लगे। इस पर बेटे ने केडीए में आरटीआई डालकर उनके नाम पर नोटिस जारी करने की जानकारी मांगी। इस पर केडीए की ओर से जवाब दिया गया कि नोटिस जारी करने के लिए मौके पर प्लाॅट मालिक का नाम पूछा जाता है। लोगों ने संजय मित्तल नाम बताया तो उनके नाम पर नोटिस जारी किया गया। बाद में पता चला कि यह प्लॉट उनके बेटे अंशुल मित्तल के नाम पर है। संजय ने कहा कि इस प्लॉट का पहले से नक्शा पास है। प्लाॅट किसके नाम है इसकी जानकारी केडीए के पास है। केडीए कह रहा कि सीलिंग से पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। ऐसे में बिना यह जाने कि यह प्लॉट किसका है केडीए किसे नोटिस भेज रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि मिलीभगत कर सीलिंग की गई है। पहले दबाव बनाया गया कि जिस रेट पर प्लाॅट लिया है उस पर बेच दो। फिर केडीए अधिकारियों ने उनसे मामला खत्म करने के नाम पर 50 लाख रुपये मांगे हैं।
अलग से वर्जन लगाएं
माैके पर भरी जाती डिटेल
सीलिंग की कार्रवाई के दौरान विभागीय एप पर मौके पर निर्माण की तस्वीर और संबंधित प्लॉट मालिक के नाम की डिटेल भरी जाती है। इसी आधार पर किसी ने उनका नाम बता दिया होगा। बाद में जानकारी मिलने पर इसे सही करा दिया गया। आरोपों के संबंध में जानकारी नहीं है। - अभय कुमार पांडेय, केडीए सचिव
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मामला हर्ष नगर स्थित भूखंड संख्या 111-313 का है। हर्षनगर निवासी कारोबारी संजय मित्तल ने बताया कि प्लाॅट का मालिकाना हक बेटे अंशुल और अजय कुमार अग्रवाल के नाम पर है। बीते दिनों गलत शिकायत के आधार पर केडीए की टीम ने प्लाॅट पर हो रहे निर्माण को सील कर दिया। निर्माण सील किए जाने का नोटिस मिलने पर इसकी जानकारी हुई। केडीए से पूछा तो अधिकारी गोलमोल जवाब देने लगे। इस पर बेटे ने केडीए में आरटीआई डालकर उनके नाम पर नोटिस जारी करने की जानकारी मांगी। इस पर केडीए की ओर से जवाब दिया गया कि नोटिस जारी करने के लिए मौके पर प्लाॅट मालिक का नाम पूछा जाता है। लोगों ने संजय मित्तल नाम बताया तो उनके नाम पर नोटिस जारी किया गया। बाद में पता चला कि यह प्लॉट उनके बेटे अंशुल मित्तल के नाम पर है। संजय ने कहा कि इस प्लॉट का पहले से नक्शा पास है। प्लाॅट किसके नाम है इसकी जानकारी केडीए के पास है। केडीए कह रहा कि सीलिंग से पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। ऐसे में बिना यह जाने कि यह प्लॉट किसका है केडीए किसे नोटिस भेज रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि मिलीभगत कर सीलिंग की गई है। पहले दबाव बनाया गया कि जिस रेट पर प्लाॅट लिया है उस पर बेच दो। फिर केडीए अधिकारियों ने उनसे मामला खत्म करने के नाम पर 50 लाख रुपये मांगे हैं।
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माैके पर भरी जाती डिटेल
सीलिंग की कार्रवाई के दौरान विभागीय एप पर मौके पर निर्माण की तस्वीर और संबंधित प्लॉट मालिक के नाम की डिटेल भरी जाती है। इसी आधार पर किसी ने उनका नाम बता दिया होगा। बाद में जानकारी मिलने पर इसे सही करा दिया गया। आरोपों के संबंध में जानकारी नहीं है। - अभय कुमार पांडेय, केडीए सचिव
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