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Kanpur News: लगाए पौधे बचे या सूख गए, रिपोर्ट देने से बच रहे चार ईओ
Thu, 16 Jan 2025 01:03 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Thu, 16 Jan 2025 01:03 AM IST
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कानपुर देहात। हरियाली बढ़ाने के लिए अभियान चलाकर चार ब्लॉकों में जुलाई में 305 स्थलों पर 6, 94, 319 पौधे लगाए गए थे। अब लगाए पौधे बचे या सूख गए। इसकी सत्यापन रिपोर्ट देने से चार ईओ बच रहे हैं। हालात ये हैं कि डीएम की एक सप्ताह की मोहलत को दरकिनार कर इन ईओ ने 23 दिन ज्यादा बीतने के बाद भी ब्योरा नहीं दिया है।
हरियाली बढ़े इसके लिए लगाए पौधों की सुरक्षा पर इस बार जोर अधिक दिया गया। हालांकि कई जिम्मेदारों ने इसे संजीदगी से नहीं किया। इसकी वजह से लगाए पौधे सूख कर नष्ट हो गए। कई जगह पौधे बिना सुरक्षा के पशु चर गए। 24 विभागों में सबसे अधिक पौधे ग्राम्य विकास विभाग की ओर से लगाए गए। ग्राम्य विकास के अधीन दस ब्लॉकों में कुल 16, 86, 173 पौधे लगाए गए। अंतरविभागीय टीमों में नगर निकाय में कार्यरत ईओ को स्थलीय सत्यापन की जिम्मेदारी दी गई। अन्य छह ब्लॉक क्षेत्र में लगाए गए पौधों की सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध करा दी गई। जबकि सरवनखेड़ा, रसूलाबाद, डेरापुर व संदलपुर ब्लॉक में लगाए 6, 94, 319 पौधों में कितने जीवित बचे या कितने सूख गए इसकी सत्यापन रिपोर्ट चार ईओ की टीमों ने नहीं दी है। नवंबर अंत तक सत्यापन पूरा करने के निर्देश दिए गए थे।
जिला पौधरोपण समिति की 17 दिसंबर को बैठक में नौ टीमों के सत्यापन रिपोर्ट न देने पर डीएम ने एक सप्ताह की मोहलत दी थी। इसपर पांच टीमों ने तो रिपोर्ट सौंप दी मगर चार ईओ ने पौधों के जीवित होने का ब्योरा नहीं दिया है। जानकारों का कहना है कि सत्यापन रिपोर्ट में देरी से सवाल उठ रहे हैं। आशंका है कि चिन्हित स्थलों में अधिक पौधे सूख कर नष्ट होना भी इसकी वजह हो सकता है। डीएफओ एके द्विवेदी ने बताया कि संबंधित ईओ को रिमांइडर जारी किया गया है। इसी सप्ताह सत्यापन रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
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सत्यापन में इन निकायों के ईओ लापरवाह
सरवनखेड़ा ब्लॉक क्षेत्र में 63 स्थलों पर लगाए पौधों का सत्यापन ईओ रनियां को कराना है। इसी प्रकार रसूलाबाद ब्लॉक क्षेत्र में 111 स्थलों पर पौधरोपण की हकीकत ईओ रसूलाबाद को जांचनी है। डेरापुर ब्लॉक क्षेत्र में 71 स्थलों पर रोपे गए पौधों का स्थलीय सत्यापन ईओ सिकंदरा और संदलपुर ब्लॉक क्षेत्र में 60 स्थलों पर लगाए गए पौधों का सत्यापन ईओ झींझक को कराना है। संवाद
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6 ब्लॉकों में लगाए गए 9,91, 854 पौधे, 15, 159 सूख गए
ग्राम्य विकास विभाग की ओर से ब्लॉक क्षेत्र में लगाए गए पौधों में काफी नष्ट हो गए हैं। छह ब्लॉकों की सत्यापन रिपोर्ट में 15159 पौधे सूखने या नष्ट होने की बात सामने आई है। अमरौधा ब्लॉक में 169949 पौधे जीवित मिले जबकि 2414 पौधे नष्ट हो गए। अकबरपुर ब्लॉक में 164613 पौधे लगे पाए गए। 2338 पौधे नष्ट हो गए। मैथा ब्लॉक में 198688 पौधे लगे मिले। 2822 पौधे सूख गए। राजपुर ब्लॉक में 149409 पौधे लगे मिले। 1815 पौधे सूख गए। मलासा ब्लॉक में 172730 पौधे जीवित मिले। 2276 पौधे नष्ट हो गए। झींझक ब्लॉक में 121306 पौधे लगे मिले। 3494 पौधे नष्ट हो गए। संवाद
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सरगांव बुजुर्ग व गलुवापुर छुट्टा मवेशी चर गए पौधे
फोटो- 6 डेरापुर ब्लॉक में सरगांव बुजुर्ग में सड़क किनारे से नदारद पौधे। संवाद
डेरापुर। ब्लॉक के सरगांव बुजुर्ग से गलुवापुर मार्ग और सरगांव बुजुर्ग से अहिरन गढ़ेवा मार्ग किनारे ग्राम पंचायत की ओर से पौधे लगाए गए थे। हालांकि पौधों की देखरेख और सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई। इसकी वजह से छुट्टा मवेशी पौधे चर गए। अहिरन गढ़ेवा मार्ग पर देवस्थान के पास श्रीलाल व सियाराम के खेत के पास आम, कटहल, नींबू के लगाए गए पौधे नदारद हैं। ग्राम प्रधान जगराम कठेरिया ने बताया कि सुरक्षा के अभाव में अधिकांश पौधे मवेशी चर गए। वहीं, काफी सूखकर नष्ट हो गए। बिना ट्री गार्ड पौधे बचना मुश्किल है। (संवाद)
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हरियाली बढ़े इसके लिए लगाए पौधों की सुरक्षा पर इस बार जोर अधिक दिया गया। हालांकि कई जिम्मेदारों ने इसे संजीदगी से नहीं किया। इसकी वजह से लगाए पौधे सूख कर नष्ट हो गए। कई जगह पौधे बिना सुरक्षा के पशु चर गए। 24 विभागों में सबसे अधिक पौधे ग्राम्य विकास विभाग की ओर से लगाए गए। ग्राम्य विकास के अधीन दस ब्लॉकों में कुल 16, 86, 173 पौधे लगाए गए। अंतरविभागीय टीमों में नगर निकाय में कार्यरत ईओ को स्थलीय सत्यापन की जिम्मेदारी दी गई। अन्य छह ब्लॉक क्षेत्र में लगाए गए पौधों की सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध करा दी गई। जबकि सरवनखेड़ा, रसूलाबाद, डेरापुर व संदलपुर ब्लॉक में लगाए 6, 94, 319 पौधों में कितने जीवित बचे या कितने सूख गए इसकी सत्यापन रिपोर्ट चार ईओ की टीमों ने नहीं दी है। नवंबर अंत तक सत्यापन पूरा करने के निर्देश दिए गए थे।
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जिला पौधरोपण समिति की 17 दिसंबर को बैठक में नौ टीमों के सत्यापन रिपोर्ट न देने पर डीएम ने एक सप्ताह की मोहलत दी थी। इसपर पांच टीमों ने तो रिपोर्ट सौंप दी मगर चार ईओ ने पौधों के जीवित होने का ब्योरा नहीं दिया है। जानकारों का कहना है कि सत्यापन रिपोर्ट में देरी से सवाल उठ रहे हैं। आशंका है कि चिन्हित स्थलों में अधिक पौधे सूख कर नष्ट होना भी इसकी वजह हो सकता है। डीएफओ एके द्विवेदी ने बताया कि संबंधित ईओ को रिमांइडर जारी किया गया है। इसी सप्ताह सत्यापन रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
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सत्यापन में इन निकायों के ईओ लापरवाह
सरवनखेड़ा ब्लॉक क्षेत्र में 63 स्थलों पर लगाए पौधों का सत्यापन ईओ रनियां को कराना है। इसी प्रकार रसूलाबाद ब्लॉक क्षेत्र में 111 स्थलों पर पौधरोपण की हकीकत ईओ रसूलाबाद को जांचनी है। डेरापुर ब्लॉक क्षेत्र में 71 स्थलों पर रोपे गए पौधों का स्थलीय सत्यापन ईओ सिकंदरा और संदलपुर ब्लॉक क्षेत्र में 60 स्थलों पर लगाए गए पौधों का सत्यापन ईओ झींझक को कराना है। संवाद
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6 ब्लॉकों में लगाए गए 9,91, 854 पौधे, 15, 159 सूख गए
ग्राम्य विकास विभाग की ओर से ब्लॉक क्षेत्र में लगाए गए पौधों में काफी नष्ट हो गए हैं। छह ब्लॉकों की सत्यापन रिपोर्ट में 15159 पौधे सूखने या नष्ट होने की बात सामने आई है। अमरौधा ब्लॉक में 169949 पौधे जीवित मिले जबकि 2414 पौधे नष्ट हो गए। अकबरपुर ब्लॉक में 164613 पौधे लगे पाए गए। 2338 पौधे नष्ट हो गए। मैथा ब्लॉक में 198688 पौधे लगे मिले। 2822 पौधे सूख गए। राजपुर ब्लॉक में 149409 पौधे लगे मिले। 1815 पौधे सूख गए। मलासा ब्लॉक में 172730 पौधे जीवित मिले। 2276 पौधे नष्ट हो गए। झींझक ब्लॉक में 121306 पौधे लगे मिले। 3494 पौधे नष्ट हो गए। संवाद
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सरगांव बुजुर्ग व गलुवापुर छुट्टा मवेशी चर गए पौधे
फोटो- 6 डेरापुर ब्लॉक में सरगांव बुजुर्ग में सड़क किनारे से नदारद पौधे। संवाद
डेरापुर। ब्लॉक के सरगांव बुजुर्ग से गलुवापुर मार्ग और सरगांव बुजुर्ग से अहिरन गढ़ेवा मार्ग किनारे ग्राम पंचायत की ओर से पौधे लगाए गए थे। हालांकि पौधों की देखरेख और सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई। इसकी वजह से छुट्टा मवेशी पौधे चर गए। अहिरन गढ़ेवा मार्ग पर देवस्थान के पास श्रीलाल व सियाराम के खेत के पास आम, कटहल, नींबू के लगाए गए पौधे नदारद हैं। ग्राम प्रधान जगराम कठेरिया ने बताया कि सुरक्षा के अभाव में अधिकांश पौधे मवेशी चर गए। वहीं, काफी सूखकर नष्ट हो गए। बिना ट्री गार्ड पौधे बचना मुश्किल है। (संवाद)