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पैसे के लिए निजी अस्पताल नहीं देखते आयुष्मान सूची, योजना का पात्र होने के बाद भी चुकानी पड़ रही रकम
Wed, 18 Sep 2019 05:58 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 18 Sep 2019 05:58 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : गूगल
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केस-1: कन्नौज के करसहा निवासी सुभाष बाबू की पत्नी नीलम की आंत फट गई थी। कानपुर के लालपतनगर स्थित एक अस्पताल में आपरेशन किया और चार लाख रुपये वसूल लिए। अस्पताल की आयुष्मान मित्र डेस्क ने उसे चेक नहीं किया। रोगी के पास पैसे खत्म हो गए तो उसे हैलट भेज दिया। जहां सीनियर सर्जन डॉ. जीडी यादव ने चेक कराया तो पता चला कि वह आयुष्मान लाभार्थी है। रोगी का मुफ्त इलाज हुआ और ठीक हो गई।
केस-2: नौबस्ता की रोगी देवी (35) का निजी अस्पताल वालों ने इलाज किया। डेढ़ लाख बिल बनाया। हालत बिगड़ी तो हैलट भेजा। यहां बीपीएल कार्ड धारक होने पर उसका नाम आयुष्मान सूची में चेक किया गया तो वह लाभार्थी निकली। विभाग में उसका पैकेज से मुफ्त इलाज किया गया। इसके बाद वह ठीक हुई। परिजनों ने बताया कि निजी अस्पताल में भी बीपीएल कार्ड दिखाया था। उनके पास आयुष्मान योजना का कार्ड नहीं आया है। अस्पताल वालों ने सूची में नाम चेक नहीं किया।
निजी अस्पतालों में जाने वाले आयुष्मान रोगियों के साथ होने वाले व्यवहार के संबंध में ये दो केस बतौर उदाहरण दिए गए हैं। ऐसे कोई रोगी हैं जो खराब व्यवस्था का शिकार हुए हैं। शासन के निर्देश हैं कि अगर कोई बीपीएल कार्ड धारक रोगी आता है तो पहले चेक कर लिया जाए कि वह आयुष्मान सूची में तो नहीं है। अगर है तो उसका रजिस्ट्रेशन आयुष्मान लाभार्थी के रूप में किया जाए, जिससे उसके इलाज में आसानी हो। इसके लिए पैनल में शामिल किए जाने वाले अस्पतालों में आयुष्मान डेस्क बनाई गई और आयुष्मान कर्मचारी मित्र नियुक्त किए गए हैं।
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इस संबंध में सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला ने भी पैनल के अस्पतालों को दिशा-निर्देश दिए हैं। लेकिन, निजी अस्पताल बिल वसूली के चक्कर में हर बीपीएल कार्ड धारक रोगी को चेक नहीं कर रहे हैं। जब रोगी खुद कार्ड देता है और बताता है कि वह लाभार्थी है तभी सूची में ढूंढकर उसका गोल्डन कार्ड निकाला जाता है। स्वास्थ्य विभाग अभी करीब 11 लाख लाभार्थियों में सिर्फ 68 हजार के ही गोल्डन कार्ड दे पाया है। लगभग 93 फीसदी लाभार्थियों के अभी गोल्डन कार्ड ही नहीं बने हैं। इस संबंध में निजी अस्पताल वाले ऑफ दि रिकार्ड बताते हैं कि क्लेम का पैसा अटक जाता है। इससे लाभार्थी के मामले में अधिक ध्यान नहीं दिया जाता।
बीपीएल कार्ड धारक पहले पता कर लें सूची में हैं कि नहीं
आयुष्मान सूची में शामिल सभी लाभार्थियों के अभी तक गोल्डन कार्ड नहीं बन पाए हैं। ऐसे में बीपीएल कार्ड धारक जिन्हें पता नहीं कि वे सूची में हैं कि नहीं वे 14555 पर टोल फ्री नंबर पर फोन करके पता कर सकते हैं। इसके अलावा mera.pmjay.gov.in पर लॉगइन करके पता कर सकते हैं।
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केस-2: नौबस्ता की रोगी देवी (35) का निजी अस्पताल वालों ने इलाज किया। डेढ़ लाख बिल बनाया। हालत बिगड़ी तो हैलट भेजा। यहां बीपीएल कार्ड धारक होने पर उसका नाम आयुष्मान सूची में चेक किया गया तो वह लाभार्थी निकली। विभाग में उसका पैकेज से मुफ्त इलाज किया गया। इसके बाद वह ठीक हुई। परिजनों ने बताया कि निजी अस्पताल में भी बीपीएल कार्ड दिखाया था। उनके पास आयुष्मान योजना का कार्ड नहीं आया है। अस्पताल वालों ने सूची में नाम चेक नहीं किया।
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निजी अस्पतालों में जाने वाले आयुष्मान रोगियों के साथ होने वाले व्यवहार के संबंध में ये दो केस बतौर उदाहरण दिए गए हैं। ऐसे कोई रोगी हैं जो खराब व्यवस्था का शिकार हुए हैं। शासन के निर्देश हैं कि अगर कोई बीपीएल कार्ड धारक रोगी आता है तो पहले चेक कर लिया जाए कि वह आयुष्मान सूची में तो नहीं है। अगर है तो उसका रजिस्ट्रेशन आयुष्मान लाभार्थी के रूप में किया जाए, जिससे उसके इलाज में आसानी हो। इसके लिए पैनल में शामिल किए जाने वाले अस्पतालों में आयुष्मान डेस्क बनाई गई और आयुष्मान कर्मचारी मित्र नियुक्त किए गए हैं।
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इस संबंध में सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला ने भी पैनल के अस्पतालों को दिशा-निर्देश दिए हैं। लेकिन, निजी अस्पताल बिल वसूली के चक्कर में हर बीपीएल कार्ड धारक रोगी को चेक नहीं कर रहे हैं। जब रोगी खुद कार्ड देता है और बताता है कि वह लाभार्थी है तभी सूची में ढूंढकर उसका गोल्डन कार्ड निकाला जाता है। स्वास्थ्य विभाग अभी करीब 11 लाख लाभार्थियों में सिर्फ 68 हजार के ही गोल्डन कार्ड दे पाया है। लगभग 93 फीसदी लाभार्थियों के अभी गोल्डन कार्ड ही नहीं बने हैं। इस संबंध में निजी अस्पताल वाले ऑफ दि रिकार्ड बताते हैं कि क्लेम का पैसा अटक जाता है। इससे लाभार्थी के मामले में अधिक ध्यान नहीं दिया जाता।
बीपीएल कार्ड धारक पहले पता कर लें सूची में हैं कि नहीं
आयुष्मान सूची में शामिल सभी लाभार्थियों के अभी तक गोल्डन कार्ड नहीं बन पाए हैं। ऐसे में बीपीएल कार्ड धारक जिन्हें पता नहीं कि वे सूची में हैं कि नहीं वे 14555 पर टोल फ्री नंबर पर फोन करके पता कर सकते हैं। इसके अलावा mera.pmjay.gov.in पर लॉगइन करके पता कर सकते हैं।