{"_id":"61499dab8ebc3eb6f973bac6","slug":"panki-mandir-mahant-jitendra-das-said-narendra-giri-maharaj-did-not-differentiate-between-small-and-big","type":"story","status":"publish","title_hn":"पनकी मंदिर महंत जितेंद्र दास बोले- नरेंद्र गिरी महाराज छोटे बड़े का नहीं करते थे भेद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पनकी मंदिर महंत जितेंद्र दास बोले- नरेंद्र गिरी महाराज छोटे बड़े का नहीं करते थे भेद
Tue, 21 Sep 2021 03:43 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 21 Sep 2021 03:43 PM IST
विज्ञापन
महंत जितेंद्र दास
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रयागराज के अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी महाराज ने कभी छोटे बड़े का भेद नहीं किया। वह एक सरल स्वभाव के और न्यायप्रिय व्यक्ति थे। यह बात पनकी मंदिर के महंत जितेंद्र दास ने कही। उन्होंने बताया कि एक बार हरिद्वार कुंभ में हमारा कैंप लगा था, तभी वहां पर उत्तराखंड की पुलिस आई और कैंप हटाने को कहा।
जब यह बात नरेंद्र गिरी महाराज को पता चली तो वह खुद चलकर हमारे पास आए और हमें कैंप लगाने के लिए दूसरी जगह दी। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में हमेशा ही उनसे मुलाकात हुआ करती थी। एक बार बढ़ा मंदिर के ऊपर सभी संत लोग बैठे बातचीत कर रहे थे। तभी पता चला कि कुछ भक्त उनसे मिलना चाहते हैं।
इतना सुनते ही वह मीटिंग छोड़कर पहले अपने भक्तों से मिलने पहुंच गए। जितेंद्र दास ने कहा कि उनके असमय निधन से काफी दुखी हूं। मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार से इसकी सीबीआई जांच कराने की मांग करता हूं। वही परमट मंदिर के महंत लाल भारती ने कहा कि नरेंद्र गिरी महाराज अच्छे संतों में एक थे। हालांकि मैं जूना अखाड़ा का हूं ,मगर उनसे हमेशा ही मुलाकात किसी न किसी कार्यक्रम में हुआ करती थी। वह एक बहुत ही सरल और सज्जन संत थे। सभी को एकता में पिरो कर रखते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
जब यह बात नरेंद्र गिरी महाराज को पता चली तो वह खुद चलकर हमारे पास आए और हमें कैंप लगाने के लिए दूसरी जगह दी। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में हमेशा ही उनसे मुलाकात हुआ करती थी। एक बार बढ़ा मंदिर के ऊपर सभी संत लोग बैठे बातचीत कर रहे थे। तभी पता चला कि कुछ भक्त उनसे मिलना चाहते हैं।
विज्ञापन
इतना सुनते ही वह मीटिंग छोड़कर पहले अपने भक्तों से मिलने पहुंच गए। जितेंद्र दास ने कहा कि उनके असमय निधन से काफी दुखी हूं। मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार से इसकी सीबीआई जांच कराने की मांग करता हूं। वही परमट मंदिर के महंत लाल भारती ने कहा कि नरेंद्र गिरी महाराज अच्छे संतों में एक थे। हालांकि मैं जूना अखाड़ा का हूं ,मगर उनसे हमेशा ही मुलाकात किसी न किसी कार्यक्रम में हुआ करती थी। वह एक बहुत ही सरल और सज्जन संत थे। सभी को एकता में पिरो कर रखते थे।
विज्ञापन