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पांडु नदी को जीवन देने का प्लान तैयार

Thu, 10 Sep 2015 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर Updated Thu, 10 Sep 2015 01:37 AM IST
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Pandu river to the life plan

केडीए ने पांडु नदी को नया जीवन देने के लिए चरणबद्ध प्लान तैयार किया है। पहले चरण में अवैध निर्माणों पर रोक लगाने के साथ ही इसके दोनों तरफ 30-30 मीटर के दायरे में ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएगी।

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दूसरे चरण में नदी में गिर रही पनकी पावर हाउस की राख, औद्योगिक कचरा और नालों को डायवर्ट करने की योजना है। तट तक हुए कब्जे जल्द ध्वस्त किए जाएंगे।

केडीए बोर्ड की आठ सितंबर को हुई बैठक में गंगा नदी की तर्ज पर पांडु नदी को संरक्षित करने का प्रस्ताव पास किया गया। प्राधिकरण के भवन विभाग के अनुसार पहले चरण में नदी के तट से 30 मीटर की दूरी तक न तो कोई निर्माण के लिए नक्शा पास किया जाएगा और न ही निर्माण होने दिया जाएगा।
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बल्कि तट के किनारे वृहद वृक्षारोपण कर इसे ग्रीनबेल्ट के रूप में विकसित किया जाएगा। नदी के दोनों तरफ रिटेनिंग वॉल बनाने के लिए सिंचाई विभाग को पत्र लिखा जाएगा। दूसरे चरण में इसमें गिर रहा औद्योगिक कचरा, पनकी पावर हाउस की राख और सीवरेज वेस्ट रोकने की प्लानिंग है।
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इसमें जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई, पनकी पावर हाउस, सिंचाई आदि विभागों के सहयोग की जरूरत पड़ेगी।  नदी के किनारे हमीरपुर रोड के पास बिनगवां में 210 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बन गया है।

इसमें सीओडी नाले से जा रहा सीवेज और रफाका नाले को इसमें डायवर्ट कर नदी में गंदगी जाने से रोका जाएगा। नदी के आसपास के आवासीय इलाके में चल रहीं फैक्टियां बंद कराई जाएंगी। उनसे जीरो डिस्चार्ज सिस्टम लगाने के लिए कहा जाएगा। 

तट तक कब्जे
मेहरबान सिंह का पुरवा के पास बर्रा, जरौली में पांडु नदी के तट तक अवैध कब्जे हैं। भूमाफिया ने अवैध रूप से नदी के डूब क्षेत्र को मिट्टी और राख से पाटकर धारा से तीन-चार मीटर दूर तक बाउंड्री बना ली है।

प्लाटिंग करने के साथ ही धड़ल्ले से मकान भी बनवा रहे हैं। मेहरबान सिंह का पुरवा के निकट नदी के किनारे तमाम लोग पक्के मकानों में रह रहे हैं। अवैध निर्माण से नदी की धारा कई मीटर सिकुड़ गई है।

नदी बन गई नाला
पनकी पावर हाउस की राख, रावतपुर से निकला रफाका नाला, दादा नगर, गोविंद नगर, बर्रा होते हुए इसी नदी में मिल रहे हैं। नदी का आकार और पानी का रंग देखकर यह किसी बड़े नाले जैसी दिखती है।


साउथ सिटी के सभी बड़े नाले, सीओडी नाला, मुंशीपुरवा, बाबूपुरवा, किदवई नगर, यशोदानगर, पशुपति नगर, मछरिया, धोबिनपुलिया, बंबा, हंसपुरम, गल्ला मंडी होते हुए बिनगवां में इसी नदी में गिर रहे हैं।

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