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पंचायत चुनाव: आरक्षण ने छीनी परिवार से 20 साल पुरानी प्रधानी, यहां सास के बाद बेटा और बहुओं ने संभाल रखी थी कुर्सी
Thu, 04 Mar 2021 10:24 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 04 Mar 2021 10:24 AM IST
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पंचायत चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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जालौन जिले के मुहम्मदाबाद में लंबे समय के इंतजार के बाद जब प्रधानी का आरक्षण सामने आया तो किसी के दिलों में अनार फूट पड़े तो किसी के अरमानों पर पानी सा फिर गया। इससे भी ज्यादा दिक्कत तो ऐसे लोगों को हुई जिनके लिए प्रधानी उनकी पारिवारिक विरासत सी हो गई थी।
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एक के बाद एक परिवार के लोग ही गांव की सरकार बना रहे थे। ऐसा ही एक यादव परिवार (पिछड़ा वर्ग) डकोर ब्लाक का भी है, जिसके डकोर गांव में पूरे 20 साल से प्रधानी एक ही परिवार से चल रही थी। सास के बाद बेटा फिर दो बहुओं ने इस कुर्सी को संभाला लेकिन मंगलवार को आई सूची ने परिवार की प्रधानी पर पहली मर्तबा ब्रेक लगा दिया, क्योंकि इस बार डकोर गांव की सीट आरक्षित हो गई है।
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करीब बारह से तेरह हजार की आबादी वाले डकोर गांव में तकरीबन 6900 मतदाता हैं, जिन्हें कौन बनेगा प्रधान का फैसला करना है। साल 2000 में जब गांव की प्रधानी की सीट सामान्य थी, तब गांव के ही यादव परिवार की बहू लक्ष्मी देवी मैदान में उतरी और चुनाव में जीत भी हासिल की।
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पांच साल बाद यानी 2005 में जब सीट आरक्षण में पिछड़ा वर्ग पुरुष हुई तो परिवार के सामने प्रधानी की कुर्सी बचाने का संकट पैदा हुआ है, ऐसे में लक्ष्मी के बेटे राघवेंद्र ने मैदान संभाला और पिछले अनुभव का लाभ लेते हुए चुनाव में जीत दर्ज की। इसके बाद आया 2010 की प्रधानी का चुनाव तो सीट का आरक्षण फिर से बदला और इस बार सीट पिछड़ा वर्ग महिला हो गई, मानो यादव परिवार को इसी का इंतजार था।
फिर क्या था, राघवेंद्र ने अपनी पत्नी आशा देवी को न सिर्फ चुनाव मैदान में उतारा बल्कि उन्हें शानदार वोटों से जीत भी दिलाई। परिवार में प्रधानी की विरासत बड़े आराम से चल रही थी, इसके बाद 2015 का चुनाव फिर से आरक्षण में बदलाव लेकर आया और सीट दोबारा सामान्य हो गई।
इस बार मोर्चा संभाला लक्ष्मी की छोटी बहू सरोज ने और न सिर्फ मोर्चा संभाला बल्कि अपने परिवार की विरासत को बचाकर वापस भी ले आई। अब 2021 के चुनाव में करीब बीस साल बाद पहली बार आरक्षित हुई है तो परिवार की प्रधानी की विरासत समाप्त होने को है। पूर्व प्रधान राघवेंद्र का कहना है कि उन्हें अफसोस जरूर है लेकिन मौका सभी को मिलना चाहिए। बताया कि काफी समय पहले उनके पिता दिनेश चंद्र भी गांव के प्रधान रह चुके हैं।
ब्लाक- डकोर
गांव- डकोर
आबादी- 13 हजार
मतदाता- 6900