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पाकिस्तान की जेल से न जाने कब लौटेंगे कानपुर के ये ‘तीन सरबजीत’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 31 Oct 2016 04:19 PM IST
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पाक जेल में बंद मछुआरों के परिजनों को है एक ही चिंता, कब रिहा होंगे
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पाकिस्तान जेल से न जाने कब लौटेंगे कानपुर के ‘तीन सरबजीत’। इस दिवाली भी उनके घर मायूसी छाई हुई है।
कानपुर घाटमपुर के मोहम्मदपुर गांव निवासी तीन युवकों के घरों में लगातार दूसरे साल भी दीपावली त्योहार की खुशियां नदारद हैं। तीनों युवक मछुआरे हैं। जिन्हें पाकिस्तान के सैनिक पकड़कर ले गए थे, वर्तमान में तीनों पाकिस्तान की मलीर लांदी जेल में कैद हैं। उनके परिजन रिहाई की राह देख रहे हैं। अब एलओसी पर भारत-पाक के बीच उपजा तनाव कोढ़ में खाज साबित हो रहा है।
गांव के तीन युवक संजय कुरील, रवीशंकर गोड़िया और जयचंद्र गोड़िया 15 अक्तूबर 2015 को गुजरात के ओखा समुद्री तट (जखऊ) बंदरगाह में मछली का शिकार करने गए थे। पाक सैनिकों ने इन तीनों को पकड़ लिया था। एक वर्ष का समय बीत चुका है। तीनों युवकों के घरों में न तो कहीं लिपाई-पुताई की गई है और न त्योहार की कोई और रौनक दिख रही है।
परिजनों का कहना है कि जब घर के बेटे जेल की काल कोठरी में कैद हैं तो घरों में दीवाली के दिये जलाने का दिल ही नहीं करता है। संजय का पिता रामप्रताप कुरील, रवीशंकर का पिता बुद्धी लाल गोड़िया और जयचंद्र का पिता गंगाप्रसाद परिवार के अन्य सदस्यों को धीरज बंधाने के लिए भले ही ऊपर से सामान्य दिखते हैं। लेकिन, उन्होंने बताया कि जवान बेटों की याद जब आती है तो कलेजा फट सा जाता है। अब सीमा के हालात देखकर वह निकट भविष्य में बेटों की रिहाई की उम्मीद ही छोड़ बैठे हैं।
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कानपुर घाटमपुर के मोहम्मदपुर गांव निवासी तीन युवकों के घरों में लगातार दूसरे साल भी दीपावली त्योहार की खुशियां नदारद हैं। तीनों युवक मछुआरे हैं। जिन्हें पाकिस्तान के सैनिक पकड़कर ले गए थे, वर्तमान में तीनों पाकिस्तान की मलीर लांदी जेल में कैद हैं। उनके परिजन रिहाई की राह देख रहे हैं। अब एलओसी पर भारत-पाक के बीच उपजा तनाव कोढ़ में खाज साबित हो रहा है।
गांव के तीन युवक संजय कुरील, रवीशंकर गोड़िया और जयचंद्र गोड़िया 15 अक्तूबर 2015 को गुजरात के ओखा समुद्री तट (जखऊ) बंदरगाह में मछली का शिकार करने गए थे। पाक सैनिकों ने इन तीनों को पकड़ लिया था। एक वर्ष का समय बीत चुका है। तीनों युवकों के घरों में न तो कहीं लिपाई-पुताई की गई है और न त्योहार की कोई और रौनक दिख रही है।
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परिजनों का कहना है कि जब घर के बेटे जेल की काल कोठरी में कैद हैं तो घरों में दीवाली के दिये जलाने का दिल ही नहीं करता है। संजय का पिता रामप्रताप कुरील, रवीशंकर का पिता बुद्धी लाल गोड़िया और जयचंद्र का पिता गंगाप्रसाद परिवार के अन्य सदस्यों को धीरज बंधाने के लिए भले ही ऊपर से सामान्य दिखते हैं। लेकिन, उन्होंने बताया कि जवान बेटों की याद जब आती है तो कलेजा फट सा जाता है। अब सीमा के हालात देखकर वह निकट भविष्य में बेटों की रिहाई की उम्मीद ही छोड़ बैठे हैं।
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