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आईआईटी के पूर्व छात्र डॉ. अनिल राजवंशी को पद्मश्री: निदेशक प्रोफेसर अभय करंदीकर ने ट्वीट कर दी बधाई
Wed, 26 Jan 2022 02:08 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 26 Jan 2022 02:08 PM IST
सार
प्रोफेसर करंदीकर ने लिखा कि एक और पूर्व छात्र ने हमें गौरवान्वित किया है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि डॉ. राजवंशी को पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की गई है। डॉ. राजवंशी ने ग्रामीण विकास कार्य, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा आधारित खाना पकाने और प्रकाश व्यवस्था में अहम भूमिका निभाई है।
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डॉ. अनिल राजवंशी
- फोटो : amar ujala
विस्तार
आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र डॉ. अनिल राजवंशी का चयन पद्मश्री सम्मान के लिए हुआ है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इसकी घोषणा के बाद आईआईटी के निदेशक प्रोफेसर अभय करंदीकर ने ट्वीट कर उन्हें बधाई दी। डॉ. राजवंशी वर्तमान में ऩंबकर कृषि अनुसंधान संस्थान (एनएआरआई) महाराष्ट्र के निदेशक हैं।
प्रोफेसर करंदीकर ने अपने ट्वीट में लिखा कि एक और पूर्व छात्र ने हमें गौरवान्वित किया है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि डॉ. राजवंशी को पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की गई है। डॉ. राजवंशी ने ग्रामीण विकास कार्य, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा आधारित खाना पकाने और प्रकाश व्यवस्था में अहम भूमिका निभाई है।
इनको कृषि अवशेषों से बिजली उत्पादन, कृषि से नवीकरणीय ईंधन उत्पादन, इलेक्ट्रिक साइकिल रिक्शा और अक्षय ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से जल शोधन और अपशिष्ट उपचार लिए भी जाना जाता है। उनके नाम 230 से अधिक प्रकाशन, सात पेटेंट और कई पुस्तकें हैं। डॉ. राजवंशी आईआईटी कानपुर से 1972 में बीटेक और 1974 में एमटेक पास आउट हैं। बता दें कि संस्थान के डॉ. एचसी वर्मा और प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल भी पद्मश्री सम्मान से नवाजे जा चुके हैं।
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प्रोफेसर करंदीकर ने अपने ट्वीट में लिखा कि एक और पूर्व छात्र ने हमें गौरवान्वित किया है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि डॉ. राजवंशी को पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की गई है। डॉ. राजवंशी ने ग्रामीण विकास कार्य, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा आधारित खाना पकाने और प्रकाश व्यवस्था में अहम भूमिका निभाई है।
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इनको कृषि अवशेषों से बिजली उत्पादन, कृषि से नवीकरणीय ईंधन उत्पादन, इलेक्ट्रिक साइकिल रिक्शा और अक्षय ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से जल शोधन और अपशिष्ट उपचार लिए भी जाना जाता है। उनके नाम 230 से अधिक प्रकाशन, सात पेटेंट और कई पुस्तकें हैं। डॉ. राजवंशी आईआईटी कानपुर से 1972 में बीटेक और 1974 में एमटेक पास आउट हैं। बता दें कि संस्थान के डॉ. एचसी वर्मा और प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल भी पद्मश्री सम्मान से नवाजे जा चुके हैं।
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