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नए लेखकों को आगे बढ़ाने में हमेशा तत्पर रहे पद्मश्री गिरिराज किशोर, साहित्यकारों ने जताया शोक
Mon, 10 Feb 2020 04:56 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 10 Feb 2020 04:56 PM IST
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पद्मश्री गिरिराज किशोर की अंतिम यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
महात्मा गांधी से संबंधित कालजयी रचना ‘पहला गिरमिटिया’ के लेखक, प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री गिरिराज किशोर (83) का रविवार सुबह 9:30 बजे निधन हो गया। उन्होंने कानपुर के सूटरगंज मोहल्ला स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। उन्होंने देहदान की घोषणा कर रखी थी। इसलिए उनका पार्थिव शरीर सोमवार को गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज में मेडिकल के छात्रों के अध्ययन के लिए सौंप दिया गया है। उनके निधन के बाद साहित्य जगत में शोक की लहर है।
गिरिराज के जाने से साहित्य जगत को जो क्षति हुई है, उस स्थान की भरपाई मुश्किल है। उन्होंने नए लेखकों को आगे लाने के लिए बड़ा काम किया। संगमन संस्था की स्थापना ही उन्होेंने नए लेखकों को आगे लाने के लिए किया था। आईआईटी में रजिस्ट्रार के रूप जब वह लोगों के विरोध का सामना कर रहे थे, तब भी उनका साहित्य लेखन जारी रहा। इन सबके बीच वह सादा जीवन जीते रहे। लहसुन, प्याज के बगैर वह सामान्य भोजन के शौकीन थे। साहित्यकार राजेंद्र यादव अक्सर उनसे मिलने आते थे। एक बार तो वह तीन महीने तक उनके पास रहे। - अमरीक सिंह दीप, साहित्यकार
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गिरिराज के जाने से साहित्य जगत को जो क्षति हुई है, उस स्थान की भरपाई मुश्किल है। उन्होंने नए लेखकों को आगे लाने के लिए बड़ा काम किया। संगमन संस्था की स्थापना ही उन्होेंने नए लेखकों को आगे लाने के लिए किया था। आईआईटी में रजिस्ट्रार के रूप जब वह लोगों के विरोध का सामना कर रहे थे, तब भी उनका साहित्य लेखन जारी रहा। इन सबके बीच वह सादा जीवन जीते रहे। लहसुन, प्याज के बगैर वह सामान्य भोजन के शौकीन थे। साहित्यकार राजेंद्र यादव अक्सर उनसे मिलने आते थे। एक बार तो वह तीन महीने तक उनके पास रहे। - अमरीक सिंह दीप, साहित्यकार
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गिरिराज किशोर ने गांधी जी के जीवन पर आधारित पहला गिरमिटिया पुस्तक सिर्फ लिखी ही नहीं, बल्कि वह अपने जीवन में हमेशा गांधी जी को जीते थे। उन्होंने मुझ जैसे अनेक युवाओं को जो लेखन क्षेत्र में रुचि रखते थे, उन सब को साहित्यकार बनाया। नुक्कड़ नाटकों के जरिए ज्वलंत मुद्दों को उठाने के प्रति वह हमेशा ऐसे आयोजनों के लिए धनराशि भी देते थे। वह आम आदमी की आवाज थे। - संजीबा, साहित्यकार एवं रंगकर्मी
गिरिराज से मेरा पिछले 40 वर्षों का साथ रहा। वह मेरे मार्ग दर्शक थे। कुछ भी लिखने से पहले मैं उनसे राय लेता था। वह आकार पत्रिका के संस्थापक संपादक रहे। वह किसी भी समय, कहीं पर भी और किसी को भी डॉट सकते थे। ऐसा सिर्फ वही कर सकते थे। यही वजह है कि वह जिस भी कार्यक्रम में रहते थे, वहां सब अनुशासित रहते थे। अभी तक वह कानपुर में रहते थे, अब लोगों के दिलों में रहेंगे।
- प्रियंवद, साहित्यकार
गिरिराज से मेरा पिछले 40 वर्षों का साथ रहा। वह मेरे मार्ग दर्शक थे। कुछ भी लिखने से पहले मैं उनसे राय लेता था। वह आकार पत्रिका के संस्थापक संपादक रहे। वह किसी भी समय, कहीं पर भी और किसी को भी डॉट सकते थे। ऐसा सिर्फ वही कर सकते थे। यही वजह है कि वह जिस भी कार्यक्रम में रहते थे, वहां सब अनुशासित रहते थे। अभी तक वह कानपुर में रहते थे, अब लोगों के दिलों में रहेंगे।
- प्रियंवद, साहित्यकार
गिरिराज किशोर मेरे जीवन के करीब रहे हैं। उनका सानिध्य हर मोड़ पर मुझे प्राप्त होता रहा है। उनके नहीं रहने से उनके साथ बिताए दिन बहुत याद आएंगे। वह कानपुर नागरिक मंच के संरक्षक थे। इस संस्था से मैं शुरू से जुड़ा हुआ हूं। महात्मा गांधी के प्रति उनकी विचारधारा से मैं उनके करीब आया। - छोटे भाई नरोना, गांधीवादी विचारक
महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी दोनों पर उनकी लेखनी समान रूप से चली। ‘बा’ नामक पुस्तक में उन्होंने कस्तूरबा का जिस तरह से चित्रण किया है, वह अद्वितीय है। वर्तमान शासकों की कार्यशैली को लेकर उन्होंने हमेशा लोगों को जगाने का काम किया। इसके लिए वह सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहे। कुछ ऐसे भी लोग दिखे जिन्होेंने उनको रोकने के लिए उन पर गलत तरीके से टिप्पणी की लेकिन वह रुके नहीं। मैं व्यक्तिगत रूप से उन्हें बहुत मिस करुंगी। वह बड़े लेखक और स्पष्ट सोच वाले इंसान थे। कानपुर उन्हें हमेशा याद करेगा। - सुभाषिनी अली, पूर्व सांसद व सामाजिक कार्यकर्ता
महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी दोनों पर उनकी लेखनी समान रूप से चली। ‘बा’ नामक पुस्तक में उन्होंने कस्तूरबा का जिस तरह से चित्रण किया है, वह अद्वितीय है। वर्तमान शासकों की कार्यशैली को लेकर उन्होंने हमेशा लोगों को जगाने का काम किया। इसके लिए वह सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहे। कुछ ऐसे भी लोग दिखे जिन्होेंने उनको रोकने के लिए उन पर गलत तरीके से टिप्पणी की लेकिन वह रुके नहीं। मैं व्यक्तिगत रूप से उन्हें बहुत मिस करुंगी। वह बड़े लेखक और स्पष्ट सोच वाले इंसान थे। कानपुर उन्हें हमेशा याद करेगा। - सुभाषिनी अली, पूर्व सांसद व सामाजिक कार्यकर्ता