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हैलट में अंधेरगर्दी: अल्ट्रासाउंड के इंतजार में एक की मौत, दूसरे को दवा मांगने पर वार्ड से भगाया, पढ़ें मामला

Thu, 21 Dec 2023 01:50 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 21 Dec 2023 01:50 PM IST
सार

Kanpur News: प्राचार्य डॉ. संजय काला ने कहा कि इसका पता करवाते हैं कि मामला क्या है? रोगी के तीमारदार ने अभद्रता की तो गलत है। अगर स्टॉफ की गलती है, तो कार्रवाई की जाएगी।

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One died while waiting for ultrasound, another was thrown out of the ward for asking for medicine in hallet
hallet hospital - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बुधवार दोपहर के तीन बजे थे। हैलट अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में स्ट्रेचर पर मृत अवस्था में पड़े रोगी के चेहरे को देखकर एक महिला बिलख रही थी। यह मरीज अजय कुमार की बहन अंशु थी। फतेहपुर का रहने वाला अजय मंगलवार को भर्ती हुआ था। अगले दिन उसे अल्ट्रासाउंड के लिए रेडियोलॉजी विभाग लाया गया था।

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बहन अंशु का कहना है कि वह मरीज को लेकर ढाई घंटे लाइन में लगी रही। उसका नंबर पहले था, लेकिन दूसरे रोगियों को अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा जाता रहा। वहां एक और महिला अपने रोगी के अल्ट्रसाउंड के इंतजार में खड़ी थी। बार-बार दूसरे रोगी को अल्ट्रासाउंड के लिए कक्ष में पहुंचा देते।
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जब अधिक समय हो गया, तो वह महिला तीमारदार चिल्लाने लगी। अंशु ने बताया कि वहां बैठी कर्मचारी ने उस महिला के साथ मुझे भी बाहर कर दिया। इसी दौरान अजय की मौत हो गई। बाद में अजय के शव को लेकर उसकी बहन और पत्नी रोती-बिलखती निजी एम्बुलेंस से घर चली गईं।

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इस मामले की जानकारी नहीं है। शिकायत भी कोई नहीं की गई। इसकी पूरी जानकारी करवा रहे हैं।  -डॉ. आरके सिंह, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक हैलट

ठंड में तीन घंटे तक बाहर फर्श पर पड़ा रहा मरीज
इससे पहले मंगलवार रात हैलट ओपीडी भवन की पैथोलॉजी के पास फतेहपुर के चिराई गांव के रहने वाले रोगी राम खिलावन तिवारी (55) ठंड में फर्श पर पड़े दर्द से कराह रहे थे। पास में बेटा मोहित और बेटी लेटे थे और पत्नी अनीता तिवारी माथा पकड़े रो रहीं थीं। पूछा तो बताने लगीं कि सोमवार को राम खिलावन का ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ गया।

डॉ. आरके वर्मा की यूनिट में में भर्ती किया गया
खड़े-खड़े बेहोश होकर गिर पड़े। सिर पर चोट आई। उन्हें डॉ. आरके वर्मा की यूनिट में वार्ड नंबर 11 में भर्ती किया गया। वार्ड में एक ग्लूकोज की बोतल चढ़ाने के बाद कोई दवा नहीं दी गई। बेटे ने जूनियर डॉक्टर से पूछा कि दवा क्यों नहीं दे रहीं। इसको लेकर बहस हो गई। डॉक्टर ने रोगी को बाहर भगा दिया।

राम खिलावन को सामने की इमरजेंसी में ले गए
वह रोने लगीं कि कहां जाएं? गंभीर रोगी तीन घंटे से बाहर खुले में लिए पड़े हैं। कहां लेकर जाएं? कोई फिर भर्ती करवा दे। लड़के ने गलती कर दी, इसकी माफी मांग रहे हैं। अमर उजाला टीम को तीमारदारों से बात करते कर्मचारियों ने देखा, तो स्ट्रेचर पर लादकर राम खिलावन को सामने की इमरजेंसी में ले गए। वहां से रोगी को न्यूरो वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। उसे न्यूरोसर्जन डॉ. राघवेंद्र गुप्ता के अंडर में भर्ती किया गया।

राम खिलावन तिवारी मेरे अंडर में भर्ती हुआ था। रोगी न्यूरो विभाग से संबंधित था। न्यूरो विभाग उसका रिफरेंस भी भेज दिया गया था। तीमारदार ने महिला जूनियर डॉक्टर से अभद्रता की और बिना कागजात लिए रोगी को लेकर चले गए। जब रोगी को बिना बताए ले जाया जाता है, तो उसकी पीआई पुलिस को भेज देते हैं। राम खिलावन की पीआई भी पुलिस को भेज दी थी।  -डॉ. आरके वर्मा, सीनियर फिजीशियन, मेडिसिन विभाग

इसका पता करवाते हैं कि मामला क्या है? रोगी के तीमारदार ने अभद्रता की तो गलत है। रोगी बाहर कैसे गया? यह जानकारी लेंगे। अगर स्टाफ की गलती है, तो कार्रवाई की जाएगी।  -डॉ. संजय काला, प्राचार्य जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

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