साहब मैं जिंदा हूं: कागजों में मृत दिखा बंद कर दी गई वृद्धा पेंशन, तख्ती डालकर डीएम के पास पहुंचे छह बुजुर्ग
प्रशासन की खामियों और भ्रष्ट कर्मचारियों के कारण छह बुजुर्ग डेढ़ साल से वृद्धा पेंशन के लिए परेशान हो रहे हैं। मामला करबई ब्लॉक है, जहां पूर्व ग्राम विकास अधिकारी ने छह बुजुर्गों को कागजों में मृत दर्शाकर वृद्धा पेंशन बंद कर दी।
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महोबा जिले के ब्लॉक कबरई के पचपहरा गांव के छह बुजुर्ग मंगलवार को साहब मैं जिंदा हूं की तख्ती गले में डालकर डीएम की चौखट पहुंचे। उन्होंने खुद के जिंदा होने का प्रमाण देते हुए न्याय की गुहार लगाई। बताया कि डेढ़ साल से उन्हें वृद्घा पेंशन नहीं मिली। षड्यंत्र के तहत उन्हें कागजों में मृत दर्शाकर पेंशन बंद कर दी गई। जिससे वह आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीडीओ को जांच सौंपी है।
पचपहरा निवासी वृद्घ सरमन, नंदकिशोर, राकेश, कलिया, गिरजारानी व सुरजी गले में साहब मैं जिंदा हूं की तख्ती लटकाए घूमते नजर आए। यह बुजुर्ग अपने जिंदा होने की खुद गवाही देने के लिए मजबूर हैं। कलेक्ट्रेट पहुंचे बुजुर्गों ने डीएम मनोज कुमार को लिखित प्रार्थना पत्र के साथ हलफनामा भी सौंपा।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके जिंदा होने के बाद भी पूर्व ग्राम विकास अधिकारी ने पेंशन सत्यापन के नाम पर 500 रुपये की घूस मांगी थी। न देने पर उन्हें कागजों में मृत दर्शा दिया गया। जिससे उनकी पेंशन आना बंद हो गई। जब उन्हें कागजों में मृत दर्शाए जाने की जानकारी हुई, तो वह हैरत में पड़ गए और मजबूर होकर अपने जिंदा होने का सबूत देने के लिए अफसरों की चौखट पर आना पड़ा।
सभी बुजुर्गों ने बताया कि पेंशन बंद होने से वह आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से पुनः वृद्घा पेंशन शुरू कराए जाने की मांग की है। डीएम ने मामले की मुख्य विकास अधिकारी डॉ. हरिचरण सिंह को सौंपी है। ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी षड्यंत्र के तहत बुजुर्गों को कागजों में मृत दर्शाया गया या फिर किसी तकनीकी कमी के कारण ऐसा हुआ। डीएम का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।