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UP: अब शीशम की बताकर आम की लकड़ी का फर्नीचर नहीं बेच पाएंगे, कारोबारी बोले- चीन के घटिया उत्पाद पर लगेगा अंकुश

Fri, 21 Mar 2025 12:48 PM IST
हिमांशु अवस्थी अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 21 Mar 2025 12:48 PM IST
सार

Kanpur News: फ्लैट कल्चर और इंटीरियर की बढ़ती मांग के बाद से गुणवत्तायुक्त फर्नीचर की मांग बढ़ती जा रही है। फर्नीचर की गुणवत्ता के परीक्षण का कोई साधन नहीं होता है। मौजूदा समय में लकड़ी का फर्नीचर महंगा भी है, लेकिन मांग बढ़ती जा रही है।

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Now you not able to sell mango wood furniture by calling it rosewood Chinas poor quality products will curbed
संजय कृपाल गर्ग, सरदार गुरुजिंदर सिंह और विजय छाबड़ा - फोटो : amar ujala

विस्तार

फर्नीचर कारोबारी आने वाले समय में शीशम, सागौन की बताकर आम की बनी लकड़ी का फर्नीचर नहीं बेच पाएंगे। चीन के घटिया फर्नीचर पर भी अंकुश लगेगा। फर्नीचर पर भी अब आईएसआई चिह्न होगा। 13 फरवरी को केंद्र सरकार ने इस संबंध में गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। शहर में फर्नीचर का कारोबार सालाना 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। फर्नीचर बनाने वाले कारोबारियों को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से लाइसेंस लेना होगा।

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कारोबारियों का कहना है कि आईएसआई चिह्न लगने से फर्नीचर की गुणवत्ता बढ़ेगी। चीन का घटिया फर्नीचर बाजार से हट सकेगा। फर्नीचर बाजार में चीन की पैठ 50 प्रतिशत से ज्यादा है। शहर के गोविंदनगर, जवाहरनगर, अशोकनगर, पीरोड, निरालानगर, हीरागंज, लालबंगला, किदवईनगर समेत शहर में पांच हजार से ज्यादा फर्नीचर की दुकानें और 250 से ज्यादा शोरूम हैं। ब्रांडेड कंपनियों के भी शोरूम खुल गए हैं। फिलहाल प्लाई व सनमाइका पर ही आईएसआई का चिह्न लगता है।

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गन्ना की खोई से तैयार करने लगे हैं फर्नीचर
फर्नीचर पर किसी प्रकार का कोई चिह्न नहीं लगता है। यदि आईएसआई मार्क लगा होगा तो लोगों को अच्छी क्वालिटी का फर्नीचर मिल सकेगा। चीन का फर्नीचर लकड़ी से न बना होकर लकड़ी के बुरादा और इसकी सीट को मिलाकर तैयार किया जाता है। अब इस तरह का फर्नीचर दिल्ली में बड़े पैमाने पर तैयार होने लगा है। उन्नाव में भी इसकी बड़ी फैक्टि्रयां खुल गई हैं, जो गन्ना की खोई का इस्तेमाल करके फर्नीचर तैयार करने लगे हैं।

फरवरी 2026 के बाद लागू होगा नियम
13 फरवरी को जारी गजट नोटिफिकेशन में बताया गया है कि केंद्र सरकार के भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से परामर्श करने के बाद फर्नीचर गुणवत्ता नियंत्रण आदेश 2025 जारी किया गया है। यह आदेश शासकीय राजपत्र में इस अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से 12 महीने के बाद लागू होगा। इसके तहत भारतीय मानक ब्यूरो के लाइसेंस के तहत मानक चिह्न लगा होगा। निर्यात की जाने वाली स्वदेश में विनिर्मित वस्तुओं या सामान पर लागू नहीं होगा। सूक्ष्म और लघु उद्यम पर ये नियम अधिसूचना के 18 महीने के बाद लागू होंगे। हालांकि इसमें छूट दी गई है। यह नियम उन इकाइयों पर लागू नहीं होगा, जिनमें मूल लागत पर संयंत्र और मशीनरी या उपकरण में निवेश 25 लाख रुपये से अधिक नहीं है। और चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित पिछले वित्त वर्ष का टर्नओवर दो करोड़ रुपये से अधिक नहीं है।

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गुणवत्तायुक्त उत्पादों की बढ़ रही मांग
फ्लैट कल्चर और इंटीरियर की बढ़ती मांग के बाद से गुणवत्तायुक्त फर्नीचर की मांग बढ़ती जा रही है। फर्नीचर की गुणवत्ता के परीक्षण का कोई साधन नहीं होता है। मौजूदा समय में लकड़ी का फर्नीचर महंगा भी है, लेकिन मांग बढ़ती जा रही है। आईएसआई चिह्न होने पर उसकी गुणवत्ता की तस्दीक की जा सकेगी। वहीं, जिस तरह से सोने के आभूषणों पर कैरेट के अनुसार चिह्न लगा होता है, उसी तर्ज पर वर्क चेयर, सामान्य प्रयोजन की चेयर और स्टूल, डेस्क, बेड, बंक बेड्स के लिए चिह्न और नंबर होगा।

फर्नीचर पर भी अब आईएसआई चिह्न लगेगा। इस संबंध में सरकार की ओर से गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। इससे फर्नीचर कारोबार संगठित होगा। ग्राहकों को गुणवत्तायुक्त फर्नीचर मिल सकेगा। चीनी फर्नीचर की बाजार में पैठ कम हो सकेगी। 
-संजय कृपाल गर्ग, संरक्षक, टिंबर उद्योग व्यापार मंडल


 

सरकार का ये बहुत अच्छा निर्णय है। फर्नीचर में लगी लकड़ी के बारे में ग्राहक नहीं जान पाता है। दुकानदार के भरोसे पर उत्पाद खरीद लेता है। आईएसआई का चिह्न भरोसे का प्रतीक होता है। चीन सबसे कम गुणवत्ता वाला फर्नीचर बाजार में खपाता है। 
-सरदार गुरुजिंदर सिंह, प्रदेश महामंत्री, टिंबर उद्योग व्यापार मंडल


 

गुणवत्तायुक्त फर्नीचर की मांग बढ़ रही है। शहर में फर्नीचर का अच्छा कारोबार होता है। मैन्युफैक्चरिंग के साथ ट्रेडिंग भी होती है। फर्नीचर पर आईएसआई लगने से लोगों का भरोसा और बढ़ेगा। इंटीरियर के बाजार में ज्यादा मांग बढ़ रही है।  -विजय छाबड़ा, पार्टनर, छाबड़ा फर्नीचर

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