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क्रोमियम कचरा निस्तारण के पहले लेनी होगी एनओसी

Wed, 10 Nov 2021 06:12 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 10 Nov 2021 06:12 PM IST
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NOC to be obtained before chromium waste disposal
कानपुर देहात। अकबरपुर तहसील के खानचंद्रपुर में खुले में डंप क्रोमियम कचरा के निस्तारण के लिए पर्यावरणीय एनओसी लेनी होगी। चिह्नित भूमि पर क्रोमियम के निस्तारण के प्रभाव का पूर्व आकलन कराया जाएगा। इसकी विस्तृत रिपोर्ट पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) से एनओसी मिलेगी। इसके बाद ही चिह्नित भूमि पर क्रोमियम कचरा का निस्तारण शुरू होगा।
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खानचंद्रपुर में मटियामऊ मोड़ पर सड़क किनारे 63 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा खुले में डंप है। इससे भूजल दूषित हो गया है। एनजीटी के निर्देश पर पाइप लाइन के जरिए खानचंद्रपुर के 360 घरों में जलापूर्ति की जा रही है। एनजीटी की सख्ती पर राज्य सरकार ने क्रोमियम कचरा निस्तारण के लिए यूपीसीडा को कार्यदायी संस्था नामित किया है। अब आईआईटी कानपुर के परामर्श पर यूपीसीडा आगे की प्रक्रिया करेगा। फिलहाल 30 बीघा जमीन की जरूरत है।
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अकबरपुर तहसील प्रशासन ने मंगलवार को खानचंद्रपुर व किशरवल गांव में भूमि देखी है। हालांकि अभी भूमि चिह्नित नहीं हो सकी है। भूमि चिह्नित होने के ठीक बाद पर्यावरणीय क्लीयरेंस लेनी होगी। इसके लिए यूपीसीडा किसी कंसल्टेंट एजेंसी से रिपोर्ट लेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लखनऊ से एनओसी मिलेेगी। इसके बाद विशेषज्ञ कचरा निस्तारण कंपनी का चयन किया जाएगा।
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पूर्व में कुंभी स्थित कचरा निस्तारण करने वाली दो कंपनियों ने क्रोमियम कचरा निस्तारण के लिए निविदा डाली थी। हालांकि रेट अधिक होने पर निविदा रद्द कर दी गई थी। अब क्रोमियम कचरा डंप स्थल के करीब ही भूमि उपलब्ध होने पर लागत में कमी आएगी।
बता दें कि राज्य सरकार करीब 24 करोड़ रुपये की अग्रिम धनराशि जारी कर चुकी है। क्रोमियम कचरा निस्तारण में करीब 110 करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान है।
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बयान-
यूपीसीडा को कंसल्टेंट एजेंसी के जरिए क्रोमियम निस्तारण स्थल पर असर आदि की विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी। इसी आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी मिलेगी। बिना पर्यावरणीय एनओसी के क्रोमियम कचरा निस्तारण शुरू नहीं होगा।

- जेपी मौर्य, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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तहसील प्रशासन को क्रोमियम कचरा निस्तारण के लिए भूमि उपलब्ध करानी है। खानचंद्रपुर के पास देखी गई भूमि अधिक उपयुक्त है। भूमि चयन के बाद कंसल्टेंट एजेंसी तय कर रिपोर्ट ली जाएगी। एनओसी मिलने पर कचरा निस्तारण की विशेषज्ञ कंपनी का चयन किया जाएगा।
- आरए गुप्ता, सहायक अभियंता यूपीसीडा
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