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Kanpur News: चार माह से किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं हुआ आंख का ऑपरेशन
Tue, 19 Aug 2025 01:26 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Tue, 19 Aug 2025 01:26 AM IST
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कानपुर देहात। जिले में सरकारी संस्थाओं में नेत्र रोगियों को आंख के ऑपरेशन एनजीओ व प्राइवेट अस्पताल के भरोसे हो रहे हैं। जबकि सरकारी संस्थानों में सुविधाएं होने के बावजूद भी चार माह बीत जाने के बाद भी एक भी नेत्र रोगी को ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल सकी। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर लोगों को अंधेपन से बचाने के लिए सीएचसी अकबरपुर, रसूलाबाद के अलावा मेडिकल कॉलेज में नेत्र रोग के विशेषज्ञों की तैनाती है। यहां ऑपरेशन के लिए ओटी भी संचालित की जाती है। मगर जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यहां एक अप्रैल से अभी तक एक भी मोतियाबिंद का ऑपरेशन नहीं किया गया। इनके स्थान पर स्वयं सेवी संस्थाओं की ओर से शिविर लगाकर 245 व निजी अस्पतालों की ओर से 186 लोगों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किए गए हैं।
सीएचसी स्तर पर आंखों की समस्या लेकर पहुंचने वाले लोगों को जांच में मोतियाबिंद की पुष्टि होने पर ऑपरेशन की जगह उनका नाम रजिस्टर पर दर्ज जल्द ऑपरेशन करवाने का आश्वासन देकर वापस कर दिया जाता है। अकबरपुर सीएचसी में अभी तक 37 लोग व रसूलाबाद सीएचसी में 40 लोगों में मोतियाबिंद मिला है। इन सभी मरीजों को डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से ऑपरेशन करवाने की सूची में शामिल किया गया है।
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मेडिकल कॉलेज में उपकरणों के अभाव से ऑपरेशन प्रभावित
अकबरपुर मेडिकल कॉलेज की नेत्र विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 100 मरीज उपचार करवाने के लिए पहुंचते हैं। इनमें से प्रतिदिन एक या दो मरीजों में मोतियाबिंद की भी शिकायत मिलती है, मगर यहां भी उन्हें ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल पाती है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जयवर्धन ने बताया कि उपकरणों के आभाव के चलते ओटी का संचालन नहीं हो पा रहा है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से शासन को नेत्र रोग संबंधी उपकरण मुहैया करवाने के लिए पत्राचार किया जा चुका है। उपकरण आने के बाद कॉलेज में ऑपरेशन शुरू करवा दिए जाएंगे।
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कई सीएचसी में नहीं होती आंख की जांच
जिले में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने के लिए 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इनमें से सीएचसी सलेमपुर, सिकंदरा, गजनेर, भोगनीपुर आदि में आंखों की जांच ही नहीं होती है। इसके चलते यहां के मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाए जाने वाले शिविर, पड़ोसी ब्लॉक की सीएचसी व मेडिकल कॉलेज में जांच करवानी पड़ती है।
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बोले जिम्मेदार
गर्मी का मौसम आंख के ऑपरेशन के लिए अनुकूल नहीं रहता है। अस्पताल में आने वाले नेत्र रोगियों की स्क्रीनिंग कर चिन्हित किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर अंधता निवारण अभियान के तहत मरीज का स्वयं सेवी संस्था व निजी अस्पताल में ऑपरेशन करवाया जा रहा है। मौसम अनुकूल होने पर सीएचसी स्तर पर भी ऑपरेशन शुरू करवाए जाएंगे। - डॉ. एके सिंह, सीएमओ
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स्वास्थ्य विभाग की ओर लोगों को अंधेपन से बचाने के लिए सीएचसी अकबरपुर, रसूलाबाद के अलावा मेडिकल कॉलेज में नेत्र रोग के विशेषज्ञों की तैनाती है। यहां ऑपरेशन के लिए ओटी भी संचालित की जाती है। मगर जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यहां एक अप्रैल से अभी तक एक भी मोतियाबिंद का ऑपरेशन नहीं किया गया। इनके स्थान पर स्वयं सेवी संस्थाओं की ओर से शिविर लगाकर 245 व निजी अस्पतालों की ओर से 186 लोगों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किए गए हैं।
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सीएचसी स्तर पर आंखों की समस्या लेकर पहुंचने वाले लोगों को जांच में मोतियाबिंद की पुष्टि होने पर ऑपरेशन की जगह उनका नाम रजिस्टर पर दर्ज जल्द ऑपरेशन करवाने का आश्वासन देकर वापस कर दिया जाता है। अकबरपुर सीएचसी में अभी तक 37 लोग व रसूलाबाद सीएचसी में 40 लोगों में मोतियाबिंद मिला है। इन सभी मरीजों को डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से ऑपरेशन करवाने की सूची में शामिल किया गया है।
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मेडिकल कॉलेज में उपकरणों के अभाव से ऑपरेशन प्रभावित
अकबरपुर मेडिकल कॉलेज की नेत्र विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 100 मरीज उपचार करवाने के लिए पहुंचते हैं। इनमें से प्रतिदिन एक या दो मरीजों में मोतियाबिंद की भी शिकायत मिलती है, मगर यहां भी उन्हें ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल पाती है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जयवर्धन ने बताया कि उपकरणों के आभाव के चलते ओटी का संचालन नहीं हो पा रहा है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से शासन को नेत्र रोग संबंधी उपकरण मुहैया करवाने के लिए पत्राचार किया जा चुका है। उपकरण आने के बाद कॉलेज में ऑपरेशन शुरू करवा दिए जाएंगे।
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कई सीएचसी में नहीं होती आंख की जांच
जिले में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने के लिए 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इनमें से सीएचसी सलेमपुर, सिकंदरा, गजनेर, भोगनीपुर आदि में आंखों की जांच ही नहीं होती है। इसके चलते यहां के मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाए जाने वाले शिविर, पड़ोसी ब्लॉक की सीएचसी व मेडिकल कॉलेज में जांच करवानी पड़ती है।
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बोले जिम्मेदार
गर्मी का मौसम आंख के ऑपरेशन के लिए अनुकूल नहीं रहता है। अस्पताल में आने वाले नेत्र रोगियों की स्क्रीनिंग कर चिन्हित किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर अंधता निवारण अभियान के तहत मरीज का स्वयं सेवी संस्था व निजी अस्पताल में ऑपरेशन करवाया जा रहा है। मौसम अनुकूल होने पर सीएचसी स्तर पर भी ऑपरेशन शुरू करवाए जाएंगे। - डॉ. एके सिंह, सीएमओ