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बीमार व्यवस्थाएं! नहीं मिली एंबुलेंस, बेटे ने मृत पशु ढोने वाले रिक्शे से मां को पहुंचाया अस्पताल
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 05 Oct 2018 09:17 AM IST
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रिक्शे में मां को जिला अस्पताल ले जाता बेटा
- फोटो : अमर उजाला
व्यवस्थाएं शर्मसार, दावे हवाहवाई। कुछ ऐसा ही नजारा गुरुवार को उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र श्रीनगर में सामने आया। बीमार महिला को पीएचसी से जिला अस्पताल ले जाने के लिए बेटे को करीब घंटेभर एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा। इधर, मां की तबीयत और भी गड़बड़ा गई।
कोई रास्ता न सूझने पर लाचार बेटा बीमार मां को मृत पशु ढोने वाले रिक्शे पर लादकर 18 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल लाया। यहां उसे दवा दे दी गई पर एंबुलेंस नहीं मिली। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की इस अनदेखी ने आखिर मानवता को शर्मसार कर दिया।
श्रीनगर निवासी रामकृपाल (57 ) की मां पार्वती की गुरुवार को अचानक तबियत बिगड़ गई। बुखार होने के साथ-साथ सांस फूलने पर उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, श्रीनगर में भर्ती कराया गया। हालत में सुधार न होने पर उसे डाक्टरों ने जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
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कोई रास्ता न सूझने पर लाचार बेटा बीमार मां को मृत पशु ढोने वाले रिक्शे पर लादकर 18 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल लाया। यहां उसे दवा दे दी गई पर एंबुलेंस नहीं मिली। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की इस अनदेखी ने आखिर मानवता को शर्मसार कर दिया।
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श्रीनगर निवासी रामकृपाल (57 ) की मां पार्वती की गुरुवार को अचानक तबियत बिगड़ गई। बुखार होने के साथ-साथ सांस फूलने पर उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, श्रीनगर में भर्ती कराया गया। हालत में सुधार न होने पर उसे डाक्टरों ने जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
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डाक्टरों से एंबुलेंस की व्यवस्था किए जाने की आरजू-मिन्नत की
रिक्शे में मां को ले जाता बेटा
- फोटो : अमर उजाला
रामकृपाल ने डाक्टरों से एंबुलेंस की व्यवस्था किए जाने की आरजू-मिन्नत की लेकिन एक घंटे तक डाक्टर एंबुलेंस का इंतजाम नहीं कर सके। ग्रामीण के अनपढ़ होने के कारण उसने एंबुलेंस को फोन नहीं किया और मृत पशु ढोने वाले रिक्शे में मां को लेटाकर 18 किमी दूर जिला अस्पताल महोबा लाया। जहां पर डाक्टरों ने उसकी उपचार के बाद दवा देकर छुट्टी कर दी।
जिला अस्पताल से भी डाक्टरों ने कोई एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं की। जिससे उसने मां को दोबारा उसी रिक्शे में लिटाकर अपने गांव श्रीनगर ले आया। सरकार द्वारा चलाई जा रही एंबुलेंस का लाभ अनपढ़ और गरीबों को नहीं मिल पा रहा है। एंबुलेंस चलने के बाद भी बुजुर्ग बीमार मां को घर तक लाने के लिए रिक्शा खींचना पड़ा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुमन का कहना है कि मरीजों को लाने के लिए सरकार ने 108 एंबुलेंस की सुविधा दी है। डॉयल करने पर तत्काल एंबुलेंस मौके पर पहुंचती है। पीड़ित ने हमसे कोई मदद नहीं मांगी है और न ही एंबुलेंस सेवा के लिए फोन किया। यदि फोन किया जाता तो एंबुलेंस भिजवाई जाती।
जिला अस्पताल से भी डाक्टरों ने कोई एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं की। जिससे उसने मां को दोबारा उसी रिक्शे में लिटाकर अपने गांव श्रीनगर ले आया। सरकार द्वारा चलाई जा रही एंबुलेंस का लाभ अनपढ़ और गरीबों को नहीं मिल पा रहा है। एंबुलेंस चलने के बाद भी बुजुर्ग बीमार मां को घर तक लाने के लिए रिक्शा खींचना पड़ा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुमन का कहना है कि मरीजों को लाने के लिए सरकार ने 108 एंबुलेंस की सुविधा दी है। डॉयल करने पर तत्काल एंबुलेंस मौके पर पहुंचती है। पीड़ित ने हमसे कोई मदद नहीं मांगी है और न ही एंबुलेंस सेवा के लिए फोन किया। यदि फोन किया जाता तो एंबुलेंस भिजवाई जाती।