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फ्रांस में औरतों को बुरका पहनकर सरकारी दफ्तरों में जाने पर पाबंदी है: मौलाना शमशीर अली

Sun, 09 Dec 2018 09:07 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 09 Dec 2018 09:07 PM IST
सार

- हुसैन दिवस पर फ्रांस से आए मौलाना शमशीर अली ने बताया

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फ्रांस से कानपुर शहर आए शिया आलिम मौलाना शमशीर अली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फ्रांस से कानपुर शहर आए शिया आलिम मौलाना शमशीर अली ने कहा कि फ्रांस में औरतों के बुरका पहनकर सरकारी दफ्तरों में जाने पर पाबंदी है। निजी पार्टियों और बाजार आदि में मुस्लिम महिलाएं बुरका पहन सकती हैं।
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इस संबंध में फ्रांस सरकार ने नियम बना दिया है। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने महिलाओं की गतिविधियों पर कोई पाबंदी नहीं लगाई है। पैगंबर-ए-इस्लाम की पहली पत्नी भी बड़ी व्यवसाई रहीं हैं। इस्लाम तो एक ही है, लेकिन मुसलमान अलग-अलग हो गया है।
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डेमो पिक
मौलाना शमशीर अली ने रविवार को परेड ग्राउंड पर हुसैनी दिवस के कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने बताया कि फ्रांस में मुस्लिमों की आबादी 55 लाख है। लोकतंत्र भारत के बाद ईरान में दिखा। फ्रांस में कुछ लोगों की गलतियों की वजह से आठ-दस वर्ष पहले पाबंदियां शुरू हुईं।

लोग जब मजहब से दूर होंगे तो मतभेद पैदा होंगे। वैसे किसी मजहब में मतभेद जैसी कोई बात नहीं हैं। इस मौके पर कोलकाता से आए मौलाना शब्बीर अली वारसी ने बताया कि इस्लाम में कोई दिक्कत नहीं है, जब कठमुल्लापन प्रभावी होता है तो मतभेद (फिरके) पैदा हो जाते हैं। शिद्दतपसंदी इस्लाम में नहीं है। मोहब्बत करने से ही खुदा मिलता है।
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