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कटवाओ ये चुनाव की ड्यूटी दिल बैठा जा रहा है, कोई लगवा रहा है सिफारिश तो कोई ये तरीका अपना रहा
Thu, 18 Apr 2019 12:18 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 18 Apr 2019 12:18 PM IST
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फाइल फोटो
लोकसभा चुनाव में लगी ड्यूटी कटवाने के लिए कर्मचारी और अफसर मुख्य विकास अधिकारी दफ्तर और कलक्ट्रेट के चक्कर लगा रहे हैं। ज्यादातर अपने को हृदय बीमारी बता रहे हैं। कोई गंभीर बीमारी तो कोई ब्लड प्रेशर बढ़ा रहने की बात कह रहे हैं। कुछ महिला कर्मचारियों ने गर्भवती होने की बात कहकर ड्यूटी करने में दिक्कत बताई है।
सबसे ज्यादा ड्यूटी कटवाने के लिए बैंक, एलआईसी, शिक्षा और श्रम विभाग से अर्जी हैं। मुख्य विकास अधिकारी ने इन विभागों के विभागाध्यक्षों से पूछा है कि कर्मचारियों को एक दिन की ड्यूटी में इतनी दिक्कत है तो साल भर काम कैसे कर लेते हैं।
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सबसे ज्यादा ड्यूटी कटवाने के लिए बैंक, एलआईसी, शिक्षा और श्रम विभाग से अर्जी हैं। मुख्य विकास अधिकारी ने इन विभागों के विभागाध्यक्षों से पूछा है कि कर्मचारियों को एक दिन की ड्यूटी में इतनी दिक्कत है तो साल भर काम कैसे कर लेते हैं।
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जायज कारण तो सही लेकिन अर्जी देने वाले ज्यादातर लोग बहाने बनाकर सिफारिश से ड्यूटी कटवाने की जुगाड़ में लगे हैं। मुख्य विकास अधिकारी के अपने दफ्तर या कलक्ट्रेट में बैठते ही ड्यूटी कटवाने के लिए आने वाले लोग उन्हें घेर लेते हैं।
बीमारी के बहाने पर मेडिकल जरूरी किया गया तो हर अर्जी मेडिकल समेत आने लगी। लोकसभा चुनाव कराने के लिए करीब 20 हजार अफसर और कर्मचारी लगाए गए हैं। मुख्य विकास अधिकारी के पास पूरे दिन सिफारिशी फोन घनघनाते रहते हैं। अभी तक ड्यूटी कटवाने के लिए 503 अर्जी आईं हैं।
बीमारी के बहाने पर मेडिकल जरूरी किया गया तो हर अर्जी मेडिकल समेत आने लगी। लोकसभा चुनाव कराने के लिए करीब 20 हजार अफसर और कर्मचारी लगाए गए हैं। मुख्य विकास अधिकारी के पास पूरे दिन सिफारिशी फोन घनघनाते रहते हैं। अभी तक ड्यूटी कटवाने के लिए 503 अर्जी आईं हैं।
इस तरह की अर्जी
- स्टेट बैंक के एक कर्मचारी ने अर्जी में कहा है कि दिल की बीमारी है। माइनर अटैक भी पड़ चुका है। इसलिए उनकी ड्यूटी काट दी जाए।
- एक शिक्षिका ने अर्जी दी है कि वह गर्भवती है। इसलिए चुनाव ड्यूटी नहीं कर सकती है। इसलिए उन्हें इससे मुक्त किया जाए।
- एलआईसी में कार्यरत एक अफसर ने अर्जी दी है कि उनका एक्सीडेंट हो गया है। इसलिए वह बेड रेस्ट पर हैं। चुनाव ड्यूटी नहीं कर सकते हैं।
- कलक्ट्रेट की एक महिला अफसर की शादी है। उन्होंने शादी की कार्ड लगाते हुए ड्यूटी करने में अक्षमता जताई है।
- स्टेट बैंक के एक कर्मचारी ने अर्जी में कहा है कि दिल की बीमारी है। माइनर अटैक भी पड़ चुका है। इसलिए उनकी ड्यूटी काट दी जाए।
- एक शिक्षिका ने अर्जी दी है कि वह गर्भवती है। इसलिए चुनाव ड्यूटी नहीं कर सकती है। इसलिए उन्हें इससे मुक्त किया जाए।
- एलआईसी में कार्यरत एक अफसर ने अर्जी दी है कि उनका एक्सीडेंट हो गया है। इसलिए वह बेड रेस्ट पर हैं। चुनाव ड्यूटी नहीं कर सकते हैं।
- कलक्ट्रेट की एक महिला अफसर की शादी है। उन्होंने शादी की कार्ड लगाते हुए ड्यूटी करने में अक्षमता जताई है।
ड्यूटी न लगाने का मानक
कोई अफसर या कर्मचारी अस्वस्थ हो। वह अप्रैल माह में सेवानिवृत्त होने वाला हो। मानसिक बीमारी हो। विकलांग हो। कोई महिला गर्भवती हो। किसी महिला का छोटा बच्चा हो। किसी की ड्यूटी दो स्थानों पर लग गई हो।
ड्यूटी कटवाने के लिए सिफारिशें और बहानेबाजी चल रही है। सबसे ज्यादा अर्जी बैंक और एलआईसी की आई हैं। इनमें से ज्यादातर अपने को हृदय रोगी और गंभीर बीमारियों से पीड़ित बता रहे हैं। कुछ गर्भवती महिलाओं की भी अर्जी आई हैं। बैंक और एलआईसी के विभागाध्यक्षों से पूछा गया है कि उनके कर्मचारी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं तो पूरे साल ड्यूटी कैसे करते हैं। अगर किसी ने फर्जी कागजों के आधार पर ड्यूटी कटवाने का प्रयास किया तो उसके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।
- अक्षय त्रिपाठी मुख्य विकास अधिकारी, कार्मिक प्रभारी
कोई अफसर या कर्मचारी अस्वस्थ हो। वह अप्रैल माह में सेवानिवृत्त होने वाला हो। मानसिक बीमारी हो। विकलांग हो। कोई महिला गर्भवती हो। किसी महिला का छोटा बच्चा हो। किसी की ड्यूटी दो स्थानों पर लग गई हो।
ड्यूटी कटवाने के लिए सिफारिशें और बहानेबाजी चल रही है। सबसे ज्यादा अर्जी बैंक और एलआईसी की आई हैं। इनमें से ज्यादातर अपने को हृदय रोगी और गंभीर बीमारियों से पीड़ित बता रहे हैं। कुछ गर्भवती महिलाओं की भी अर्जी आई हैं। बैंक और एलआईसी के विभागाध्यक्षों से पूछा गया है कि उनके कर्मचारी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं तो पूरे साल ड्यूटी कैसे करते हैं। अगर किसी ने फर्जी कागजों के आधार पर ड्यूटी कटवाने का प्रयास किया तो उसके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।
- अक्षय त्रिपाठी मुख्य विकास अधिकारी, कार्मिक प्रभारी