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Kanpur News: मेडिकल कॉलेज परिसर में नवजात की मौत
Thu, 07 Aug 2025 12:40 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Thu, 07 Aug 2025 12:40 AM IST
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कानपुर देहात। मेडिकल कॉलेज परिसर में बुधवार रात को एक नवजात की मौत हो गई। परिजन ने महिला अस्पताल के स्टाफ पर बच्चे को एसएनसीयू में भर्ती न करने का आरोप लगाया है। वहीं, आशा कार्यकर्ता का आरोप है कि अस्पताल में कई बच्चे लाएं एक भी बच्चा साबित (जीवित) वापस नहीं गया। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।
डेरापुर के सनिहापुर अहिराना निवासी शिव गोपाल ने बताया कि बुधवार सुबह पत्नी रानी देवी को प्रसव पीड़ा होने पर डेरापुर सीएचसी में भर्ती करवाया था। वहां डॉ. अमियकांत त्रिपाठी व स्टाफ नर्स ममता ने पत्नी का सामान्य प्रसव करवाया। पत्नी ने बेटे को जन्म दिया था। डॉक्टर ने नवजात की हालत ठीक न होने की बात कहकर शाम को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज आने पर स्टाफ ने बच्चे को भर्ती नहीं किया। आरोप लगाया कि स्टाफ ने एसएनसीयू में जगह न होने की बात कह सैफई या कानपुर ले जाने को कहा। बच्चे को गंभीर देखते हुए वह करीब 45 मिनट तक गिड़गिड़ाता रहा लेकिन उनकी कोई बात नहीं सुनी गई। इस पर वह बच्चे को निजी अस्पताल ले गया। वहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
नवजात की मौत के बाद परिजन के साथ जमीन पर बैठी आशा रमा देवी का एक वीडियो वायरल हो गया। जिसमें वह कहतीं दिख रहीं हैं कि वह यहां पहला बच्चा लेकर नहीं लाई हैं। पूर्व में भी कई बच्चे ला चुकीं हैं मगर एक भी बच्चा साबित (जीवित) वापस नहीं गया। यदि प्राइवेट अस्पताल में ले जाएं तो सरकार कहती है कि आशा प्राइवेट में प्रसूता को ले जा रही। अस्पताल में सुविधाएं सभी हैं मगर भर्ती नहीं किया जाता है। हालांकि संवाद न्यूज एजेंसी वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
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सीएमएस डॉ. वंदना सिंह ने बताया कि एसएनसीयू में बेड की सापेक्ष तीन गुना अधिक बच्चे भर्ती हैं। वर्तमान में एसएनसीयू में 23 बच्चे हैं। एक बेड पर तीन-तीन बच्चे भर्ती हैं। नवजात के परिजन उसे एसएनसीयू तक लेकर ही नहीं गए हैं। ग्राउंड फ्लोर पर ही टहलते रहे, परिजन बच्चे को एसएनसीयू लेकर आते तो उसे किसी तरह से भर्ती कर उपचार शुरू किया जाता।
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डेरापुर के सनिहापुर अहिराना निवासी शिव गोपाल ने बताया कि बुधवार सुबह पत्नी रानी देवी को प्रसव पीड़ा होने पर डेरापुर सीएचसी में भर्ती करवाया था। वहां डॉ. अमियकांत त्रिपाठी व स्टाफ नर्स ममता ने पत्नी का सामान्य प्रसव करवाया। पत्नी ने बेटे को जन्म दिया था। डॉक्टर ने नवजात की हालत ठीक न होने की बात कहकर शाम को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज आने पर स्टाफ ने बच्चे को भर्ती नहीं किया। आरोप लगाया कि स्टाफ ने एसएनसीयू में जगह न होने की बात कह सैफई या कानपुर ले जाने को कहा। बच्चे को गंभीर देखते हुए वह करीब 45 मिनट तक गिड़गिड़ाता रहा लेकिन उनकी कोई बात नहीं सुनी गई। इस पर वह बच्चे को निजी अस्पताल ले गया। वहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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नवजात की मौत के बाद परिजन के साथ जमीन पर बैठी आशा रमा देवी का एक वीडियो वायरल हो गया। जिसमें वह कहतीं दिख रहीं हैं कि वह यहां पहला बच्चा लेकर नहीं लाई हैं। पूर्व में भी कई बच्चे ला चुकीं हैं मगर एक भी बच्चा साबित (जीवित) वापस नहीं गया। यदि प्राइवेट अस्पताल में ले जाएं तो सरकार कहती है कि आशा प्राइवेट में प्रसूता को ले जा रही। अस्पताल में सुविधाएं सभी हैं मगर भर्ती नहीं किया जाता है। हालांकि संवाद न्यूज एजेंसी वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
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सीएमएस डॉ. वंदना सिंह ने बताया कि एसएनसीयू में बेड की सापेक्ष तीन गुना अधिक बच्चे भर्ती हैं। वर्तमान में एसएनसीयू में 23 बच्चे हैं। एक बेड पर तीन-तीन बच्चे भर्ती हैं। नवजात के परिजन उसे एसएनसीयू तक लेकर ही नहीं गए हैं। ग्राउंड फ्लोर पर ही टहलते रहे, परिजन बच्चे को एसएनसीयू लेकर आते तो उसे किसी तरह से भर्ती कर उपचार शुरू किया जाता।