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अब स्कूली बच्चे बचाएंगे हादसे में घायलों की जान, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कसी कमर

Sat, 11 Nov 2017 06:57 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 11 Nov 2017 06:57 PM IST
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new syllabus will be included in school students syllabus
डेमो पिक
देश में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार स्कूलों में नेशनल लाइफ सेविंग नाम से नया पाठ्यक्रम शुरू करने जा रही है। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने सारी तैयारी कर ली है। इसे नए सत्र से लागू भी कर दिया जाएगा। इस पाठ्यक्रम में बच्चों को हादसों से बचने के तरीके और घायलों को किस तरह से अस्पताल ले जाते हैं यह भी बताया जाएगा। 
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देश में सबसे ज्यादा मौत सड़क दुर्घटना में होती हैं

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देश में सबसे ज्यादा मौत सड़क दुर्घटना में होती हैं। हादसों में हर साल डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती हैं। स्वास्थ्य सेवा निदेशालय की डिप्टी एडीजी डॉ. तनु जैन के मुताबिक हादसों के 90 प्रतिशत मामलों में राहगीर और पुलिस ही घायलों को हॉस्पिटल पहुंचाते हैं। वे समय पर (गोल्डन आवर) घायलों को हॉस्पिटल पहुंचा भी देते हैं, लेकिन इसके बाद भी घायल की मौत हो जाती है। सब समझते हैं कि इलाज के अभाव में उनकी मौत हो गई, लेकिन ज्यादातर मामलों में ऐसा नहीं होता।

घायलों की मौत उन्हें सही तरीके से अस्पताल न ले जाने की वजह से होती है। अगर उनको सही तरीके से अस्पताल ले जाया जाए तो उनकी जान बचाई जा सकती है। इसलिए पुलिस और लोगों को ट्रेनिंग देने की जरूरत है। इसे ही संज्ञान में लेते हुए स्कूलों में नेशनल लाइफ सेविंग का कोर्स शुरू कराए जाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए केंद्र सरकार से हरी झंडी मिल गई है। अब मंत्रालय खाका बना रहा है।
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पढ़ाने के साथ ट्रेनिंग भी दी जाएगी

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नेशनल लाइफ सेविंग कोर्स में छात्रों को यातायात के नियम के साथ ही घायलों के प्राथमिक उपचार के बारे में बताया जाएगा। उनको बताया जाएगा कि वह किस तरह खून को बहने से रोक सकते हैं, वह किस तरह से किसी घायल को उठाकर एंबुलेंस या गाड़ी में लिटाएं। कई मामलों में ऐसा होता है कि राहगीर और पुलिस जल्दबाजी में घायल को उठाकर एंबुलेंस में लिटा देते हैं। वह जल्दबाजी में सिर, गर्दन या अन्य जगह पर कोई सपोर्ट नहीं लगाते हैं। इससे हड्डी टूटने के साथ अन्य कोई दिक्कत होने का खतरा रहता है। इसके लिए स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के साथ ट्रेनिंग भी दी जाएगी। 
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पढ़ाई पूरी करने वालों के लिए भी कोर्स आएगा

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डिप्टी एडीजी तनु जैन ने बताया कि स्वास्थ्य निदेशालय फस्ट एड की ट्रेेनिंग देने के लिए भी एक कोर्स शुरू करने जा रहा है। यह ट्रेनिंग कोर्स एक सप्ताह का होगा। इसमें आवेदक को नि:शुल्क ट्रेनिंग दी जाएगी। 
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