कानपुर ‘अग्निकांड’: अब लापरवाही का खुलासा! जल रहा था थोक बाजार, गाड़ियां भी पहुंची..निर्देश देने वाले थे लापता
Kanpur Fire Case: थोक कपड़ा बाजार अग्निकांड में विभाग के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। लाटूशरोड फायर स्टेशन में आवास होने के बाद भी एफएसओ फजलगंज स्थित आवास पर थे। 1:32 बजे फायर मिनी कंट्रोल रूम को सूचना मिली थी और 1:45 बजे तीन गाड़ियां पहुंच गई थीं।
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कानपुर के बांस मंडी में थोक कपड़ा बाजार जलकर राख हो जाने के पीछे अग्निशमन विभाग के जिम्मेदार अफसर की बड़ी लापरवाही प्रकाश में आई है। गुरुवार देर रात थोक कपड़ा बाजार जल रहा था। सूचना के बाद आग बुझाने के लिए स्थानीय फायर स्टेशन से गाड़ियां भी पहुंचीं थीं, लेकिन कर्मियों को निर्देश देने वाले लापता थे।
समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जा सका और व्यापारियों को अरबों रुपये का नुकसान उठाना पड़ गया। थोक कपड़ा बाजार से महज करीब 500 मीटर की दूरी पर ही लाटूश रोड फायर स्टेशन स्थित है। इस स्टेशन पर वर्तमान में एफएसओ (फायर स्टेशन अफसर) कैलाश चंद्र की तैनाती है।
लाटूशरोड फायर स्टेशन की संवेदनशीलता को देखते हुए यहां तैनात एफएसओ को परिसर में ही स्थित आवास में ही रात को भी रुकने के आदेश आलाधिकारियों की ओर से दिए गए थे। इसके बाद भी कैलाश चंद्र लाटूश रोड से करीब चार किमी दूर स्थित फजलगंज स्टेशन परिसर में स्थित आवास में ही रुकते हैं।
तब लाटूशरोड फायर स्टेशन को किया था सतर्क
हालांकि इस संबंध में उन्हें सीएफओ स्तर से कई बार नोटिस भी दिया जा चुका था। विभागीय सूत्रों के अनुसार घटना के दिन भी वह फजलगंज में ही थे। गुरुवार की रात करीब 1:32 बजे पर मिनी कंट्रोल रूम पर बाजार में आग लगने की सूचना दी गई। यहां से लाटूशरोड फायर स्टेशन को सतर्क किया गया।
अधिकारी मौके पर नहीं थे मौजूद
अधिकारियों का दावा है कि रात 1:45 बजे तक लाटूशरोड से दो बड़ी गाड़ियां और एक छोटी गाड़ी मौके पर पहुंच गई थी। लेकिन, उनका नेतृत्व करने वाले मौके पर नहीं थे। सूत्रों के अनुसार इस कारण अग्निशमन कर्मी एक रणनीति के तहत आग को एआर टॉवर से ही नहीं रोक सके थे।
लगभग दो घंटे हो चुके थे बर्बाद
उनकी आंखों के सामने ही आग ने आसपास की इमारतों को भी चपेट में ले लिए। जब आग के बेकाबू होने की सूचना फजलगंज में मौजूद एफएसओ को हुई, तो उन्होंने किदवईनगर फायर स्टेशन से गाड़ी मंगइवाई और तब घटना स्थल पर पहुंचे। इस बीच डेढ़ से दो घंटे का समय बर्बाद हो चुका था।
आदेशों की अवेहलना क्यों की
ऐसे में सवाल इस बात का है कि जब आलाधिकारियों ने क्षेत्र की संदेवनशीलता को देखते हुए उन्हें नोटिस देकर अपने क्षेत्र में रुकने को कहा गया था तो भी उन्होंने आदेशों की अवेहलना क्यों की। व्यापारियों में चर्चा है कि अगर एफएसओ मौके पर होते तो कुशल निर्देशन में शायद आग को फैलने से रोक लिया जाता।
एफएसओ को लाटूशरोड स्थित परिसर में ही स्थित अपने आवास में रुकने के निर्देश पूर्व में ही दिए गए थे। इस संबंध में उन्हें कई बार नोटिस दिया गया था। लेकिन, वर्तमान में उनके पास पनकी फायर स्टेशन की भी जिम्मेदारी थी। ऐसे में इसे नजरअंदाज किया गया था। -दीपक शर्मा, सीएफओ