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कानपुर: नीट पीजी प्रवेश परीक्षा मॉडरेट से कठिन स्तर की रही, क्लीनिकल सिनेरियो ने बढ़ाई चुनौती

Sun, 30 Aug 2026 05:22 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर Published by: प्रसून शुक्ला Updated Sun, 30 Aug 2026 05:22 PM IST
सार

Kanpur News: नीट पीजी प्रवेश परीक्षा इस बार मॉडरेट से कठिन स्तर की रही। डॉक्टर वत्सल दीक्षित, एमबीबीएस ने परीक्षा के प्रश्नपत्र का विश्लेषण करते हुए बताया कि इस बार सीधे प्रश्नों की अपेक्षा क्लीनिकल सिनेरियो और व्यावहारिक समझ पर आधारित सवाल अधिक पूछे गए।

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NEET PG 2026 Exam Rated Moderate to Difficult, Clinical Scenarios Made Paper More Challenging
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

ऐसे प्रश्नों को समझने और उत्तर देने में अभ्यर्थियों को अधिक समय लगा। उन्होंने बताया कि इस बार परीक्षा में प्रश्नों की संख्या 200 से घटाकर 180 कर दी गई थी। प्रश्नपत्र को समयबद्ध सेक्शन में बांटा गया था। इससे समय प्रबंधन में कुछ आसानी हुई, लेकिन एक बार सेक्शन लॉक होने के बाद दोबारा पीछे जाकर प्रश्न देखने का विकल्प नहीं होने से अभ्यर्थियों पर मानसिक दबाव बढ़ा।

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डॉ. वत्सल दीक्षित के अनुसार प्रश्नपत्र में करीब 15 से 20 प्रश्न काफी चुनौतीपूर्ण रहे। ऐसे में इस बार कटऑफ थोड़ा ऊपर जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में अभ्यर्थियों की विषय की जानकारी के साथ-साथ क्लीनिकल परिस्थितियों को समझने और व्यावहारिक निर्णय लेने की क्षमता को भी परखा गया।

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माता-पिता के लिए भी परीक्षा जैसा अनुभव

कानपुर विश्वविद्यालय के दयानंद विधि महाविद्यालय छात्र संघ के पूर्व महामंत्री अनुज कुमार दीक्षित एडवोकेट ने नीट पीजी परीक्षा को लेकर कहा कि यह केवल छात्रों की परीक्षा नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और परिवार की भी परीक्षा होती है। छात्र रात-रात भर पढ़ाई करते हैं, वहीं माता-पिता भी उनकी तैयारी और भविष्य को लेकर चिंता में जागते रहते हैं। 

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उन्होंने परीक्षा की प्रक्रिया पर संतोष जताते हुए कहा कि उम्मीद है कि परिणाम छात्रों के लिए सफल और बेहतर रहेगा। सरकार की ओर से नीट पीजी परीक्षा में किए गए सुधार छात्रों और उनके परिवारों के हित में हैं। उन्होंने बताया कि एमडी में जनरल मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और डर्मेटोलॉजी जैसी विशेषज्ञताओं को छात्र-छात्राएं प्राथमिकता देते हैं। वहीं एमएस में जनरल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स और गाइनकोलॉजी प्रमुख पसंद में शामिल हैं। पीजी डिप्लोमा में डीजीओ, डीसीएच और डीएलओ जैसे पाठ्यक्रमों को भी छात्र अपनी प्राथमिकता के अनुसार चुनते हैं।

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