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गर्भवती की शुरुआत में ही कराएं ब्लड शुगर की जांच, तैयार की गई ये नई गाइडलाइन
Sun, 15 Sep 2019 12:21 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 15 Sep 2019 12:21 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : गूगल
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गर्भवती की शुरुआत में ही ब्लड शुगर की जांच जरूर कराई जाएगी। इसके लिए नई गाइडलाइन तैयार की गई है, जिससे जांचों में एकरूपता आए और डॉक्टर अलग-अलग विधियां अपनाने से बचें। महिला सशक्तीकरण के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉन कम्युनिकेबिल डिजीज (एनसीडी) को न्यूनतम स्तर पर लाने के लक्ष्य के मद्देनजर गर्भावस्था के दौरान होने वाली हाई ब्लड शुगर को लेकर जीरो टॉलरेंस का प्रोजेक्ट राष्ट्र स्तर पर शुरू किया गया है। इसकी स्टेट हेड वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मीरा अग्निहोत्री को बनाया गया है।
कानपुर में प्रोजेक्ट के संबंध में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन स्वरूपनगर स्थित जीवनी हॉस्पिटल (कानपुर नर्सिंगहोम) में किया गया। इसके बाद डॉ. मीरा अग्निहोत्री, प्रोजेक्ट प्रभारी डॉ. अजय भारद्वाज ने पत्रकारों को बताया कि गर्भवती को डॉक्टर अपने सामने तीन सौ मिली पानी में 75 ग्राम ग्लूकोज पिलाएंगे। यह पानी गर्भवती को पांच मिनट में पीना है। इसके ठीक दो घंटे के बाद महिला के ब्लड शुगर की जांच की जाएगी। अगर ब्लड शुगर बढ़ी हुई निकलती है तो उसको उसी लिहाज से इलाज दिया जाएगा।
देश में छह स्थानों, कर्नाटक में दो, दिल्ली में दो और यूपी में दो स्थानों पर प्रोजेक्ट चल रहा है। यूपी में मेडिकल कॉलेज के जच्चा-बच्चा अस्पताल और जीवन हॉस्पिटल में चल रहा है। डॉ. किरन पांडेय, डॉ. कल्पना दीक्षित और डॉ. शैली अग्रवाल इसकी मास्टर ट्रेनर हैं। डॉ. भारद्वाज ने बताया कि अगर गर्भावस्था में डायबिटीज की रोगी को इलाज न दिया तो इससे आने वाली पीढ़ी प्रभावित होंगी।
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कानपुर में प्रोजेक्ट के संबंध में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन स्वरूपनगर स्थित जीवनी हॉस्पिटल (कानपुर नर्सिंगहोम) में किया गया। इसके बाद डॉ. मीरा अग्निहोत्री, प्रोजेक्ट प्रभारी डॉ. अजय भारद्वाज ने पत्रकारों को बताया कि गर्भवती को डॉक्टर अपने सामने तीन सौ मिली पानी में 75 ग्राम ग्लूकोज पिलाएंगे। यह पानी गर्भवती को पांच मिनट में पीना है। इसके ठीक दो घंटे के बाद महिला के ब्लड शुगर की जांच की जाएगी। अगर ब्लड शुगर बढ़ी हुई निकलती है तो उसको उसी लिहाज से इलाज दिया जाएगा।
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देश में छह स्थानों, कर्नाटक में दो, दिल्ली में दो और यूपी में दो स्थानों पर प्रोजेक्ट चल रहा है। यूपी में मेडिकल कॉलेज के जच्चा-बच्चा अस्पताल और जीवन हॉस्पिटल में चल रहा है। डॉ. किरन पांडेय, डॉ. कल्पना दीक्षित और डॉ. शैली अग्रवाल इसकी मास्टर ट्रेनर हैं। डॉ. भारद्वाज ने बताया कि अगर गर्भावस्था में डायबिटीज की रोगी को इलाज न दिया तो इससे आने वाली पीढ़ी प्रभावित होंगी।
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