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नवरात्रि विशेष: इन महिलाओं ने समाज की बदली सोच, जगाई नई अलख

Thu, 03 Oct 2019 03:35 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 03 Oct 2019 03:35 PM IST
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navratri special story, this woman Changed thinking of society and raised new glory
पायल शुक्ला, कृष्णा शर्मा - फोटो : अमर उजाला
नारी को ममता का रूप कहा जाता है। ममता का रूप नारी घर ही नहीं बल्कि समाज सुधारक है। नवरात्र में अमर उजाला हर दिन कुछ ऐसी समकालीन महिलाओं के बारे में बता रहा है जो नौ देवी के रूपों के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। आज हम आपको बताएंगे मां स्कंदमाता के बारे में। इसमें उन महिलाओं के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने समाज में अलख जगाई और महिलाओं को प्रेरित किया। 
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पति की मौत के बाद नहीं मानी हार, शुरू किया एनजीओ
शादी के बाद आंखों में सपने लिए ससुराल में कदम रखने वाली कानपुर के बर्रा निवासी पायल शुक्ला की खुशियों को मानो किसी की नजर लग गई। 2015 में शादी के एक साल बाद ही उनके पति और सेंट्रल एक्साइज इंस्पेक्टर अनिमेष की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। परिवार के ऊपर तो मानो वज्रपात हो गया। सदमे से उबरना किसी के लिए आसान नहीं था, लेकिन पायल ने न केवल खुद को संभाला बल्कि अपने परिवार को संभाला और पति के नाम पर एनजीओ का गठन किया। पायल कहती हैं कि घूंघट के भीतर मुंह ढंककर रोने के बजाय मैंने उनके नाम को जिंदा रखने की ठानी। उनके नाम से एनजीओ शुरू किया। उसी एनजीओ के माध्यम से गरीब बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रही हूं। साथ ही 10 बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाती हूं। इसके अलावा ब्लड डोनेशन के कैंप भी लगवाती हूं, ताकि हादसे में शिकार व्यक्ति को खून के लिए न परेशान होना पड़े। 
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समाज में दिलाती हैं दिव्यांग बच्चों को सम्मान
कानपुर के कृष्णा नगर निवासी कृष्णा शर्मा ने समाज को कुछ हटकर सोचने पर मजबूर कर दिया। बताती हैं कि शादी के कई साल बाद और काफी मन्नतों पर बेटी हुई। बेटी के जन्म के बाद ही डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची डाउन सिंड्रोम की शिकार है, यानी इसका मानसिक विकास बहुत ही धीमी गति से होगा। बच्ची को ईश्वर का आशीर्वाद मानते हुए हॉस्पिटल के बेड से ही बेटी को समाज में स्थान दिलाने की ठानी। बेटी से जुड़ाव के साथ ही मुझे शारीरिक और मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों से जुड़ाव होने लगा।

कृष्णा कहती हैं कि कड़वी सच्चाई है कि परिवार में ऐसे बच्चों को सब बोझ मानते हैं। ऐसे में इन बच्चों को मैं खुशी खुशी ट्रेंड करती हूं। शिक्षा, संगीत के अलावा स्पेशल बच्चों को स्पेशल ओलंपिक के लिए भी तैयार करती हूं। दो बच्चे स्पेशल ओलंपिक में जा चुके हैं। एयरफोर्स स्कूल में संचालित स्पेशल सेंटर, स्पास्टिक सेंटर बाल भवन, साकार सेंटर किदवई नगर, संकल्प डे केयर सेंटर में सेवाएं दी हैं। वर्तमान में एयरफोर्स स्कूल के स्पेशल सेंटर में स्पोर्ट्स टीचर हूं।
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