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Mulayam Singh: अब कौन पूछेगा पुराने साथियों का हालचाल, पहले दूसरों को खिलाते फिर खुद खाना खाते थे नेताजी

Tue, 11 Oct 2022 08:37 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 11 Oct 2022 08:37 PM IST
सार

नेताजी के निधन के बाद करीबियों में गम का माहौल दिखा। कोई उनके व्यक्तित्व की सराहना कर रहा था, तो कोई उनके स्वभाव की। हर कोई कह रहा था कि वो अपने कार्यकर्ताओं का परिवार की तरह ख्याल रखते थे। उन्होंने हर किसी को दिल में बसाया था।

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Mulayam Singh Yadav first used to feed others and then himself used to eat food
कैथावा गांव में बैठक में मौजूद नेताजी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

औरैया जिले में नेताजी के निधन के बाद हर कोई गमगीन दिखा। बिधूना तहसील क्षेत्र में 1954 से नेता जी के साथी रहे कवा के लज्जाराम शर्मा व ताजपुर के लायक सिंह सेंगर ने मुलायम सिंह यादव के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया। उन्होंने कहा कि मेरा साथी चला गया... अब कौन हमारा हाल चाल लेगा। लज्जाराम ने बताया कि नेता जी सरल स्वभाव के साथ ही बातों के धनी व्यक्ति थे।

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अपनों का हमेशा ध्यान रखते थे। ताजपुर के लायक सिंह सेंगर बताते हैं कि नेता जी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद हम लोगों से दूरी नहीं बनाई। वह सबको साथ लेकर चलते थें। किसी भी कार्यक्रम में नेता जी पहले दूसरों को खाना खिलाते थे, उसके बाद खुद खाते थे। अपने कार्यकर्ताओं का परिवार की तरह ख्याल रखते थे।
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सहकारिता मंत्री रहते हुए ताजपुर में खुलवाई थी समिति
बिधूना तहसील क्षेत्र के गांव ताजपुर निवासी लायक सिंह सेंगर ने बताया कि 1975 में नेता जी सहकारिता मंत्री बने थे। लोगों की मांग पर उन्होंने ताजपुर में साधन सहकारी समिति का उद्घाटन किया था।

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जेल से रिहा होने पर हुआ था भव्य स्वागत
बिधूना तहसील क्षेत्र के अजीतपुरवा निवासी राजेश सिंह यादव बताते हैं कि वर्ष 1982 में पूर्व विधायक रामाधार शास्त्री व पूर्व विधायक गजेंद्र सिंह ने कैथावा में बैठक की थी। बैठक में नेता जी भी पहुंचे थे। यहां उन्होंने पार्टी को मजबूत करने की हुंकार भरी थी। रामाधार के पुत्र अनिल कुमार शास्त्री ने बताया कि वर्ष 1967 में बकेवर कांड के बाद जेल से रिहा होने पर स्वर्गीय रामाधार शास्त्री, अर्जुन सिंह भदौरिया सांसद इटावा, मुलायम सिंह यादव विधायक जसवंतनगर का लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया था।

साइकिल से बिधूना आते थे नेताजी
ताजपुर निवासी लायक सिंह सेंगर बताते हैं कि मुलायम सिंह यादव 1954 में पहली बार बिधूना आए थे। उन्हें जब भी समय मिलता तो साइकिल से बिधूना आ जाते थे। वह 10 मई 1957 को सत्याग्रह आंदोलन के दौरान नेता जी के साथ जेल गए थे।

न झुकने दिया, न हौसला डिगने दिया
पूर्व विधायक प्रमोद कुमार गुप्ता के बड़े भाई व नेता जी के करीबी भगवानदास गुप्ता ने बताया कि मुलायम सिंह यादव से वर्ष 1974 में मुलाकात हुई थी। उस समय कांग्रेस की सरकार थी। 1975 में हुए जेपी आंदोलन में नेता जी के साथ कई लोग जेल गए। हम सबको कई यातनाएं दी गई, लेकिन नेता जी ने हमको न तो झुकने दिया और न ही किसी का हौसला कमजोर होने दिया।

हर किसी को दिल में बसाया
बिधूना के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय राजेंद्र सिंह यादव के पुत्र राजेश प्रताप सिंह यादव ने बताया कि मुलायम सिंह यादव जब भी बिधूना आते थे तो पिता जी से जरूर मिलते थे। वह पिता को गुरू मानते थे। बताया कि नेता जी ने हर किसी को दिल में बसाया। किसी कार्यकर्ता को कभी छोटा महसूस नहीं होने दिया।

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