आतंकी सैफुल्ला और सरताज के इर्द-गिर्द ऋषि कपूर की फिल्म ‘मुल्क’ की कहानी
- 08 मार्च 2018 को लखनऊ एनकाउंटर में मारा गया था कानपुर का सैफुल्ला
- ‘तुम बिन’, ‘दस’, ‘गुलाब गैंग’, ‘रा-वन’ फिल्मों का निर्देशन कर चुके अनुभव सिन्हा हैं ‘मुल्क’ के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर
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08 मार्च 2017 को लखनऊ एनकाउंटर में मारे गए आतंकी सैफुल्ला के पिता सरताज ने बेटे का शव लेने से मना कर दिया था और ये बात कहकर सबको चौंका दिया कि मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। देशद्रोही के साथ ऐसा ही होना चाहिए। कानपुर के जाजमऊ इलाके का रहने वाला सैफुल्ला धर्मस्थलों पर धमाका करने की साजिश रच रहा था। कानपुर के मनोहर नगर, जाजमऊ इलाके में 1995 में सैफुल्ला का जन्म हुआ था। सैफुल्ला बचपन से ही पढ़ने में तेज था। उसके पिता सरताज चमड़े का छोटा-मोटा बिजनेस करते हैं। सैफुल्ला के दो भाई खालिद और मुजाहिद हैं एक बहन बहन भी है। चार भाई बहनों में सैफुल्ला तीसरे नंबर का था।
सैफुल्ला के पिता सरताज के छह भाई हैं। जिनमें नूर अहमद, ममनून, सरताज, और मंसूर मनोहर नगर वाले घर में रहते हैं और दो बाकी दो भाई नसीम और इकबाल तिवारीपुर वाले मकान में रहते हैं। सैफुल्ला बीकॉम सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रहा था। आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के संपर्क में आने के बाद उसने अपने घर में बम बनाने के तरीके सीखे थे। आमतौर पर शांत रहने वाला सैफुल्ला कभी-कभी ऐसा बन जाता था कि जैसे वह शैतान हो। उसके मोहल्ले के दोस्तों ने बताया कि पांच साल पहले सैफुल्ला का एक लड़की को लेकर इलाके में ही विवाद हो गया था जिसके बाद उसने असलहों से हवाई फायरिंग भी की थी।
किरदार
'मुल्क' फिल्म की खास बात यह है कि इसके हर किरदार को बहुत ही खूबसूरती के गढ़ा गया है। वहीं इन किरदारों ने अपनी भूमिका को बखूबी निभाया भी है। मुस्लिम परिवार में हिंदू बहू (तापसी पन्नू) से लेकर मुस्लिम आतंकवादी की जांच करने वाले ऑफिसर दानिश जावेद (रजत कपूर) तक के हर एक किरदार को परदे पर बड़े ही शानदार तरीके के पेश किया गया है।
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सैफुल्ला के घर से पुलिस को आईएसआईएस का झंडा और बम बनाने के आइटम के साथ हिन्दुस्तान का नक्शा भी मिला है। एनकाउंटर में सैफुल्ला की मौत के बाद उसके पिता सरताज ने घटना पर अफसोस जताते हुए कहा था कि जो देश के खिलाफ हम उसके खिलाफ हैं। सरताज ने बेटे की लाश भी नहीं देखी न ही उसका अंतिम संस्कार किया था। सरताज के इस फैसले की पूरे देश और संसद तक में तारीफ हुई थी।
फिल्म की कहानी
चूंकी बॉलीवुड की ज्यादातर फिल्में भारत-पाकिस्तान विवाद या किसी दंगे पर आधारित होती हैं। लेकिन फिल्म 'मुल्क' के साथ ऐसा नहीं है। इसकी कहानी असल में एक मुस्लिम परिवार के खोये सम्मान पर आधारित है, जिसे घर के आतंकवादी बेटे (प्रतीक बब्बर) की वजह से अपने मोहल्ले और समाज में बदनाम होना पड़ता है।
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