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देशभर में लागू होगा मॉडल निकाहनामा, जानिए क्या है खास
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 28 Nov 2018 03:04 PM IST
सार
- बोर्ड और मसलकों की भी ली जाएगी राय
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विस्तार
ऑल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल और ऑल इंडिया मुस्लिम ख्वातीन बोर्ड अपने मॉडल निकाहनामे पर देवबंदी व बरेलवी मसलक के उलमा की भी राय लेगा। साथ ही मॉडल निकाहनामे की एक प्रति ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ को भेजी जा रही है। इन तीनों की राय के बाद निकाहनामे में शामिल किए गए प्रावधानों पर अंतिम मोहर लगेगी। मॉडल निकाहनामे को यूपी ही नहीं, पूरे देश में लागू किया जाएगा।
ऑल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल के जनरल सेक्रेटरी हाजी मोहम्मद सलीस ने बताया कि अभी तक जो भी निकाहनामे तैयार हुए हैं, उनमें महिलाओं का पक्ष नहीं रहा है, लेकिन काउंसिल के मॉडल निकाहनामे में कानपुर की महिला शहर काजियों के अलावा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (महिला) के जिम्मेदारों का भी पक्ष शामिल है।
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ऑल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल के जनरल सेक्रेटरी हाजी मोहम्मद सलीस ने बताया कि अभी तक जो भी निकाहनामे तैयार हुए हैं, उनमें महिलाओं का पक्ष नहीं रहा है, लेकिन काउंसिल के मॉडल निकाहनामे में कानपुर की महिला शहर काजियों के अलावा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (महिला) के जिम्मेदारों का भी पक्ष शामिल है।
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मॉडल निकाहनामे में खासतौर पर तीन तलाक को रोकने के लिए सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं। साथ ही बेटियों को पिता की संपत्ति से मिलने वाले हक तरका के संबंध में भी प्रावधान शामिल किए गए हैं। व्यवस्था दी गई है कि बेटी को शादी के वक्त ही तरका दे दिया जाए। साथ ही मेहर की धनराशि भी शादी के दिन ही दे दी जाए।
अधिकांश मुस्लिम महिलाओं को तरका नहीं मिलता। मेहर की धनराशि शादी के समय देने के बजाए तलाक के समय दी जाती है। अगर शौहर की मृत्यु हो जाती है तो महिला से कहा जाता है कि मेहर की धनराशि माफ कर दे।
अधिकांश मुस्लिम महिलाओं को तरका नहीं मिलता। मेहर की धनराशि शादी के समय देने के बजाए तलाक के समय दी जाती है। अगर शौहर की मृत्यु हो जाती है तो महिला से कहा जाता है कि मेहर की धनराशि माफ कर दे।