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मोबाइल कंपनियों पर चलेगा मुकदमा
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Fri, 24 Jun 2016 01:09 AM IST
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अदालत का फैसला
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कानपुर। छतों पर लगे मोबाइल टॉवरों से पब्लिक की जान को खतरे पर ‘अमर उजाला’ के अभियान को एडीएम फाइनेंस शत्रुघ्न सिंह की कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए मुकदमे की कार्यवाही शुरू कर दी है। मोबाइल कंपनियों के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 में लोगों को असुविधा (न्यूसंस) में मुकदमा होगा। कोर्ट ने सिटी मजिस्ट्रेट और सभी एसीएम को उनके क्षेत्रों में छतों पर लगे मोबाइल टॉवरों पर कंपनियों के खिलाफ मुकदमे चलाने को कहा है।
श्याम नगर में छत पर लगी अवैध होर्डिंग गिरने से एक युवक की मौत के बाद ‘अमर उजाला’ ने अवैध होर्डिंग, बिजली के लटकते तार और खुले गड्ढों पर अभियान चलाया है। इसको स्वत संज्ञान लेते हुए एडीएम फाइनेंस कोर्ट ने सिटी मजिस्ट्रेट और सभी सात एसीएम कोर्ट को लिखे पत्र में कहा है कि होर्डिंग गिरने से पब्लिक में गुस्सा और भय है। पब्लिक की अपेक्षा है कि छतों पर लगे मोबाइल टॉवर और होर्डिंग हटवाए जाएं। पीठासीन अधिकारी (एडीएम फाइनेंस) ने खुद शहर में घूमकर जायजा लिया तो खुलासा हुआ कि टॉवर पतले पिलर पर खड़े हैं। जंग लगे, जर्जर पोल पर इनको टांगा गया है। आंधी, तूफान में ये गिरकर जनहानि कर सकते हैं। इसलिए लोगों की जान बचाने के लिए मोबाइल कंपनियों के खिलाफ धारा 133 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत विधि सम्मत कार्यवाही की जाए। मोबाइल टॉवरों को जमीन पर शिफ्ट कराया जाए।
क्या है धारा 133
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 में कहा गया है कि सांस लेने, आवागमन में दिक्कत और शारीरिक बाधा पर सिटी मजिस्ट्रेट या एसीएम के यहां मुकदमा दाखिल किया जा सकता है। धारा 268 में जन साधारण की दिक्कत के लिए छह माह की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
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श्याम नगर में छत पर लगी अवैध होर्डिंग गिरने से एक युवक की मौत के बाद ‘अमर उजाला’ ने अवैध होर्डिंग, बिजली के लटकते तार और खुले गड्ढों पर अभियान चलाया है। इसको स्वत संज्ञान लेते हुए एडीएम फाइनेंस कोर्ट ने सिटी मजिस्ट्रेट और सभी सात एसीएम कोर्ट को लिखे पत्र में कहा है कि होर्डिंग गिरने से पब्लिक में गुस्सा और भय है। पब्लिक की अपेक्षा है कि छतों पर लगे मोबाइल टॉवर और होर्डिंग हटवाए जाएं। पीठासीन अधिकारी (एडीएम फाइनेंस) ने खुद शहर में घूमकर जायजा लिया तो खुलासा हुआ कि टॉवर पतले पिलर पर खड़े हैं। जंग लगे, जर्जर पोल पर इनको टांगा गया है। आंधी, तूफान में ये गिरकर जनहानि कर सकते हैं। इसलिए लोगों की जान बचाने के लिए मोबाइल कंपनियों के खिलाफ धारा 133 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत विधि सम्मत कार्यवाही की जाए। मोबाइल टॉवरों को जमीन पर शिफ्ट कराया जाए।
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क्या है धारा 133
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 में कहा गया है कि सांस लेने, आवागमन में दिक्कत और शारीरिक बाधा पर सिटी मजिस्ट्रेट या एसीएम के यहां मुकदमा दाखिल किया जा सकता है। धारा 268 में जन साधारण की दिक्कत के लिए छह माह की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
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