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आपबीतीः 'मैं डरी नहीं, पूरे स्टाफ के सामने रख दी रेकॉर्डिंग'
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 05 May 2018 12:02 AM IST
सार
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विस्तार
'बात 2015 की है। एक बड़े इंस्टीट्यूट से एमबीए करने के बाद मैंने एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करनी शुरू कर दिया। कई क्लाइंट ऐसे थे, जिनको मैनेजमेंट की पॉलिसी समझाने के लिए कई मीटिंग करनी पड़ती थी। ऐसे ही एक क्लाइंट से मैं भी डील करती थी। शुरुआत में तो सब ठीक था लेकिन धीरे-धीरे वह जरूरत से ज्यादा अपनापन दिखाने लगा। आधी रात में भी फोन कर परेशान करने लगा। कई बार मना करने के बावजूद भी बाज नहीं आया। मेरी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी, ऐसा कहकर डराने लगा। यही नहीं ई-मेल पर भी वह उल्टा सीधा लिखकर भेजता था। इस बात की शिकायत मैंने अपने बॉस से की तो उन्होंने गंभीरता नहीं दिखाई। जब पानी सिर से ऊपर चला गया तो सालाना मीटिंग में मैंने फर्म के डायरेक्टर और पूरे स्टाफ के सामने सारी रेकॉर्डिंग और ई-मेल सार्वजनिक कर दिए। वह क्लाइंट भी इस मीटिंग में था। पहले तो वह इन सारे आरोपों को नकारने लगा लेकिन जब मैंने कोर्ट केस करने की धमकी दी तो वो डर गया और माफी मांगने लगा। मुझे डर था कि इस वाकये के बाद मुझे ऑफिस से निकाल दिया जाएगा, लेकिन मेरे फर्म के बॉस ने मुझको मेरी हिम्मत के लिए पुरस्कृत किया।'
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