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बांदा: विधान परिषद पहुंचा मेडिकल कॉलेज की मान्यता का मुद्दा, इसलिए नहीं मिली मान्यता

Mon, 24 Feb 2020 07:39 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 24 Feb 2020 07:39 PM IST
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medical college recognition issue reached Legislative council
बांदा मेडिकल कॉलेज का ओपीडी भवन - फोटो : अमर उजाला
चित्रकूटधाम मंडल के एकमात्र बांदा राजकीय मेडिकल कॉलेज को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) द्वारा वर्ष 2019-20 सत्र की मान्यता न दिए जाने का मुद्दा विधान परिषद में भी गूंज उठा। प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा कि मानक पूरा न होने पर एमसीआई ने मान्यता नहीं दी है। इसी कारण यहां एमबीबीएस की सीटों में वृद्धि भी नहीं की गई है।
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कई अरब की लागत से बसपा सरकार में मेडिकल कालेज का भव्य भवन बना था। वर्ष 2016 में इसमें एमबीबीएस में 100 सीटों के साथ कक्षाओं की शुरुआत हुई। एमसीआई की टीम ने यहां निरीक्षण कर कुछ कमियां और खामियां पाई थीं। उन्हें दूर करने के लिए कुछ दिन की मोहलत देते हुए सशर्त मान्यता दी थी।
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इन कमियों में मानक के मुताबिक डॉक्टरों का न होना, प्रोफेसर आदि स्टाफ की कमी भी शामिल थी। ओपीडी में मरीज मानक के मुताबिक नहीं थे। एमसीआई की हिदायत के बाद भी प्रदेश सरकार और मेडिकल कालेज प्रशासन ने यह कमियां और शर्तें पूरी नहीं कीं। 

वर्ष 2016-17 से वर्ष 2018-19 तक एमबीबीएस कक्षाओं के तीन सत्र पूरे हो चुके हैं। चौथे सत्र 2019-20 की मान्यता खटाई में पड़ गई। मानक पूरे न होने पर एमसीआई ने मान्यता नहीं दी। जनप्रतिनिधियों ने भी इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर कुछ खास दिलचस्पी नहीं दर्शाई। मान्यता न मिलने से वर्ष 2019-20 का एमबीबीएस सत्र नहीं चल सका। 

उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मौजूदा सत्र में विधान परिषद सदस्य और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने लिखित प्रश्न के जरिये मंत्री से पूछा था कि मेडिकल कालेज में पिछले तीन सत्रों में कितनी सीटें थीं? चालू वित्तीय वर्ष में सीटें बढ़ाई गई हैं या नहीं?

इस पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने उनको विधान परिषद में लिखित जवाब में कहा कि सत्र 2017-18 और 2018-19 में एमबीबीएस की 100-100 सीटें थीं। वर्ष 2019-20 में 100 सीटों के लिए प्रवेश के मानक पूरे न होने पर एमसीआई ने अनुमति नहीं दी। यह भी कहा है कि मानक पूरे न होने से एमबीबीएस की सीटों में वृद्धि की कार्रवाई भी नहीं की गई। 
 
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मानक के मुताबिक न पद, न उपकरण
मेडिकल कॉलेज अपने मानक और उपलब्ध संसाधनों के मुताबिक भी नहीं चल पा रहा। यहां डाक्टरों और स्टाफ का टोटा है। रेडियोलॉजी विभाग के सभी पांच पद खाली पड़े हैं। नतीजतन अल्ट्रासाउंड मशीन शोपीस बनी रखी है। डिजिटल एक्स-रे की तीन मशीनों में मात्र एक चल रही है। लगभग सभी विभागों में आचार्य, सहायक आचार्य आदि के पद खाली हैं।

स्थिति जस की तस, नहीं हुए मानक पूरे
 मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य डा.मुकेश यादव का कहना है कि मान्यता के बारे में फिलहाल स्थिति लगभग जस की तस है। एमसीआई ने जो मानक और शर्तें बताई हैं वो अभी भी पूरी नहीं हो पाई हैं। कई पद अभी भी खाली हैं। उन्होंने कहा कि यह शासन स्तर से होना है। उम्मीद जताई कि मार्च माह में एमसीआई टीम यहां मेडिकल कालेज का एक बार फिर निरीक्षण कर सकती है। आईपीडी में भर्ती मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। सीटी स्कैन और एमआरआई उपकरण अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया। 
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