UP: बेहद खास है ये शिव प्रतिमा, बलखंडेश्वर मंदिर में स्थापित है तांडव नृत्य करती मृर्ति, पढ़िए पूरी कहानी
Mahoba News: गुरु गोरखनाथ की तपोस्थली ऐतिहासिक गोरखगिरि पहाड़ के नीचे स्थापित तांडव नृत्य करती शिव प्रतिमा उत्तर भारत में अपनी किस्म की अनोखी प्रतिमा है। तांडव नृत्य करती शिव प्रतिमा का निर्माण दसवीं से 11वीं शताब्दी के बीच चंदेल शासक ने कराया था।
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महोबा जिले में महाशिवरात्रि पर्व पर भोर से ही शिव मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए भक्तों की कतारें लगी रहीं। शहर के प्राचीन बलखंडेश्वर मंदिर में भोर पांच बजे से ही भक्त पहुंचे। पहाड़ पर स्थापित मंदिर में 50 सीढि़यां चढ़कर भक्त पहुंचे। यहां भगवान भोलेनाथ का जल-दूध-शहद से अभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा आदि चढ़ाया।
दोपहर बाद तक भगवान के दर्शन के लिए भक्तों के आने-जाने का सिलसिला चलता रहा। बता दें कि सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर की मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद भगवान भोलेनाथ पूरी करते हैं। वहीं, प्राचीन शिवतांडव मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
अनोखी है तांडव नृत्य करती शिव प्रतिमा
गुरु गोरखनाथ की तपोस्थली ऐतिहासिक गोरखगिरि पहाड़ के नीचे स्थापित तांडव नृत्य करती शिव प्रतिमा उत्तर भारत में अपनी किस्म की अनोखी प्रतिमा है। तांडव नृत्य करती शिव प्रतिमा का निर्माण दसवीं से 11वीं शताब्दी के बीच चंदेल शासक ने कराया था।
15 फीट ऊंची है मूर्ति, रात में दूधिया रोशनी ने जगमगाता है मंदिर
ग्रेनाइट शिला पर दस भुजीय तांडव नृत्य करती प्रतिमा सहज ही भक्तों को आकर्षित करती है। प्रतिमा की ऊंचाई 15 फीट है। बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर बताते हैं कि इसका वर्णन कर्म पुराण में भी मिलता है। ऐसी ही प्रतिमा दक्षिण के ऐलोरा, हेलबिका व दारापुरम में भी है। पर्यटन को लेकर मंदिर में काम चल रहा है। आकर्षण लाइटिंग और बड़ी मरकरी लगाए जाने से रात में मंदिर दूधिया रोशनी से जगमगाता है।