फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Mahashivratri, This Shiva statue is very special, Tandava dance idol is installed in Balkhandeshwar temple

UP: बेहद खास है ये शिव प्रतिमा, बलखंडेश्वर मंदिर में स्थापित है तांडव नृत्य करती मृर्ति, पढ़िए पूरी कहानी

Fri, 08 Mar 2024 12:20 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 08 Mar 2024 12:20 PM IST
सार

Mahoba News: गुरु गोरखनाथ की तपोस्थली ऐतिहासिक गोरखगिरि पहाड़ के नीचे स्थापित तांडव नृत्य करती शिव प्रतिमा उत्तर भारत में अपनी किस्म की अनोखी प्रतिमा है। तांडव नृत्य करती शिव प्रतिमा का निर्माण दसवीं से 11वीं शताब्दी के बीच चंदेल शासक ने कराया था।

विज्ञापन
Mahashivratri, This Shiva statue is very special, Tandava dance idol is installed in Balkhandeshwar temple
बलखंडेश्वर मंदिर महोबा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महोबा जिले में महाशिवरात्रि पर्व पर भोर से ही शिव मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए भक्तों की कतारें लगी रहीं। शहर के प्राचीन बलखंडेश्वर मंदिर में भोर पांच बजे से ही भक्त पहुंचे। पहाड़ पर स्थापित मंदिर में 50 सीढि़यां चढ़कर भक्त पहुंचे। यहां भगवान भोलेनाथ का जल-दूध-शहद से अभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा आदि चढ़ाया।

विज्ञापन

दोपहर बाद तक भगवान के दर्शन के लिए भक्तों के आने-जाने का सिलसिला चलता रहा। बता दें कि सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर की मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद भगवान भोलेनाथ पूरी करते हैं। वहीं, प्राचीन शिवतांडव मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।

विज्ञापन

अनोखी है तांडव नृत्य करती शिव प्रतिमा
गुरु गोरखनाथ की तपोस्थली ऐतिहासिक गोरखगिरि पहाड़ के नीचे स्थापित तांडव नृत्य करती शिव प्रतिमा उत्तर भारत में अपनी किस्म की अनोखी प्रतिमा है। तांडव नृत्य करती शिव प्रतिमा का निर्माण दसवीं से 11वीं शताब्दी के बीच चंदेल शासक ने कराया था।

15 फीट ऊंची है मूर्ति, रात में दूधिया रोशनी ने जगमगाता है मंदिर
ग्रेनाइट शिला पर दस भुजीय तांडव नृत्य करती प्रतिमा सहज ही भक्तों को आकर्षित करती है। प्रतिमा की ऊंचाई 15 फीट है। बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर बताते हैं कि इसका वर्णन कर्म पुराण में भी मिलता है। ऐसी ही प्रतिमा दक्षिण के ऐलोरा, हेलबिका व दारापुरम में भी है। पर्यटन को लेकर मंदिर में काम चल रहा है। आकर्षण लाइटिंग और बड़ी मरकरी लगाए जाने से रात में मंदिर दूधिया रोशनी से जगमगाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed