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लोकसभा चुनाव 2019: बुंदेलखंड के समर में स्थानीय मुद्दे गुम

Wed, 01 May 2019 05:16 AM IST
देव कश्यप रशीद सिद्दीकी, अमर उजाला, बांदा
रशीद सिद्दीकी, अमर उजाला, बांदा Published by: देव कश्यप Updated Wed, 01 May 2019 05:16 AM IST
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Lok Sabha Elections 2019: Local issues missing in election of Bundelkhand
आरके सिंह पटेल (भाजपा), बाल कुमार पटेल (कांग्रेस) और श्यामाचरण गुप्त (गठबंधन) - फोटो : अमर उजाला

वर्ष 1952 से 1962 तक तीनों चुनाव कांग्रेस के नाम रहे। वहीं, 1967 में लाल परचम यानी कम्युनिस्ट पार्टी ने दस्तक दी। उसके अगले दो चुनावों में जनसंघ और जनता पार्टी को मौका मिला। लेकिन 1980 व 84 के चुनाव में फिर कांग्रेस की वापसी हुई। इस सीट पर हमेशा पिछड़ों और ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका ज्यादा रही। अस्तित्व में आने के बाद बसपा ने भी परचम लहराया और 1999 में उसे लोकसभा में सफलता मिली। मौजूदा चुनाव में भाजपा, सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच त्रिकोणात्मक मुकाबले की स्थितियां हैं।

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भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद भैरौं प्रसाद मिश्र का टिकट काट कर मानिकपुर से अपनी ही पार्टी के विधायक आरके सिंह पटेल पर भरोसा जताया है। प्रयागराज के भाजपा सांसद श्यामाचरण गुप्त टिकट कटने पर सपा में आए और गठबंधन ने उन्हें यहां से प्रत्याशी घोषित कर दिया है।  कांग्रेस ने सपा के नेता और मिर्जापुर से सपा के सांसद रह चुके बाल कुमार पटेल को टिकट दिया है। सपा से टिकट न मिलने पर उन्होंने कांग्रेस का परचम थाम लिया था। पिछले 2014 के लोकसभा चुनाव में बांदा-चित्रकूट समेत बुंदेलखंड की सभी चारों सीटें भाजपा की झोली में गई थीं। इस चुनाव में स्थानीय के बजाय राष्ट्रीय मुद्दों पर ही बात हाे रही है।
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ब्राह्मण प्रत्याशी के बिना पहला चुनाव
मौजूदा लोकसभा चुनाव पिछले चुनावों से इसलिए भी कुछ अलग है कि पहली बार कोई ब्राह्मण प्रत्याशी नहीं है। किसी भी प्रमुख दल ने ब्राह्मण वर्ग से प्रत्याशी नहीं उतारा। उधर, निर्दलीय अन्य छोटे दलों से नामांकन करने वाले आधा दर्जन से ज्यादा ब्राह्मण आवेदकों के नामांकन पत्र विभिन्न खामियों और कमियों के चलते निरस्त हो गए। इस सीट पर अब कुल 8 प्रत्याशी हैं। इनमें कोई ब्राह्मण नहीं है।
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मुस्लिम वोटर खामोश: बुंदेलखंड की चारों सीटों पर मुस्लिम मतदाता 10 फीसदी के अंदर ही हैं। बांदा-चित्रकूट में भी यही स्थिति है। फिलहाल मुस्लिम मतदाता ऐसे प्रत्याशी पर नजर गड़ा रहे हैं, जो भाजपा प्रत्याशी को शिकस्त दे सके। सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस दोनों ही मुस्लिम मतदाताओं पर डोरे डाल रही हैं। ऐसे में कुछ न कुछ मुस्लिम वोट बंटना तय है। अनुभवी व बुजुर्ग बाबा फरीद का कहना है कि मुस्लिम वोटर फिलहाल एकतरफा राय नहीं बना सके हैं।

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