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लॉकडाउन: मुंबई से 18 दिन में पैदल महोबा आए 40 श्रमिकों को लौटाया, बॉर्डर पर खाना खिला एमपी भेजा
Thu, 30 Apr 2020 09:13 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 30 Apr 2020 09:13 PM IST
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मुंबई से 18 दिन में पैदल महोबा आए 40 श्रमिकों को लौटाया
- फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश के महोबा में मुंबई से लौटकर यूपी सीमा में प्रवेश कर रहे 40 मजदूरों को पुलिस ने एमपी सीमा की ओर वापस भेज दिया। दूसरे लॉकडाउन के बाद रोजी-रोटी का जुगाड़ नहीं होने पर 40 श्रमिकों के दो जत्थे 300 किमी पैदल और 800 किलोमीटर ट्रक से यात्रा कर यूपी-एमपी के बॉर्डर पर पहुंचे, जहां पुलिस ने भोजन खिलाने के बाद एमपी की ओर लौटा दिया।
श्रमिक किसी तरह खेतों के जरिए जिले की सीमा में घुसकर अपने गंतव्य को रवाना हुए। लॉकडाउन के चलते मुंबई, नवी मुंबई, नागपुर से आए दिनेश, पंकज व नियाज ने बताया कि 300 किमी पैदल चलने के बाद पैरों में छाले पड़ गए। इसके बाद ट्रक और कंटेनर से मध्यप्रदेश के छतरपुर तक 800 किमी का सफर तय किया।
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श्रमिक किसी तरह खेतों के जरिए जिले की सीमा में घुसकर अपने गंतव्य को रवाना हुए। लॉकडाउन के चलते मुंबई, नवी मुंबई, नागपुर से आए दिनेश, पंकज व नियाज ने बताया कि 300 किमी पैदल चलने के बाद पैरों में छाले पड़ गए। इसके बाद ट्रक और कंटेनर से मध्यप्रदेश के छतरपुर तक 800 किमी का सफर तय किया।
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छतरपुर से गोंडा व बस्ती जाने के लिए महोबा की तरफ पैदल चल दिए। एमपी बॉर्डर पार करके महोबा जिले की सीमा में आने पर यूपी पुलिस ने उन्हें खाना खिलाकर पुन: एमपी की तरफ लौटा दिया। परेशान श्रमिकों ने खेतों के रास्ते से यूपी की सीमा में घुसकर गोंडा व बस्ती की तरफ अपनी यात्रा शुरू की।
श्रमिकों का कहना था कि तीन दिन तक भूखे रहकर पैदल यात्रा की। इसके बाद एक गांव में कुछ लोगों ने भोजन कराया। लगातार पैदल चल रहे श्रमिकों के पैरों ने काम करना बंद कर दिया है। अब वे पुलिस से भी बचकर घरों की तरफ जा रहे हैं। उधर, पुलिस अधीक्षक मणिलाल पाटीदार का कहना है कि शासन के निर्देश पर सीमाएं सील कर दी गई हैं इसलिए किसी भी श्रमिक को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।
एमपी के लिए पैदल चल दिए 16 श्रमिक
पश्चिम बंगाल में काम न मिलने पर 16 श्रमिक पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के शहडोल जनपद जाने के लिए पैदल और ट्रकों से चलकर महोबा तक आए गए। अब वे जिले से सटे मध्यप्रदेश के लिए पैदल निकल लिए। भूखे होने पर शहर में कई लोगों ने चाय, नाश्ता और नमकीन खिलाकर रवाना किया। परेशान श्रमिकों की आंखों से आंसू छलक पड़े।
श्रमिकों का कहना था कि तीन दिन तक भूखे रहकर पैदल यात्रा की। इसके बाद एक गांव में कुछ लोगों ने भोजन कराया। लगातार पैदल चल रहे श्रमिकों के पैरों ने काम करना बंद कर दिया है। अब वे पुलिस से भी बचकर घरों की तरफ जा रहे हैं। उधर, पुलिस अधीक्षक मणिलाल पाटीदार का कहना है कि शासन के निर्देश पर सीमाएं सील कर दी गई हैं इसलिए किसी भी श्रमिक को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।
एमपी के लिए पैदल चल दिए 16 श्रमिक
पश्चिम बंगाल में काम न मिलने पर 16 श्रमिक पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के शहडोल जनपद जाने के लिए पैदल और ट्रकों से चलकर महोबा तक आए गए। अब वे जिले से सटे मध्यप्रदेश के लिए पैदल निकल लिए। भूखे होने पर शहर में कई लोगों ने चाय, नाश्ता और नमकीन खिलाकर रवाना किया। परेशान श्रमिकों की आंखों से आंसू छलक पड़े।