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एलएमएल पर संकट के बादल
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Sun, 13 Sep 2015 02:30 AM IST
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लोहिया मशीनरी लिमिटेड (एलएमएल) की फोर स्ट्रोक स्कूटर बनाने वाली फैक्ट्री पर संकट के बादल छा गए हैं। घाटे के कारण फैक्ट्री में एक महीने के ले-आफ का नोटिस चस्पा किया गया है। ले-आफ का कारण आर्डर न मिलने से उत्पादन प्रभावित होना बताया गया है। फैक्ट्री में करीब 1200 श्रमिक-कर्मचारी काम करते हैं।
एलएमएल के ज्वांइट डायरेक्टर आरके श्रीवास्तव की ओर से 8 सितंबर को जारी और 9 सितंबर को फैक्ट्री के बाहर चस्पा नोटिस में कहा गया है कि फैक्ट्री का उत्पादन कम हो गया है। फैक्ट्री में उत्पादन विदेश से मिलने वाले आर्डरों पर ही निर्भर है। बीते महीनों से आर्डर मिलना कम होता जा रहा है। आर्डर न मिलने के कारण ही फैक्ट्री में ले-आफ करना पड़ रहा है।
सूत्रों ने बताया कि 8 साल पहले 14 मई 2007 को भी ले-आफ लिया गया था। इसके बाद फैक्ट्री ने सिक यूनिट (बीमार) बताकर बाइफर में मामला दाखिल कर दिया। यह मामला अभी भी चल रहा है। फै क्ट्री ने बैंकों और सरकार से मदद भी मांगी थी। फैक्ट्री के जीएम केपी त्रिपाठी का कहना है कि इस समय वे शहर से बाहर हैं। उन्हें कोई जानकारी नही है।
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वहीं हिंद मजदूर सभा के महामंत्री असित कुमार सिंह का कहना है कि फैक्ट्री शहर का गौरव है। इसे चलाने की जरूरत है। श्रमिक हितों की रक्षा की जाएगी। ले-आफ एक महीने का है। इसके बाद ही कोई रणनीति तय की जाएगी। बता दें कि एलएमएल की स्थापना 1982 में की गई थी। इसका विधिवत उद्घाटन 1985 में हुआ था। फैक्ट्री फोर स्ट्रोक स्कूटर एलएमएल वेस्पा के नाम से बनाती थी। अब फैक्ट्री में बने स्कूटर इजिप्ट को निर्यात किएजाते हैं।
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एलएमएल के ज्वांइट डायरेक्टर आरके श्रीवास्तव की ओर से 8 सितंबर को जारी और 9 सितंबर को फैक्ट्री के बाहर चस्पा नोटिस में कहा गया है कि फैक्ट्री का उत्पादन कम हो गया है। फैक्ट्री में उत्पादन विदेश से मिलने वाले आर्डरों पर ही निर्भर है। बीते महीनों से आर्डर मिलना कम होता जा रहा है। आर्डर न मिलने के कारण ही फैक्ट्री में ले-आफ करना पड़ रहा है।
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सूत्रों ने बताया कि 8 साल पहले 14 मई 2007 को भी ले-आफ लिया गया था। इसके बाद फैक्ट्री ने सिक यूनिट (बीमार) बताकर बाइफर में मामला दाखिल कर दिया। यह मामला अभी भी चल रहा है। फै क्ट्री ने बैंकों और सरकार से मदद भी मांगी थी। फैक्ट्री के जीएम केपी त्रिपाठी का कहना है कि इस समय वे शहर से बाहर हैं। उन्हें कोई जानकारी नही है।
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वहीं हिंद मजदूर सभा के महामंत्री असित कुमार सिंह का कहना है कि फैक्ट्री शहर का गौरव है। इसे चलाने की जरूरत है। श्रमिक हितों की रक्षा की जाएगी। ले-आफ एक महीने का है। इसके बाद ही कोई रणनीति तय की जाएगी। बता दें कि एलएमएल की स्थापना 1982 में की गई थी। इसका विधिवत उद्घाटन 1985 में हुआ था। फैक्ट्री फोर स्ट्रोक स्कूटर एलएमएल वेस्पा के नाम से बनाती थी। अब फैक्ट्री में बने स्कूटर इजिप्ट को निर्यात किएजाते हैं।