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Banda: बंदरों के आतंक से जोखिम में जान, छह माह में कई हो चुके हैं घायल, फिर भी अधिकारी झाड़ रहे पल्ला

Wed, 04 Jan 2023 10:41 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 04 Jan 2023 10:41 AM IST
सार

तिंदवारी थाना क्षेत्र के छापर गांव में बच्चे को पालने से बंदर उठा ले गया था। इसमें खपरैल से गिरकर मासूम की मौत हो गई थी। इस घटना से ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि विभाग के अधिकारी सिर्फ पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि छह महीनों में बंदरों का आंतक बहुत बढ़ गया है।

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Lives in danger due to the terror of monkeys in Banda, many have been injured in six months
छत पर बैठे बंदर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बांदा जनपद में बंदरों को आंतक दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। इनसे कई गांवों के लोग आतंकित हैं। मासूम के अलावा एक और महिला की जान भी जा चुकी है। इसके अलावा कई लोग इन बंदरों के हमले में घायल भी हो चुके हैं। इसके बाद भी वन विभाग के अफसरों ने सिर्फ एक्ट संशोधन में बदलाव की बात कही है।

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अधिकारी इनके आतंक से रोकथाम करने की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि शहर के कई मोहल्लों में भी आतंक है। बताया जा रहा है कि छापर गांव में बंदरों का जो झुंड पहुंचा है। वह पहले जौहरपुर के मजरा चंदौखी डेरा के करीब 50 घरों को तहसनहस करके पहुंचा है।
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एक्ट संशोधन में बंदरों को वन्यजीव श्रेणी से बाहर किया
प्रभागीय वनाधिकारी संजय अग्रवाल ने बताया कि देर शाम उन्हें घटना की जानकारी हुई है। उन्होंने तुरंत वन विभाग की टीम को घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया है। रिपोर्ट मिलने पर अगली कार्रवाई करेंगे। बंदरों को पकड़वाकर जंगल में छुड़वाने का प्रयास करेंगे।

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डीएफओ ने बताया कि हाल ही में एक्ट संशोधन में बंदरों को वन्य जीव श्रेणी से बाहर कर दिया है। गाय, कुत्ते भी वन्य जीव श्रेणी में नहीं आते। इसलिए विभाग जिम्मेदार नहीं होता। लेकिन मानवीय संवेदना के तहत वह कार्रवाई कराएंगे। डीएफओ के मुताबिक यहां ज्यादातर रिसार्स मैकॉक प्रजाति के बंदर पाए जाते हैं।

छह माह में कई हो चुके घायल
तिंदवारी। पिपरगवां गांव में भी बंदरों का आतंक है। करीब छह माह में लगभग दर्जनभर लोग बंदरों के हमले में घायल हो चुके हैं। बंदरों के काटने पर तमाम ग्रामीणों को पीएचसी और जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाना पड़ी। अभी भी बंदरों का आतंक है। ग्रामीण लगातार इन्हें पकड़वाने के लिए उच्चाधिकारियों से मांग कर रहे हैं।

बंदरों के हमले में महिला की भी गिरने से हो चुकी है मौत
तिंदवारी।  ब्लॉक के छापर गांव में ही दो माह पूर्व भी 65 वर्षीय तेजनिया बंदरों के खदेडने गई थी। इस दौरान बंदरों ने उस पर हमला कर दिया था। बंदरों से बचने के लिए भागने समय वह छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई थी। परिजन उसे अस्पताल लाने की तैयारी कर रहे थे। तब तक उसने दम तोड़ दिया था।

घटना पर ग्रामीणों में रोष
ग्राम प्रधान समेत परिजनों और ग्रामीणों ने घटना पर रोष जताया है। उन्होंने कहा कि कई माह से गांव में बंदरों का आतंक है। इनके भय के चलते बच्चे छत पर नहीं जा पाते। कई ग्रामीणों को खदेड़कर काट चुके हैं। छापर गांव के अलावा माटा, जसईपुर, भिड़ौरा आदि गांवों में भी बंदरों का आतंक है।

बंदरों से परेशान उक्त गांवों के ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। बंदरों को पकड़कर जंगल में छुड़वा दिया जाता, तो शायद मासूम की जान बच जाती। इसके बाद भी अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

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