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Kanpur News: बंदरों के आतंक से जा रहीं जानें
Sun, 02 Aug 2026 01:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sun, 02 Aug 2026 01:36 AM IST
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कानपुर देहात। बंदरों के बढ़ते आतंक ने आमजन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। एक सप्ताह में हमलावर बंदरों की वजह से युवती व महिला की जान जा चुकी है। वहीं, हर दिन बच्चों समेत तमाम लोग बंदर काटने के बाद एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं। जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानकर भी अंजान बने हुए हैं। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
जनपद में कुल 13 नगर निकाय हैं। अकबरपुर, सिकंदरा, रूरा, झींझक व राजपुर समेत अन्य नगर निकायों व कस्बों में बंदरों के झुंड आफत मचाए हैं। हालात ये हैं कि छतों पर बंदरों का झुंड डेरा डाले रहता है तो लोग खुले में आराम करने या फिर अन्य गतिविधि नहीं कर पा रहे हैं। बंदर बाजारों में खरीदारी करने आए लोगों के हाथ से सामान छीन ले रहे हैं। घरों में घुस कर तोड़फोड़ कर आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।
नगरीय क्षेत्र में बंदरों के डर की वजह से लोगों ने रात में छत में सोना लगभग बंद कर दिया है। मेडिकल कॉलेज के अलावा सीएचसी व पीएचसी में हर दिन 30 से 40 लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। एक सप्ताह में युवती समेत दो लोग बंदर के हमलों में जान गंवा चुके हैं लेकिन नगर पंचायत प्रशासन व संबंधित ग्राम सचिव स्तर से बंदरों को पकड़वाने की सुध नहीं ली गई।
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शासनादेश बना पर ठंडे बस्ते में कार्ययोजना
प्रदेश सरकार ने दो अप्रैल 2026 को मानव-बंदर संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए एक अंतरिम आदेश जारी कर कार्ययोजना बनाने की जरूरत बताई। इसमें नगर निकायों (नगर पालिका, नगर पंचायत) को एक महीने में बंदरों के लिए स्थान चिह्नित कर कपि वन बनाने की बात कही गई। हेल्पलाइन नंबर जारी कर बंदरों को पकड़वाने के निर्देश दिए गए। हालांकि तीन महीने बीतने के बाद भी कपि वन के लिए जगह तक तय नहीं हो सकी है। किसी निकाय ने बंदर पकड़ने का अभियान चलाने की जरूरत नहीं समझी है।
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नियम स्पष्ट, जिम्मेदारी से कतरा रहे अफसर
शासन की ओर से जारी निर्देश में साफ कहा गया है कि बंदरों की प्रजाति रीसस मैकाक वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची में शामिल संरक्षित प्रजातियों में नहीं है। इसलिए बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। बंदर पकड़ने की जिम्मेदारी निकायों व ग्राम पंचायतों की है। अब निर्देश के बाद भी जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और लोग जान गंवा रहे हैं। निगरानी समिति में जिलाधिकारी अध्यक्ष हैं। सदस्यों में नामित प्रतिनिधि, प्रभागीय वनाधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला पंचायतराज अधिकारी, खंड विकास अधिकारी और जिलाधिकारी द्वारा नामित वन्यजीव विशेषज्ञ, एनजीओ, सदस्य-सचिव नगर पंचायत के ईओ शामिल हैं।
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सिकंदरा व राजपुर में 1771 ने लगवाया एंटी रेबीज इंजेक्शन
बीते तीन माह का औसत देखें तो जनपद में करीब तीन हजार से अधिक एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए गए हैं। इसमें सिकंदरा व राजपुर के सरकारी अस्पतालों में कुत्तों व बंदरों के हमले के शिकार 1771 लोगों ने एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाए हैं। सिकंदरा सीएचसी में 1299 व राजपुर पीएचसी में 472 लोग एंटी रेबीज लगवाने पहुंचे। चिकित्सकों का कहना है कि कुत्ते व बंदर के काटने पर घाव को तुरंत बहते पानी और साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचकर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने चाहिए।
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केस एक।
सरवनखेड़ा में 31 जुलाई की सुबह सरला (47) घर की दूसरी मंजिल पर बर्तन धुल रही थीं। तीसरी मंजिल पर बंदरों की उछलकूद से वहां बनी ईंटों की रेलिंग ढह कर सरला पर गिर गई। परिजन उन्हें घायलावस्था में कानपुर लेकर आए। यहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
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केस दो।
सिकंदरा के शास्त्री नगर में 25 जुलाई को 28 वर्षीय शबाना छत पर थीं। तभी बंदरों ने उनपर हमला कर दिया। वह खुद को बचाने के लिए भागने लगीं। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वह छत से नीचे आ गिर गईं। इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई।
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केस तीन।
राजपुर के कन्हैया नगर में घर के आंगन में 7 जून को खेल रही नईम सिद्दीकी की आठ वर्षीय बेटी रम्शा को बंदरों ने हमला कर जख्मी कर दी। एक बंदर ने उसके हाथ का मांस नोच लिया। उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं आठ जून को बंदरों ने राजपुर पीएचसी में औषधि कक्ष में तोड़फोड़ की। कीमती दवाइयां व जीवनरक्षक इंजेक्शन टूट दिए। इसी तरह 17 जुलाई को कन्हैया नगर में बंदरों ने शमसाद (35) को हमला कर जख्मी कर दिया।
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मासूम पर बंदरों ने किया हमला, छत से गिरकर घायल
सिकंदरा। कस्बा के मोहल्ला आजाद नगर में शनिवार की शाम छह बजे को छत पर खेल रही छह वर्षीय बच्ची को बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया। अपने बचाव के दौरान छत से नीचे गिर कर गंभीर रूप से घायल हो गई। आजाद नगर निवासी इरशाद ने बताया कि पुत्री इरम (6) घर की छत पर खेलते समय बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया। वह शोर मचाते हुए भागी, इसी बीच संतुलन बिगड़ने से वह छत से नीचे आ गिरी। गंभीर रूप से घायल होने पर उसे सीएचसी लेकर आए। यहां से चिकित्सक ने उसे मेडिकल कॉलेज अकबरपुर रेफर कर दिया। जहां उसकी हालत गंंभीर बनी हुई है। (संवाद)
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बयान-
नगर में उत्पाद मचाए बंदरों को पकड़वाने के लिए मथुरा की प्रशिक्षित टीम से संपर्क किया गया है। जल्द ही टीम के जरिये बंदरों को पकड़वाकर जंगल में छुड़वाया जाएगा। - वीरेंद्र राव, ईओ नगर पंचायत सिकंदरा
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बंदर धार्मिक आस्था से जुड़े हैं। इन्हें पकड़वाने के बाद छोड़ा कहां जाएगा यह भी सोचना जरूरी है। नगरीय क्षेत्र में बंदरों को पकड़वाने के संबंध में नियम की जानकारी कराकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। - अमित कुमार, एडीएम प्रशासन/प्रभारी अधिकारी नगर निकाय
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जनपद में कुल 13 नगर निकाय हैं। अकबरपुर, सिकंदरा, रूरा, झींझक व राजपुर समेत अन्य नगर निकायों व कस्बों में बंदरों के झुंड आफत मचाए हैं। हालात ये हैं कि छतों पर बंदरों का झुंड डेरा डाले रहता है तो लोग खुले में आराम करने या फिर अन्य गतिविधि नहीं कर पा रहे हैं। बंदर बाजारों में खरीदारी करने आए लोगों के हाथ से सामान छीन ले रहे हैं। घरों में घुस कर तोड़फोड़ कर आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।
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नगरीय क्षेत्र में बंदरों के डर की वजह से लोगों ने रात में छत में सोना लगभग बंद कर दिया है। मेडिकल कॉलेज के अलावा सीएचसी व पीएचसी में हर दिन 30 से 40 लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। एक सप्ताह में युवती समेत दो लोग बंदर के हमलों में जान गंवा चुके हैं लेकिन नगर पंचायत प्रशासन व संबंधित ग्राम सचिव स्तर से बंदरों को पकड़वाने की सुध नहीं ली गई।
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शासनादेश बना पर ठंडे बस्ते में कार्ययोजना
प्रदेश सरकार ने दो अप्रैल 2026 को मानव-बंदर संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए एक अंतरिम आदेश जारी कर कार्ययोजना बनाने की जरूरत बताई। इसमें नगर निकायों (नगर पालिका, नगर पंचायत) को एक महीने में बंदरों के लिए स्थान चिह्नित कर कपि वन बनाने की बात कही गई। हेल्पलाइन नंबर जारी कर बंदरों को पकड़वाने के निर्देश दिए गए। हालांकि तीन महीने बीतने के बाद भी कपि वन के लिए जगह तक तय नहीं हो सकी है। किसी निकाय ने बंदर पकड़ने का अभियान चलाने की जरूरत नहीं समझी है।
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नियम स्पष्ट, जिम्मेदारी से कतरा रहे अफसर
शासन की ओर से जारी निर्देश में साफ कहा गया है कि बंदरों की प्रजाति रीसस मैकाक वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची में शामिल संरक्षित प्रजातियों में नहीं है। इसलिए बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। बंदर पकड़ने की जिम्मेदारी निकायों व ग्राम पंचायतों की है। अब निर्देश के बाद भी जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और लोग जान गंवा रहे हैं। निगरानी समिति में जिलाधिकारी अध्यक्ष हैं। सदस्यों में नामित प्रतिनिधि, प्रभागीय वनाधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला पंचायतराज अधिकारी, खंड विकास अधिकारी और जिलाधिकारी द्वारा नामित वन्यजीव विशेषज्ञ, एनजीओ, सदस्य-सचिव नगर पंचायत के ईओ शामिल हैं।
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सिकंदरा व राजपुर में 1771 ने लगवाया एंटी रेबीज इंजेक्शन
बीते तीन माह का औसत देखें तो जनपद में करीब तीन हजार से अधिक एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए गए हैं। इसमें सिकंदरा व राजपुर के सरकारी अस्पतालों में कुत्तों व बंदरों के हमले के शिकार 1771 लोगों ने एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाए हैं। सिकंदरा सीएचसी में 1299 व राजपुर पीएचसी में 472 लोग एंटी रेबीज लगवाने पहुंचे। चिकित्सकों का कहना है कि कुत्ते व बंदर के काटने पर घाव को तुरंत बहते पानी और साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचकर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने चाहिए।
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सरवनखेड़ा में 31 जुलाई की सुबह सरला (47) घर की दूसरी मंजिल पर बर्तन धुल रही थीं। तीसरी मंजिल पर बंदरों की उछलकूद से वहां बनी ईंटों की रेलिंग ढह कर सरला पर गिर गई। परिजन उन्हें घायलावस्था में कानपुर लेकर आए। यहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
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केस दो।
सिकंदरा के शास्त्री नगर में 25 जुलाई को 28 वर्षीय शबाना छत पर थीं। तभी बंदरों ने उनपर हमला कर दिया। वह खुद को बचाने के लिए भागने लगीं। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वह छत से नीचे आ गिर गईं। इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई।
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केस तीन।
राजपुर के कन्हैया नगर में घर के आंगन में 7 जून को खेल रही नईम सिद्दीकी की आठ वर्षीय बेटी रम्शा को बंदरों ने हमला कर जख्मी कर दी। एक बंदर ने उसके हाथ का मांस नोच लिया। उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं आठ जून को बंदरों ने राजपुर पीएचसी में औषधि कक्ष में तोड़फोड़ की। कीमती दवाइयां व जीवनरक्षक इंजेक्शन टूट दिए। इसी तरह 17 जुलाई को कन्हैया नगर में बंदरों ने शमसाद (35) को हमला कर जख्मी कर दिया।
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मासूम पर बंदरों ने किया हमला, छत से गिरकर घायल
सिकंदरा। कस्बा के मोहल्ला आजाद नगर में शनिवार की शाम छह बजे को छत पर खेल रही छह वर्षीय बच्ची को बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया। अपने बचाव के दौरान छत से नीचे गिर कर गंभीर रूप से घायल हो गई। आजाद नगर निवासी इरशाद ने बताया कि पुत्री इरम (6) घर की छत पर खेलते समय बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया। वह शोर मचाते हुए भागी, इसी बीच संतुलन बिगड़ने से वह छत से नीचे आ गिरी। गंभीर रूप से घायल होने पर उसे सीएचसी लेकर आए। यहां से चिकित्सक ने उसे मेडिकल कॉलेज अकबरपुर रेफर कर दिया। जहां उसकी हालत गंंभीर बनी हुई है। (संवाद)
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नगर में उत्पाद मचाए बंदरों को पकड़वाने के लिए मथुरा की प्रशिक्षित टीम से संपर्क किया गया है। जल्द ही टीम के जरिये बंदरों को पकड़वाकर जंगल में छुड़वाया जाएगा। - वीरेंद्र राव, ईओ नगर पंचायत सिकंदरा
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बंदर धार्मिक आस्था से जुड़े हैं। इन्हें पकड़वाने के बाद छोड़ा कहां जाएगा यह भी सोचना जरूरी है। नगरीय क्षेत्र में बंदरों को पकड़वाने के संबंध में नियम की जानकारी कराकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। - अमित कुमार, एडीएम प्रशासन/प्रभारी अधिकारी नगर निकाय