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'धूम' सिरीज, 'टशन' और 'ठग्स ऑफ हिन्दुस्तान' के डायरेक्टर ने यहां बैंक लूट को लेकर दिया बड़ा बयान
शिव मोहन यादव, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 04 Dec 2018 06:24 PM IST
सार
- प्रतियोगिता में विजेता बनीं डीएवी की छात्रा सबरीन
- शहर के पंकज चतुर्वेदी की कविताओं पर भी बने पोस्टर
- चर्चित डायरेक्टर विक्टर ने बताईं शहर में बचपन की नादानियां
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विजय कृष्ण आचार्या ‘विक्टर’ हिंदी सिनेमा के सफल पटकथा लेखक, निर्देशक, गीतकार हैं। ‘धूम’, ‘रावन’, ‘गुरु’, ‘धूम टू’, ‘धूम थ्री’ जैसी फिल्मों के पटकथा लेखक हैं। उन्होंने ‘टशन’, और ‘ठग्स ऑफ हिंदुस्तान’ जैसी बड़ी फिल्मों का निर्देशन भी किया है। कानपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पत्नी अनुषा खान के साथ शहर आए विक्टर ने फिल्मों से लेकर निजी जीवन पर खुलकर बातें की, बचपन भी याद किया। वे स्वभाव से गंभीर और व्यवहार से हंसमुख हैं।
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- आपका बचपन कानपुर में बीता है। सुना है बचपन में आप बड़े नटखट थे।
(गंभीर मुद्रा में) : नहीं, ये साजिश है, मेरे दोस्तों की। मैं तो बड़ा सीधा-सादा रहा हूं। (कहने के बाद मुस्कराते हैं) लेकिन, यह बात काफी हद तक सही है।
- आप दोस्तों की साजिश बताते हैं, जबकि दोस्त तो आपकी तारीफ करते हैं कि आप दसवीं-ग्यारहवीं में बहुत होशियार थे, 92-93 प्रतिशत अंक लाते थे।
सब के सब झूठ बोलते हैं। आधे दोस्त तो फेलियर रहे हैं। (कुछ पलों बाद), मैं खुद 46 परसेंट से पास हुआ हूं।
(गंभीर मुद्रा में) : नहीं, ये साजिश है, मेरे दोस्तों की। मैं तो बड़ा सीधा-सादा रहा हूं। (कहने के बाद मुस्कराते हैं) लेकिन, यह बात काफी हद तक सही है।
- आप दोस्तों की साजिश बताते हैं, जबकि दोस्त तो आपकी तारीफ करते हैं कि आप दसवीं-ग्यारहवीं में बहुत होशियार थे, 92-93 प्रतिशत अंक लाते थे।
सब के सब झूठ बोलते हैं। आधे दोस्त तो फेलियर रहे हैं। (कुछ पलों बाद), मैं खुद 46 परसेंट से पास हुआ हूं।
डेमो पिक
- अच्छा तो पढ़ाई में आपका दिल नहीं लगा?
(मुस्कराते हुए) दिल किसी ने मुझसे नहीं लगाया। फिजिक्स, मैथ तो... कुछ मत कहिए। हिंदी-इंग्लिश की बदौलत पास होता था।
- अच्छा मैथ-फिजिक्स छोड़िए, आप पति-पत्नी की केमिस्ट्री कहां से शुरू हुई?
(पास में बैठीं पत्नी अनूषा खान बोलती हैं) दरअसल, उन दिनों एक टीवी सीरियल था-‘जस्ट मोहब्बत’। वह रात 12 बजे के आसपास आता था। उसी के संदर्भ में विक्टर से मिलना हुआ, फिर मिलते रहे... और बस।
(मुस्कराते हुए) दिल किसी ने मुझसे नहीं लगाया। फिजिक्स, मैथ तो... कुछ मत कहिए। हिंदी-इंग्लिश की बदौलत पास होता था।
- अच्छा मैथ-फिजिक्स छोड़िए, आप पति-पत्नी की केमिस्ट्री कहां से शुरू हुई?
(पास में बैठीं पत्नी अनूषा खान बोलती हैं) दरअसल, उन दिनों एक टीवी सीरियल था-‘जस्ट मोहब्बत’। वह रात 12 बजे के आसपास आता था। उसी के संदर्भ में विक्टर से मिलना हुआ, फिर मिलते रहे... और बस।
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- अनूषा, आप कबीर खान की बहन हैं। पति भी स्टार हैं। दोनों स्टार के बीच कैसा महसूस करती हैं?
कौन स्टार! (कहकर थोड़ा रुकती हैं, तो हंसी आ जाती है।) ये दोनों मेरे लिए साधारण हैं। कुछ भी मेरे और बच्चों की इजाजत के बगैर नहीं करते। (इसी बीच विक्टर बोलते हैं) भैया, बहुत डांट पड़ती है।
- आप की फिल्मों में डकैती, चोरी खूब दिखाई जाती हैं। क्या डकैती में आपकी रुचि रही है?
(कनपुरिया अंदाज में) कानपुर के हैं, कुछ असर तो रहेगा ही (कहकर हंसते हैं)। लेकिन भैया, कभी ऐसा किया नहीं।
कौन स्टार! (कहकर थोड़ा रुकती हैं, तो हंसी आ जाती है।) ये दोनों मेरे लिए साधारण हैं। कुछ भी मेरे और बच्चों की इजाजत के बगैर नहीं करते। (इसी बीच विक्टर बोलते हैं) भैया, बहुत डांट पड़ती है।
- आप की फिल्मों में डकैती, चोरी खूब दिखाई जाती हैं। क्या डकैती में आपकी रुचि रही है?
(कनपुरिया अंदाज में) कानपुर के हैं, कुछ असर तो रहेगा ही (कहकर हंसते हैं)। लेकिन भैया, कभी ऐसा किया नहीं।
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- लेकिन आपकी धूम सिरीज की फिल्में तो बैंक लूट जैसे संदेश देती हैं।
नहीं भई। मैं तो मना करता हूं, कोई बैंक न लूटे। (थोड़ा रुककर) क्योंकि बैंक खाली पड़े हैं, कोई चक्कर में न पड़ना।
नहीं भई। मैं तो मना करता हूं, कोई बैंक न लूटे। (थोड़ा रुककर) क्योंकि बैंक खाली पड़े हैं, कोई चक्कर में न पड़ना।