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Kanpur: भैंस की खाल की समस्या से जूझ रहा चमड़ा उद्योग, कारोबारी बोले- PM मोदी को भेजा जा रहा है प्रजेंटेशन

Fri, 31 Jan 2025 05:13 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 31 Jan 2025 05:13 PM IST
सार

Kanpur News: चमड़ा कारोबारियों का कहना है कि कच्चे चमड़े की उपलब्धता के लिए वाणिज्य मंत्रालय को पत्र भेजा गया है। कच्चा चमड़ा न मिलने से कारोबार सिमट रहा है। प्रधानमंत्री की चिंता उचित है।

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Leather industry is facing the problem of buffalo skin businessman said presentation is being sent to PM Modi
लेदर इंडस्ट्री - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भुवनेश्वर में ‘उत्कर्ष ओडिशा, मेक इन ओडिशा कॉन्क्लेव’ के उद्घाटन अवसर पर कच्चे माल के निर्यात पर चिंता व्यक्त की। कहा है कि देश की तेज प्रगति सिर्फ कच्चे माल के निर्यात से संभव नहीं है। कच्चे माल का निर्यात और तैयार उत्पाद का आयात स्वीकार नहीं है। प्रधानमंत्री के इस संबोधन का शहर के चमड़ा कारोबारियों और निर्यातकों ने स्वागत किया है।

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उनका कहना है कि प्रधानमंत्री की चिंता उचित है। दस हजार करोड़ से ज्यादा के सालाना कारोबार वाला चमड़ा उद्योग भैंस की खाल की समस्या से जूझ रहा है। कच्चा माल उपलब्ध न होने से टेनरियों में उत्पादन प्रभावित है। वहीं, सौ से दो सौ रुपये में कच्चा चमड़ा का निर्यात किया जा रहा है, जबकि बाजार में 1000 से 1200 रुपये में प्रति खाल मिल रही है। शहर में चमड़ा उद्योग सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार और सरकार को विदेशी मुद्रा उपलब्ध कराता है।

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कच्चे चमड़े के निर्यात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगता
शहर और उन्नाव को मिलाकर करीब चार सौ टेनरियां हैं। शहर में इनकी संख्या करीब 240 है। 2014 से पहले तक कच्चे चमड़े के निर्यात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगता था। बाद में इसे 80, फिर 60 और मौजूदा समय में यह शुल्क 40 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाने की मांग की गई थी। उन्नाव समेत पूरे प्रदेश से 80 प्रतिशत मीट निर्यात होता है। उन्नाव में चार से पांच स्लाटर हाउस हैं।

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एक हजार रुपये से भी अधिक पर बेची जा रही
इसके अलावा झांसी, अलीगढ़, रामपुर में स्लाटर हाउस हैं। इनके जरिये ही कारोबारियों को कच्चा चमड़ा उपलब्ध होता रहा है, लेकिन अब मुश्किल हो रही है। कच्चे चमड़े से ही जूता, सैडलरी, हारनेस, बेल्ट पर्स आदि बनाए जाते हैं। कारोबारियों ने बताया कि भैंस की खाल का निर्यात 100-200 रुपये में किया जा रहा है, जबकि यही खाल स्थानीय स्तर में एक हजार रुपये से भी अधिक पर बेची जा रही है।

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कच्चे चमड़े की उपलब्धता के लिए वाणिज्य मंत्रालय को पत्र भेजा गया है। कच्चा चमड़ा न मिलने से कारोबार सिमट रहा है। प्रधानमंत्री की चिंता उचित है। स्लाटर हाउस 100-200 रुपये में कच्चा चमड़ा निर्यात कर रहे हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर 1000 से 1200 रुपये में कच्चा चमड़ा मिलता है। प्रधानमंत्री को समस्याओं के संबंध में प्रजेंटेशन भेजा जा रहा है।  -असद इराकी, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद

चमड़ा श्रम आधारित उद्योग है। उद्योग के सामने कई चुनौतियां हैं। कच्चे चमड़े पर निर्यात शुल्क सौ प्रतिशत करने की मांग उठाई जा चुकी है। सौ प्रतिशत शुल्क होने से कच्चा चमड़ा का निर्यात घट जाएगा। भैंस की खाल से ही चमड़ा तैयार होता है। इसके बाद जूता, बेल्ट, सैडलरी, हारनेस आदि उत्पाद बनाए जाते हैं। कच्चे चमड़े के निर्यात पर पहले की तरह प्रतिबंध लगाना चाहिए।  -जफर-फिरोज, आयात-निर्यात विशेषज्ञ

निर्यात पर दिख सकता असर
चर्म निर्यात परिषद के आंकड़ों के मुताबिक 2017-18 में शहर से 5805 करोड़ का निर्यात किया गया था। 2018-19 में 5662 करोड़ का, 2019-20 में कोरोना के चलते निर्यात घटकर 4921 करोड़ हो गया। इसके बाद तेजी से सुधार हुआ। 2020-21 में 5301 करोड़ का निर्यात किया गया। 2022-23 में सात हजार करोड़ का निर्यात किया गया।

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