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कानपुर: कांग्रेसी न सपाई... जनप्रतिनिधि माने सिर्फ भाजपाई, मुख्यमंत्री की बैठक से दूर रखने पर भड़के विपक्षी माननीय

Sun, 23 May 2021 03:34 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 23 May 2021 03:34 PM IST
सार

कानपुर में शनिवार को मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान विपक्ष के नेताओं के घर भारी पुलिस बल तैनात कर उन्हें नजरबंद कर दिया गया। इससे नेताओं में नाराजगी है।

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Leaders of other parties angry for not attending CM's meeting in Kanpur
मुख्यमंत्री की बैठक से दूर रखने पर भड़के विपक्ष के नेता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में कोरोना के संक्रमण की रोकथाम के लिए शनिवार को जनप्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समीक्षा बैठक से विपक्ष के नेताओं के साथ अजीब खेल खेला गया। केडीए सभागार में हुई बैठक के लिए प्रशासन की तरफ से सत्ता पक्ष के साथ विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों को भी प्रोटोकॉल के तहत पत्र भेजा गया।
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लेकिन, सुबह सात बजे से ही विपक्ष के नेताओं के घर भारी पुलिस बल तैनात कर उन्हें नजरबंद कर दिया गया। विपक्ष के नेताओं ने मुख्यमंत्री की बैठक में शामिल होने के लिए पत्र मिलने की बात कही तो पुलिस ने दो टूक जवाब दिया कि आप लोग नहीं जा सकते।
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अफसरों के दोहरे रवैये से आहत विपक्ष के विधायकों ने सरकार से सवाल किया है कि क्या सत्ता पक्ष के नेता ही जनप्रतिनिधि माने जाएंगे। विपक्ष के नेताओं को भी जनता ने चुना है। उनके क्षेत्र के भी कई ऐसे मसले थे, जिन्हें वह मुख्यमंत्री के सामने उठाना चाहते थे, लेकिन साजिशन उन्हें जाने ही नहीं दिया गया। सरकार ने प्रोटोकॉल भेजकर महज दिखावा किया है कि वह सभी जनप्रतिनिधियों के साथ एक जैसा व्यवहार करती है। वहीं पुलिस के जरिये घरों में नजरबंद कर अपनी निरंकुश छवि का भी परिचय दे दिया।
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पत्र था दिखावा, एक दिन पहले हो गई थी तैयारी
मुख्यमंत्री की बैठक में किस जनप्रतिनिधि को शामिल होना है और किसे नहीं, शासन-प्रशासन ने इसकी तैयारी एक दिन पहले ही कर ली थी। विपक्ष के नेताओं को सिर्फ दिखावे के लिए बैठक में शामिल होने का पत्र भेजा गया था। अधिकारियों की सूची में 17 जनप्रतिनिधियों औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री नीलिमा कटियार, महापौर प्रमिला पांडे, सांसद सत्यदेव पचौरी, देवेंद्र सिंह भोले, अशोक रावत, एमएलसी अरुण पाठक, सलिल विश्नोई, विधायक महेश त्रिवेदी, सुरेंद्र मैथानी, अभिजीत सिंह सांगा, उपेंद्र पासवान, भगवती सागर के अलावा भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह, उत्तर इकाई जिलाध्यक्ष सुनील बजाज, दक्षिण अध्यक्ष डॉ. वीना आर्या, नगर ग्रामीण इकाई अध्यक्ष कृष्णमुरारी शुक्ला के नाम शामिल थे।

 

मिलेंगे नहीं तो समस्याएं कैसे दूर होंगी
प्रोटोकॉल के तहत जनप्रतिनिधि होने के नाते क्षेत्र की जनता की समस्या और अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाना हर विधायक की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में मुख्यमंत्री ही जब हमसे नहीं मिलना चाहते तो जनता की समस्याएं कैसे दूर हो पाएंगी। वह हमसे मिल लेते तो क्या उनकी कुर्सी चली जाती? जनप्रतिनिधि का मतलब सिर्फ सत्ता के ही सांसद, विधायक हैं तो हमें पत्र क्यों भेजा गया। यह सब सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा था।- इरफान सोलंकी, सपा विधायक, सीसामऊ

हम बताते जनसमस्याओं का सच
मैं तो मुख्यमंत्री की बैठक को लेकर भेजे गए प्रोटोकॉल के तहत उनसे मिलने की तैयारी में था। लेकिन, सुबह से ही पहरा डाले पुलिस अधिकारियों ने मेरे बाहर निकलने पर रोक लगा दी। यह सरकार की तानाशाही है। मुख्यमंत्री को डर है कि विपक्ष के जनप्रतिनिधि जनसमस्याओं की जो सही तस्वीर उनके सामने रखना चाहते हैं, उससे उनकी सरकार को खतरा न पैदा हो जाए। यही वजह रही कि सिर्फ भाजपाइयों को ही जनप्रतिनिधि माना गया।- अमिताभ बाजपेई, सपा विधायक, आर्यनगर

समस्याओं से भाग रही सरकार
हमने तो मुख्यमंत्री के सामने अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाने की पूरी तैयारी की थी लेकिन सुबह से ही घर पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। पत्र दिखाने के बाद भी बैठक में जाने से रोका गया। सरकार क्षेत्र और जनता की समस्याओं का निस्तारण करने से बच रही है। इसी वजह से विपक्ष को बैठक से दूर रखकर सिर्फ भाजपा सांसदों, विधायकों और पदाधिकारियों को ही जनप्रतिनिधि मान लिया गया।- सोहिल अंसारी, कांग्रेस विधायक, कैंट

बैठक में जाने से रोका तो विधायक ने मुंडवाया सिर
मुख्यमंत्री के शहर पहुंचने से पहले नजरबंद सपा विधायक अमिताभ बाजपेई को पुलिस ने बैठक में जाने से रोका तो उन्होंने अपने घर के सामने सिर मुंडवाया। कहा कि कोरोना महामारी और सरकार की अव्यवस्था के चलते जिन लोगों की जान गई है, सिर मुंडवाकर उन लोगों को श्रद्धांजलि दी है। साथ ही सरकार की नाकामी का विरोध भी किया है। विधायक ने कहा कि भाजपा सत्ता के नशे में चूर है। उसे जनता की समस्याएं और दर्द नहीं दिख रहा। आरोप लगाया, हम मुख्यमंत्री को जमीनी हकीकत बताना चाहते थे, लेकिन सरकार को सिर्फ चापलूसी पसंद है। हमारा कर्तव्य है कि जनता की आवाज मुख्यमंत्री तक पहुंचाएं। यह हमारा अधिकार है। हमें जनता ने चुना है, किसी के रहमोकरम पर विधायक नहीं बने हैं।
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