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एसटीएफ जवानों के सामूहिक हत्याकांड की पैरवी कर रहे वकील की जान की ठोकिया गैंग से खतरा, मांगी सुरक्षा
Sun, 15 Mar 2020 10:43 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 15 Mar 2020 10:43 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Flickr
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बांदा में दस्यु ठोकिया गैंग द्वारा 6 एसटीएफ जवानों की सामूहिक हत्या मामले में पैरवी करने वाले विशेष शासकीय अधिवक्ता ने परिवार की जान को खतरा बताया है। अधिवक्ता डकैती, मुठभेड़ ,लूट आदि के मामलों में प्रदेश सरकार/पुलिस की ओर से अदालतों में पैरवी कर रहा है।
अधिवक्ता ने शासन और प्रशासन से सुरक्षा तथा शस्त्र लाइसेंस की मांग की है। विशेष न्यायाधीश (डकैती कोर्ट) में विशेष शासकीय अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी ने कहा है कि उनके द्वारा राज्य सरकार की तरफ अभियोजन हित में अदालत में पैरवी की जा रही है।
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अधिवक्ता ने शासन और प्रशासन से सुरक्षा तथा शस्त्र लाइसेंस की मांग की है। विशेष न्यायाधीश (डकैती कोर्ट) में विशेष शासकीय अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी ने कहा है कि उनके द्वारा राज्य सरकार की तरफ अभियोजन हित में अदालत में पैरवी की जा रही है।
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22 जुलाई 2007 को दस्यु ठोकियां गैंग द्वारा एसटीएफ के 6 कमांडों का नरसंहार और 10 कमांडों को घायल कर देने के मुकदमे की वह डकैती कोर्ट में अभियोजन की ओर से वह पैरवी कर रहे है। इसमें मामले में 16 नामजद अभियुक्त हैं। जिनमें 13 बहुत खतरनाक और हिस्ट्रीशीटर जेल में हैं।
इनका ट्रायल हो चुका है। अधिवक्ता ने कहा कि यह अभियुक्त उनके क्षेत्र के रहने वाले हैं। इनकी दहशत है। अधिवक्ता ने कहा कि वह नरैनी का रहने वाला है। रोजाना बांदा आना जाना पड़ता है। इसके चलते वह और उनका परिवार अपने को असुरक्षित महसूस कर रहा है। सुरक्षा की बहुत जरूरत है।
कभी भी कोई अप्रिय घटना उसके या परिवार के साथ हो सकती है। ऐसे में उसे आत्म सुरक्षा के लिए रिवाल्वर का लाइसेंस दिया जाना चाहिए। इसके लिए उसने पिछले वर्ष 31 मई को आवेदन किया था। औपचारिकताएं पूरी हो चुकी है। जिला मजिस्ट्रेट को लाइसेंस जारी करना है। अधिवक्ता ने लाइसेंस और सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।
इनका ट्रायल हो चुका है। अधिवक्ता ने कहा कि यह अभियुक्त उनके क्षेत्र के रहने वाले हैं। इनकी दहशत है। अधिवक्ता ने कहा कि वह नरैनी का रहने वाला है। रोजाना बांदा आना जाना पड़ता है। इसके चलते वह और उनका परिवार अपने को असुरक्षित महसूस कर रहा है। सुरक्षा की बहुत जरूरत है।
कभी भी कोई अप्रिय घटना उसके या परिवार के साथ हो सकती है। ऐसे में उसे आत्म सुरक्षा के लिए रिवाल्वर का लाइसेंस दिया जाना चाहिए। इसके लिए उसने पिछले वर्ष 31 मई को आवेदन किया था। औपचारिकताएं पूरी हो चुकी है। जिला मजिस्ट्रेट को लाइसेंस जारी करना है। अधिवक्ता ने लाइसेंस और सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।