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जालौन: 20 साल बाद दर्ज हुआ मुकदमा, बुजुर्ग चाची ने धो ही डाला भतीजे पर लगा कलंक, जीती इंसाफ की लड़ाई

Fri, 09 Oct 2020 12:33 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन Published by: शिखा पांडेय Updated Fri, 09 Oct 2020 12:33 AM IST
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Lawsuit filed after 20 years
पीड़ित और उसकी चाची - फोटो : अमर उजाला
जालौन जिले में भतीजे को झूठे मामले में फंसाने के आरोपियों के खिलाफ रामपुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी औरैया के अजीतमल निवासी कटोरी देवी  को हुई तो उनकी बूढ़ी आंखें चमक उठीं। झुर्रीदार चेहरे पर सुकून के भाव नजर आने लगे।
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पास खड़े भतीजे मुकेश का माथा चूम लिया। बोलीं, भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। पता था कि एक न एक दिन यह दाग धुलेगा जरूर। आज वह दिन आ गया। अब दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल जाए, काफी होगा।
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मुकेश के जेल जाने के बाद उसकी चाची कटोरी देवी ने उसे निर्दोष साबित करने का बीड़ा उठाया था। कटोरी देवी बताती हैं कि उनका दिल नहीं मानता था कि मुकेश चरस के कारोबार में लिप्त हो सकता है। बस इसी भरोसे के साथ दौड़ भाग करती रहीं।
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अब तो इतने साल बाद यह भी ठीक से नहीं याद है कि किस-किस अधिकारी और नेताओं के दरवाजे खटखटाए। अब बेटे को इंसाफ मिल गया और उस पर व परिवार पर लगा दाग हमेशा के लिए मिट गया। कटोरी देवी के मुताबिक पुलिस मुकेश को घर ले गई थी। अगले दिन उन्होंने अजीतमल थाने में उसके अपहरण की शिकायत की थी। इसके बाद ही पता चल सका था कि रामपुरा पुलिस उसे अपने साथ जालौन जनपद ले गई है।

पुलिस से मिलकर जमीन की रंजिश में फंसाया गया था
मुकेश ने बताया कि बीस साल पहले उसका क्षेत्र के कुछ लोगों से जमीन का विवाद चल रहा था। इन्हीं लोगों ने रामपुरा पुलिस से सांठगांठ कर साजिशन फंसा दिया था। इन लोगों के नाम भी रामपुरा थाने में दर्ज पुलिस कर्मियों के साथ शामिल हैं।

चरस लगाने में खुद ही फंसी पुलिस
जिन तत्कालीन एसओ शैलेंद्र सिंह और तीन पुलिस कर्मियों ने मुकेश को फंसाने के लिए 300 ग्राम चरस का इंतजाम किया था, वह चरस अब इन सबके गले की फांस बन गया है। सीबीसीआईडी की तहरीर पर दोषी पुलिस कर्मियों व तीन अन्य लोगों के खिलाफ एनडीपीएस की धारा भी लगाई गई है।

एफआईआर की जांच भी सीबीसीआईडी ही करेगी
इंस्पेक्टर रामपुरा ने बताया कि बीस साल पहले दिए गए प्रार्थना पत्र की जांच के बाद ही सीबीसीआईडी ने तत्कालीन एसओ समेत सात लोगों पर मामला दर्ज कराया है। अब इस एफआईआर की विवेचना भी सीबीसीआईडी के ही माध्यम से की जाएगी। पुलिस बीस साल पुराने रिकार्ड सीबीसीआईडी को उपलब्ध कराएगी।
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