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अलीगढ़ से झारखंड 1100 किमी के सफर पर पैदल निकल पड़े मजदूर, तपती धूप में भूखे पेट घर पहुंचने की जिद
Thu, 16 Apr 2020 08:21 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 16 Apr 2020 08:21 PM IST
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अलीगढ़ से झारखंड जा रहे मजदूर छाया मिलने पर सड़क किनारे प्रतीक्षालय में सो गए।
- फोटो : amar ujala
कन्नौज के गुरसहायगंज कस्बे के लोगों ने लॉकडाउन के दौरान मानवता की मिसाल पेश की। लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों के सामने जीवन यापन का संकट आ गया है। आठ प्रवासी मजदूर अलीगढ़ से पैदल ही झारखंड के लिए निकल पड़े।
जीटी रोड पर मजदूरों को देखकर लोगाें ने खाना खिलाया। कुछ देर आराम करने के बाद वह लोग फिर से पैदल निकल पड़े। गुरुवार दोपहर इस्माइलपुर के पास जीटी रोड किनारे प्रतीक्षालय में झारखंड के आठ लोगों को देखकर स्थानीय लोग पहुंच गए।
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जीटी रोड पर मजदूरों को देखकर लोगाें ने खाना खिलाया। कुछ देर आराम करने के बाद वह लोग फिर से पैदल निकल पड़े। गुरुवार दोपहर इस्माइलपुर के पास जीटी रोड किनारे प्रतीक्षालय में झारखंड के आठ लोगों को देखकर स्थानीय लोग पहुंच गए।
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मजदूर मुनीलाल निवासी ग्राम धपरा थाना संतराय जिला गोंडडा झारखंड ने बताया कि वह आठ लोगों के साथ अलीगढ़ में मजदूरी करते हैं। दूसरे चरण के लॉकडाउन के बाद मालिकों ने जबरदस्ती मकान खाली करा लिए।
परेशान होकर 13 अप्रैल की रात को वह लोग झारखंड के लिए निकल पड़े। मुनीलाल ने बताया कि तीन दिन से वह लोग बिस्कुट खाकर पेट भर रहे हैं। इस पर नगर के कुछ लोगों ने लंच पैकेट भिजवाए।
वहीं गोरखपुर के सुरजीत और संदीप कुमार हाथरस में वॉल पेंटिंग का काम करते हैं। इन्होंने बताया कि पैसे खत्म हो गए हैं। नया काम मिल नहीं रहा है। वाहन बंद हैं। इसलिए पैदल ही घर जा रहे हैं।
परेशान होकर 13 अप्रैल की रात को वह लोग झारखंड के लिए निकल पड़े। मुनीलाल ने बताया कि तीन दिन से वह लोग बिस्कुट खाकर पेट भर रहे हैं। इस पर नगर के कुछ लोगों ने लंच पैकेट भिजवाए।
वहीं गोरखपुर के सुरजीत और संदीप कुमार हाथरस में वॉल पेंटिंग का काम करते हैं। इन्होंने बताया कि पैसे खत्म हो गए हैं। नया काम मिल नहीं रहा है। वाहन बंद हैं। इसलिए पैदल ही घर जा रहे हैं।