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किडनी कांड में पुलिस ने लीवर बेचने वाले को उठाया, इस बड़े अस्पताल का नाम आया सामने
Sat, 02 Mar 2019 05:59 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 02 Mar 2019 05:59 PM IST
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किडनी कांड की गांठें खोलने में जुटी पुलिस ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल की एक महिला कर्मचारी को हिरासत में लिया है। गुरुवार रात पुलिस ने लखनऊ के चौक पाटानाला से राजा और रईस को उठाया था। शुक्रवार को घंटों पूछताछ के बाद पुलिस ने रईस को छोड़ दिया।
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रईस ने अपना लीवर। गिरोह को डोनर नहीं उपलब्ध कराए थे। पूछताछ में राजा से पहले उठाए गए रामू पांडेय और श्याम तिवारी की संलिप्तता के भी सबूत पुलिस के हाथ लगे हैं। इस पर पुलिस ने इन तीनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने किडनी कांड के खुलासे के दौरान डोनर वरदान, शोएब, अजय को भी पकड़ा था।
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साथ ही किडनी बेचने की तैयारी कर रहे आशीष तिवारी व रिषभ को भी पकड़कर पूछताछ की थी। इसमें लखनऊ निवासी राजा, रईस और रामू का नाम सामने आया था। पुलिस के मुताबिक राजा और रामू दोनों डोनर रह चुके हैं। दोनों मुख्य आरोपी टी राजकुमार और गौरव मिश्रा के साथ डोनरों को भी जुटाते थे। पुलिस जल्द ही दोनों को पूछताछ के लिए कानपुर लेकर आएगी। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस जल्द ही हिरासत में चल रहे जुनैद की भी गिरफ्तारी दिखा सकती है।
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पुलिस कर रही है पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक रईस ने अगस्त 2018 में दिल्ली के किसी कमल सिंह चौहान को लीवर बेचा था। वह कमल का भांजा बना था और दस्तावेजों में उसका नाम विजय चौहान दर्ज था। जानकारी के अनुसार रईस ने डोनर उपलब्ध नहीं कराए थे। पूछताछ के बाद पुलिस ने रईस को छोड़ दिया।
मोहित को क्यों बचा रही पुलिस
मामले में वादिनी के मुताबिक आरोपी किदवईनगर लाल कॉलोनी निवासी श्याम ने ही नौबस्ता हनुमंत विहार निवासी मोहित निगम से उसे मिलवाया था। मोहित ने नौकरी का झांसा देकर उससे किडनी बेचने के लिए कहा था। इसलिए पुलिस ने मोहित को नामजद आरोपी बनाया था। एक हफ्ते से पुलिस मोहित को लेकर इधर-उधर घूम रही और फिर छोड़ दे रही है। सवाल है कि आखिर उस पर नरमी क्यों बरती जा रही।
ये नहीं लग रहे हाथ
मामले में जालंधर का करन, लखनऊ का आनंद कुमार, दिल्ली का संजय पांडेय, बर्रा का संजय पाल, बंगाल का आसिम सिकंदर और सिप्पू राय अभी तक पुलिस गिरफ्त से दूर हैं। वहीं बड़े आरोपियों में डॉ. केतन कौशिक का भी पता नहीं चला है। वहीं, पीएसआईआर की कोऑर्डिनेटर सुनीता वर्मा व मिथुन, फोर्टिस की सोनिका से पुलिस ने पूछताछ तो की, लेकिन गिरफ्तार नहीं किया है।
मोहित को क्यों बचा रही पुलिस
मामले में वादिनी के मुताबिक आरोपी किदवईनगर लाल कॉलोनी निवासी श्याम ने ही नौबस्ता हनुमंत विहार निवासी मोहित निगम से उसे मिलवाया था। मोहित ने नौकरी का झांसा देकर उससे किडनी बेचने के लिए कहा था। इसलिए पुलिस ने मोहित को नामजद आरोपी बनाया था। एक हफ्ते से पुलिस मोहित को लेकर इधर-उधर घूम रही और फिर छोड़ दे रही है। सवाल है कि आखिर उस पर नरमी क्यों बरती जा रही।
ये नहीं लग रहे हाथ
मामले में जालंधर का करन, लखनऊ का आनंद कुमार, दिल्ली का संजय पांडेय, बर्रा का संजय पाल, बंगाल का आसिम सिकंदर और सिप्पू राय अभी तक पुलिस गिरफ्त से दूर हैं। वहीं बड़े आरोपियों में डॉ. केतन कौशिक का भी पता नहीं चला है। वहीं, पीएसआईआर की कोऑर्डिनेटर सुनीता वर्मा व मिथुन, फोर्टिस की सोनिका से पुलिस ने पूछताछ तो की, लेकिन गिरफ्तार नहीं किया है।