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Kanpur News: दो साल शहर में तैनात रहे केशवलाल, बनाई अकूत संपत्तियां
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कानपुर। सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर केशव लाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आया है। वह कानपुर नगर में करीब दो साल तक तैनात रहे। विजिलेंस जांच में उनके पास 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति का खुलासा हुआ है। उन्होंने अपनी आय से करीब 17.26 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए हैं।
विजिलेंस के कानपुर सेक्टर में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। केशव लाल 2015-2017 तक शहर में विशेष अनुसंधान शाखा में एडिशनल कमिश्नर थे। नोटबंदी के जिस दौर में दो हजार के एक नोट के लिए मारामारी मची थी। उस समय केशवलाल के घर में 10.77 करोड़ रुपये की दो हजार की करेंसी मिली थी जो अलमारियों में पैक थी। यानी की नोटों की गड्डी में लगी पन्नी तक नहीं हटाई गई थी। नोटबंदी 2016 में हुई थी। और आयकर विभाग ने 19 अप्रैल 2017 को छापा मारा था।
नोएडा, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद में संपत्तियां हैं जिनकी कीमत करोड़ों में है। छापे के दौरान भी वह आय के श्रोत नहीं बता पाए थे। विभाग ने केशवलाल और उनकी पत्नी इंदु श्रीवास्तव पर लगभग 28 करोड़ रुपये की डिमांड निकाली थी। केशवलाल ने अकूत कमाई के लालच में पान मसाला और कर अपवंचक ट्रांसपोर्टरों के साथ जुगलबंदी कर ली थी। कानपुर के कई पान मसाला और कैरिंग ट्रांसपोर्ट मामलों में उनकी मिली भगत सामने आई थी। आयकर की जांच में केशवलाल और उनके परिवार के नाम तमाम चल और अचल संपत्तियां पाईं गई जिसका जिक्र उन्होंने अपने आयकर रिटर्नों में नहीं किया था।
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केशवलाल को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी पाया गया था। उनकी अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को बरकरार रखते हुए पिछले साल जुलाई में 100 फीसदी पेंशन कटौती का आदेश दिया गया था। वर्ष 2017 में केशवलाल को जबरन रिटायर कर दिया गया था। इस आदेश के साथ ही शासन ने जांच जारी रखी थी।
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विजिलेंस के कानपुर सेक्टर में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। केशव लाल 2015-2017 तक शहर में विशेष अनुसंधान शाखा में एडिशनल कमिश्नर थे। नोटबंदी के जिस दौर में दो हजार के एक नोट के लिए मारामारी मची थी। उस समय केशवलाल के घर में 10.77 करोड़ रुपये की दो हजार की करेंसी मिली थी जो अलमारियों में पैक थी। यानी की नोटों की गड्डी में लगी पन्नी तक नहीं हटाई गई थी। नोटबंदी 2016 में हुई थी। और आयकर विभाग ने 19 अप्रैल 2017 को छापा मारा था।
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नोएडा, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद में संपत्तियां हैं जिनकी कीमत करोड़ों में है। छापे के दौरान भी वह आय के श्रोत नहीं बता पाए थे। विभाग ने केशवलाल और उनकी पत्नी इंदु श्रीवास्तव पर लगभग 28 करोड़ रुपये की डिमांड निकाली थी। केशवलाल ने अकूत कमाई के लालच में पान मसाला और कर अपवंचक ट्रांसपोर्टरों के साथ जुगलबंदी कर ली थी। कानपुर के कई पान मसाला और कैरिंग ट्रांसपोर्ट मामलों में उनकी मिली भगत सामने आई थी। आयकर की जांच में केशवलाल और उनके परिवार के नाम तमाम चल और अचल संपत्तियां पाईं गई जिसका जिक्र उन्होंने अपने आयकर रिटर्नों में नहीं किया था।
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केशवलाल को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी पाया गया था। उनकी अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को बरकरार रखते हुए पिछले साल जुलाई में 100 फीसदी पेंशन कटौती का आदेश दिया गया था। वर्ष 2017 में केशवलाल को जबरन रिटायर कर दिया गया था। इस आदेश के साथ ही शासन ने जांच जारी रखी थी।