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Karauli Sarkar: बाबा ने असम में काटा था अज्ञातवास, जैविक खाद का कर चुका है धंधा, पढ़ें इनसाइड स्टोरी

Sun, 26 Mar 2023 05:19 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 26 Mar 2023 05:19 PM IST
सार

Karauli Sarkar News: करौली बाबा 2002 के बाद अचानक संतोष भदौरिया अज्ञातवास में असम चला गया। वहां दो से तीन साल का समय व्यतीत करने के दौरान उसने पीएचडी की डिग्री हासिल की, जिसके बाद वह डॉ. संतोष भदौरिया हो गया।

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Karauli Sarkar Case, Baba had cut the unknown in Assam, has done the business of organic fertilizers
करौली बाबा कानपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में नोएडा के डॉक्टर सिद्धार्थ चौधरी को पीटने के मामले को लेकर सुर्खियों में आए करौली सरकार डॉ. संतोष सिंह भदौरिया के शुरुआती दौर के ठगी के किस्से आज भी उसके करीबियों में चर्चा का विषय है। सूत्रों के अनुसार जेल में बंद होने के दौरान कोर्ट में पेशी पर गए बाबा ने करीबी के परिजनों से रुपये ऐंठ लिए थे।

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डॉ. संतोष सिंह भदौरिया वर्ष 1994 में भाकियू (टिकैत) में जिला अध्यक्ष के पद पर था। तभी किसानों की मांगों को लेकर भारी भीड़ के साथ तत्कालीन जिलाधिकारी दिनेश सिंह का घेराव कर दिया था। ज्ञापन लेने पहुंचे तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट सीआर यादव से संतोष सिंह की बहस हुई, तभी किसानों ने हमला बोल दिया था।
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मारपीट के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट का सिर फट गया था। पुलिस ने लाठीचार्ज कर किसी तरह स्थिति काबू की और संतोष भदौरिया को मौके से ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उस वक्त संतोष भदौरिया अपने परिवार के साथ रामादेवी में फ्रेंड्स कॉलोनी में किराये पर रहता था।

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जेल जाने के बाद आर्थिक स्थिति इतनी बिगड़ गई कि तीन सौ रुपये के लिए एक जेल में बंद एक परिचित के परिजनों से ही ठगी कर ली। इसका खुलासा तब हुआ था, जब परिचित जेल से जमानत पर छूटकर अपने परिजनों से मिला। पता चला कि संतोष ने युवक को जेल में सभी सुविधाएं दिलवाने के नाम पर रुपये ठग लिए थे।

जेल से छूटने के बाद आईपीएस अधिकारी से बढ़ाया मेलजोल
सूत्रों के मुताबिक 1995 में जेल से बाहर आने के बाद संतोष भदौरिया ने शहर में तैनात तत्कालीन एक आईपीएस अफसर से काफी मेलजोल बढ़ा लिया था। इसके बाद उसने प्रॉपर्टी के व्यापार में हाथ डाला। आर्थिक स्थित में सुधार होने के बाद संतोष ने सिविल लांइस में जिलाधिकारी आवास के पास एक फ्लैट भी खरीदा था।

असम में काटा अज्ञातवास
सूत्रों की मानें, तो वर्ष 2002 के बाद अचानक संतोष भदौरिया अज्ञातवास में असम चला गया। वहां दो से तीन साल का समय व्यतीत करने के दौरान उसने पीएचडी की डिग्री हासिल की, जिसके बाद वह डॉ. संतोष भदौरिया हो गया। शहर लौटकर आने के बाद उसने बिधनू में शनिधाम मंदिर की स्थापना की। यहां प्राकृतिक थैरेपी और जैविक खाद का धंधा शुरू किया, जिसमें उसे कोई खास लाभ नहीं हुआ। आज 14 एकड़ में उसका साम्राज्य फैला हुआ है।

अब डिफेंडर समेत अन्य वाहनों से किस्तों में भेजा जा रहा रुपया
सूत्रों की मानें, तो लवकुश आश्रम की एम्बुलेंस से रुपयों को भरकर ठिकाने लगाने की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद बाबा सतर्क हो चुका है। सुबह एम्बुलेंस तो आश्रम से निकलती है, लेकिन उसमें अब रुपया नहीं होता। इन रुपयों को अब डिफेंडर कार और अन्य वाहनों से किस्तों के रूप में ठिकाने लगाया जा रहा है।

बाबा के 62 भक्तों ने थाने में दिया प्रार्थनापत्र
बाबा के 62 भक्तों ने शनिवार को अपने प्रार्थनापत्र बिधनू थाने में भिजवाया। भक्तों ने नोएडा के डॉ. सिद्धार्थ चौधरी पर करौली सरकार डॉ. संतोष भदौरिया पर एक चैनल में डिबेट के दौरान अपशब्दों का प्रयोग करने का आरोप लगाया है। कार्यवाहक थाना प्रभारी मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच के बाद कार्रवाई होगी।

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