Kanpur Violence Updates: वसी के साझेदार की अवैध बिल्डिंग में उलझा केडीए, दावत-ए-इस्लामी की बिल्डिंग को नोटिस
नई सड़क हिंसा में आरोपी बिल्डर मोहम्मद हाजी वसी के साझेदार की अवैध इमारत केडीए या निजी जमीन पर है। चौथे दिन भी इसका फैसला नहीं हो पाया। वहीं, नगर निगम और जलकल भी दावत-ए-इस्लामी की बिल्डिंग को नोटिस देने की तैयारी कर रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कानपुर में बिल्डर मोहम्मद वसी के साझेदार अब्दुल रहमान की जाजमऊ स्थित अवैध बिल्डिंग केडीए की जमीन पर है या निजी जमीन पर। विकास प्राधिकरण शनिवार को भी इसी में उलझा रहा। उधर, प्रवर्तन विभाग ने अवैध निर्माण के दौरान नोटिस दी थी। जमीन के स्वामित्व संबंधी फैसले के बाद नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। बिल्डर अब्दुल रहमान ने जाजमऊ में अवैध रूप से पांच मंजिला व्यवसायिक कम आवासीय इमारत बनाई है।
इसके ग्राउंड फ्लोर में एक कंपनी का डिपार्टमेंटल स्टोर चल रहा है, जबकि ऊपर की चारों मंजिलों में फ्लैट बने हैं। जिलाधिकारी विशाख जी के आदेश पर तहसील और केडीए की टीम इस जमीन की जांच कर रही है। संयुक्त निरीक्षण के बाद तीन दिन पहले मौके पर टीम भेजकर टीएस सर्वे कराया गया, पर इसकी रिपोर्ट नहीं तैयार हो पाई। जांच में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि अब्दुल रहमान ने आराजी संख्या 1055 में यह बिल्डिंग होने का दावा किया था, पर यह उस आराजी में नहीं है, बल्कि आराजी संख्या 1077 या 1078 में होनी चाहिए।
बता दें कि आराजी संख्या 1077 में केडीए की जमीन है, जबकि 1078 में निजी जमीन हैं। मौके पर किए गए टीएस सर्वे के आधार पर विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों से परामर्श लिया जा रहा है, उसी के आधार पर तय होगा कि यह जमीन गज्जूपरवा में है या चंदारी में आती है।
नगर निगम, जलकल भी देगा दावत-ए-इस्लामी की बिल्डिंग को नोटिस
दादा मियां हाता स्थित जिस पांच मंजिला अवैध इमारत में दावत-ए-इस्लामी का कार्यालय चल रहा है, उसे नगर निगम और जलकल विभाग ने भी बकाया भुगतान के लिए नोटिस देने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। केडीए का शिकंजा भी कसता जा रहा है। इससे पहले नोटिस केडीए थमा चुका है।
कर्नलगंज क्षेत्र के छोटे मियां हाता में स्थित इस अवैध भवन पर गृहकर के मद में नगर निगम के करीब 80 हजार रुपये और जलकर व सीवर कर के मद में जलकल विभाग के करीब 60 हजार रुपये बाकी हैं। इस बकाया राशि को वसूलने के लिए दोनों विभागों में रिकार्ड खंगाला गया। एक अधिकारी ने बताया कि जल्द ही वसूली के लिए नोटिस दी जाएगी।