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Kanpur Violence: साक्ष्यों के अभाव में दो जेल से रिहा, बवाल में गोली चलने की भी पुष्टि, किशोर को लगे थे छर्रे

Thu, 04 Aug 2022 01:52 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 04 Aug 2022 01:52 AM IST
सार

नई सड़क पर तीन जून को हुई हिंसा में 62 लोगों को पुलिस ने जेल भेजा था। इसमें 24 लोगों को बेगुनाह बताकर उनके परिजनों ने पुलिस को प्रार्थना पत्र दिए थे। छह लोगों के खिलाफ हिंसा में शामिल होने के साक्ष्य नहीं मिले है। वहीं, सप्लीमेंट्री मेडिकल में किशोर को तीन-चार जगह पर छर्रे लगने की पुष्टि भी हुई है। 

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Kanpur Violence: Two released from jail due to lack of evidence, also confirmed the firing in the ruckus
Kanpur Violence - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में नई सड़क हिंसा में बुधवार को दो युवकों को साक्ष्यों के आधार पर जेल से रिहा कर दिया गया। चार अन्य को रिहा करने के आदेश में कुछ तकनीकी गलती है, जिसका सुधार किया जाएगा, उसके बाद ये लोग भी जेल से रिहा किए जाएंगे।  तीन जून को नई सड़क पर जुमे की नमाज के बाद बवाल हुआ था। पुलिस ने तीन एफआईआर दर्ज कर की थी, जिसमें अब तक 62 लोगों को जेल भेजा जा चुका है।

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इस दौरान जेल भेजे गए 24 लोगों के परिजनों ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर दावा किया था कि वह निर्दोष हैं। पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने इन सभी प्रार्थना पत्रों को संज्ञान में लेकर जांच की, जिसमें सामने आया कि छह ऐसे लोग हैं, जिनके खिलाफ सुबूत नहीं हैं। पुलिस ने इस संबंध में सीआरपीसी 169 के तहत कार्रवाई कर कोर्ट में रिपोर्ट सौंपी। 

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कोर्ट के आदेश पर बुधवार को शानू लफ्फाज व शारिक अहमद को रिहा कर दिया गया। जेल अधीक्षक बीडी पांडेय ने बताया कि अन्य चार मोहम्मद सरताज, सरफराज, मोहम्मद आकिल व मोहम्मद नासिर का जो आदेश आया है उसमें संशोधन होना है। कल उनके दस्तावेज कोर्ट भेजे जाएंगे, उसके बाद उनकी रिहाई की कार्रवाई शुरू होगी।

जानिए जेल से रिहा होने वाले युवकों ने क्या कहा....

मुझे लगा था अब नहीं बच पाऊंगा, शुक्र है सीसीटीवी ने बचा लिया
जेल से रिहा हुए शारिक अहमद ने कहा कि बवाल वाले दिन उन्होंने फेथफुलगंज स्थित मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ी थी। उसके बाद घर आ गए थे। बवाल की जानकारी हुई तो घर से बाहर नहीं निकला। शारिक ने कहा कि मैं आज तक थाने नहीं गया था, लेकिन पांच जून को पुलिस ने मुझे बुलाया। दूसरे दिन जेल भेज दिया। जेल जाने के बाद उम्मीद खत्म हो गई थी। लग रहा था कि अब जीवन बर्बाद हो गया है। बचना मुश्किल है, लेकिन घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में मुझे बचा लिया। उसी से बेगुनाही साबित हुई। शारिक पेशे से टेलर हैं।  

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सिपाहियों ने फोन कर बुला भेज दिया था जेल
शानू लफ्फाज पर कई केस दर्ज हैं। वह भी बुधवार को जेल से रिहा हुआ। उसने बताया कि बवाल के बाद बेकनगंज थाने के सिपाही अमित ने फोन कर बुलाया था। पहले बेकनगंज और फिर कोतवाली ले गए। दूसरे दिन लिखापढ़ी कर जेल भेज दिया था। जांच में सामने आया कि उसके घर के पास लगे कैमरों में वह वारदात के वक्त मौजूद था। इसलिए वह इस मामले में निर्दोष साबित हुआ। तभी पुलिस ने रिहाई की कार्रवाई की।

बवाल में गोली चलने की पुष्टि, किशोर को लगे थे छर्रे
नई सड़क बवाल में गोली चलने के तथ्य पर मुहर लग गई है। सप्लीमेंट्री मेडिकल में किशोर को छर्रे लगने की पुष्टि हुई है। यह किशोर केस में आरोपी भी बनाया गया है। तीन जून को हुई हिंसा के करीब एक महीने बाद सामने आया था कि एक किशोर को गोली लगी थी। चमनगंज के एक अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को इसकी जानकारी दी थी। 

इसके बाद पुलिस ने 16 वर्षीय किशोर को खोज निकाला था। उसके सीने में तीन चार जख्म के निशान थे जो भर चुके थे। प्राथमिक मेडिकल के बाद सप्लीमेंट्री मेडिकल पैनल से कराया गया था। डीसीपी पूर्वी प्रमोद कुमार ने बताया कि मेडिकल में जख्म में मेटल का जिक्र है। जिससे स्पष्ट होता है कि उसको छर्रे लगे थे। उसी आधार पर उसको भी आरोपी बनाया गया है। 

47 के खिलाफ लगाई चार्जशीट 
बेकनगंज थाने में कुल तीन केस दर्ज किए गए थे। पांच दर्जन आरोपी जेल भेजे गए थे। डीसीपी पूर्वी ने बताया कि अब तक 47 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा हाजी वसी, मुख्तार बाबा समेत तीन आरोपियों पर एनएसए लगाने की भी तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक इन सभी की फाइलें तैयार हो चुकी हैं। जैसे ही उनकी जमानतें खारिज होंगे वैसे ही पुलिस इसमें कार्रवाई शुरू कर देगी।

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