चंद्रेश्वर हाता: नई सड़क के पांच हातों में सिर्फ चंद्रेश्वर में हैं कुछ हिंदू परिवार, पहले दंगा होने से पूर्व लग जाती थी भनक
हाते के लोगों की मानें तो तीन साल में आसपास ऊंची-ऊंची इमारतें बन गई हैं। तंग गलियों में किसी अधिकारियों की निगाह न जाने के कारण धड़ल्ले से अवैध निर्माण कराया जा रहा।
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नई सड़क के पांच हातों में केवल चंद्रेश्वर हाते में ही करीब 150 हिंदू परिवार बचे हैं। 20 साल पहले यहां 300 परिवार रहते थे। कादरी हाउस, बिशु बाबू का हाता, रामगढ़ का हाता, नूरा का हाता में अब केवल दूसरे समुदाय के ही लोग रहते हैं, जबकि 1990 के पहले तक यहां मिश्रित आबादी रहती थी। चंद्रेश्वर हाते के लोग बताते हैं कि कुछ निजी कारणों से तो कुछ यहां के माहौल से परेशान होकर चले गए।
लोगों का आरोप है कि इस क्षेत्र में जब कभी भी बवाल होता है, चंद्रेश्वर हाते को जरूर निशाना बनाया जाता है। तीन जून को भी आसपास की इमारतों से हाते में पथराव किया गया। इससे पहले सन 1991 और 1992 के दंगे में भी चंद्रेश्वर हाते में हमला हुआ था। 2001 में हुए दंगे में जब एडीएम सीपी पाठक की हत्या हुई थी, तब भी इस हाते पर हमला हुआ था। इसके बाद 2019 के दंगे में भी दंगाइयों ने यहां घुसने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस की सक्रियता के चलते उनके मंसूबे पूरे नहीं हो सके।
चंद्रेश्वर हाते के लोगों ने बताया कि पहले कादरी हाउस, बिशु बाबू का हाता, रामगढ़ का हाता व नूरा का हाता में हर समुदाय के लोग रहते थे। इस कारण बवाल की सूचना पहले ही लग जाती थी। मगर 1990 के बाद से पूरी तरह से इन हातों में सिर्फ एक समुदाय के लोग बचे हैं। चंद्रेश्वर हाते के आसपास के दो किलोमीटर के दायरे में मुस्लिम आबादी सबसे ज्यादा है।