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यूपी: ‘आंखों में आंसू और हाथों में फावड़ा’, बेटी को खोने का गम, घर को दुरुस्त कर रहे है पिता-पुत्र, पढ़ें मामला

Sun, 30 Aug 2026 12:41 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Sun, 30 Aug 2026 12:41 PM IST
सार

Kanpur News: पुरवामीर गांव में 22 फीट गहरे गड्ढे में समाने से यशी (18) की मौत के दो दिन बाद भी प्रशासन की ओर से कोई सुध नहीं ली गई है। पीड़ित पिता विनोद और भाई भास्कर पड़ोसी के बरामदे में रात गुजारने के बाद खुद ट्रैक्टर और फावड़े से घर के पास बने गड्ढे को भरने में जुटे हैं।

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Kanpur Tears in their eyes spades in their hands grieving loss of daughter father and son repairing home
मिट्टी खुदाई करता भाई भास्कर व मोहल्ले के लोग - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में पुरवामीर गांव में दो दिन पहले घर के आंगन में 22 फीट गहरी जमीन में समाकर यशी (18) की दर्दनाक मौत हो गई थी। करीब सात घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन की खबर प्रदेश के कोने-कोने तक पहुंची। नेताओं, अधिकारियों के आश्वासनों का दौर चला, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है।

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शासन की उदासीनता का आलम यह है कि जिस भाई भास्कर ने एक दिन पहले ही अपनी लाडली बहन को खोया, जिस पिता विनोद ने अपनी बेटी को अपनी आंखों के सामने धरती में समाते देखा। वहीं, पिता-पुत्र आज दो दिन से पड़ोसी अजय पांडे के बरामदे में रात गुजारने के बाद खुद ही फावड़ा उठाकर अपना उजड़ा घर भरने को मजबूर हैं।

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22 फीट के गड्ढे को भर दिया जाएगा
हादसे के दौरान रेस्क्यू के लिए हुई खुदाई में उनका पूरा घर क्षतिग्रस्त हो गया। दो दिन तक परिवार ने पड़ोसी के बरामदे में भूखे-प्यासे रातें काटीं। इस उम्मीद में कि शासन-प्रशासन से कोई मदद आएगी। कम से कम खुदाई से बने 22 फीट के गड्ढे को भरकर बचे हुए एक कमरे तक आने-जाने का रास्ता ही बना दिया जाएगा, ताकि परिवार दो वक्त की रोटी बना सके।

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कम से कम सिर पर छत तो बचा लूं
लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। थक-हारकर रविवार को परिवार ने खुद ही एक ट्रैक्टर से मिट्टी की भराई कराई। पिता विनोद, बेटा भास्कर और मोहल्ले के कुछ लोग फावड़े से गड्ढे की भराई कर रहे हैं। आंखों में आंसू और हाथों में फावड़ा लिए पिता कह रहा हैं कि  बेटी तो चली गई, अब कम से कम सिर पर छत तो बचा लूं।

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