Kanpur Sikh Riots: कानपुर एसआईटी ने 11 केसों में खोज निकाले आरोपी, दिल्ली एसआईटी सिर्फ छह चार्जशीट ही कर सकी दायर
वर्ष 1984 में देश के कई हिस्सों में भड़के सिख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली में 2700 हत्याएं हुईं थीं। वहीं, कानपुर में 127 लोगों का मार दिया गया था। इस मामले में कानपुर एसआईटी की कार्रवाई आगे है, जबकि दिल्ली की पीछे।
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सिख विरोधी दंगों के केसों की विवेचना और कार्रवाई में कानपुर एसआईटी अब तक अव्वल रही है। दिल्ली एसआईटी अबतक सिर्फ छह केसों में ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जबकि दिल्ली में 2700 सिखों की हत्या की गई थी और कानपुर में 127 की हुई थी। कानपुर एसआईटी ने अब तक 40 केसों (हत्या कर डकैती डालने वाले) में से 11 केसों की विवेचना पूरी कर ली है। 96 आरोपियों को खोज निकाला, जिसमें 74 जीवित हैं।
इनमें चार की गिरफ्तारी भी कर ली। तीन केसों की तफ्तीश और शुरू की है। यह पूरी कार्रवाई साढ़े तीन साल के भीतर की गई है। दूसरी तरफ दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों की जांच 2014 में एसआईटी ने शुरू की थी। 65 केसों से शुरू हुई जांच आठ केसों तक सिमट गई, जिसमें से छह मुकदमों में चार्जशीट दाखिल की गई। दो अन्य मामलों में विवेचना जारी है।
तीन की गिरफ्तारी की, 15 ने सरेंडर किया
दिल्ली एसआईटी ने 18 आरोपियों को खोजा था, इनमें से सिर्फ तीन की गिरफ्तारी कर सकी थी। अन्य 15 आरोपी कोर्ट में सरेंडर कर जेल चले गए थे। कानपुर एसआईटी ने पहली गिरफ्तारी में ही चार आरोपियों को जेल भेजा। 70 आरोपियों की गिरफ्तारी बाकी है। एसआईटी के अफसरों का कहना है कि गिरफ्तार किए जा रहे आरोपी कई और आरोपियों के बारे में भी जानकारी दे रहे हैं, ऐसे में आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है।